दिल्ली-एनसीआर में इस वर्ष दर्ज किए गए अभूतपूर्व वायु प्रदूषण के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2026 तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगभग 1500 करोड़ रुपए की योजनाओं का मसौदा तैयार कर लिया है। ये योजनाएं शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को दिल्ली में समीक्षा बैठक में पेश की जाएंगी।
इस सर्दी के मौसम में दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में वायु की गुणवत्ता लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हो रही है। बढ़ते प्रदूषण को लेकर आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों ने भी केन्द्र व राज्य सरकारों पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ाया। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक समग्र रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए थे।
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा की प्रस्तुति में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल होंगे–
- सड़कों का विस्तार और पुनर्निर्माण: धूल उन्मूलन के लिए मुख्य और स्थानीय स्तर की सड़कों का अपग्रेडेशन, नियमित स्प्रेयर से सफाई की व्यवस्था।
- फुटपाथ एवं टाइल-लेआउट: गांवबस्ती व नए विकास क्षेत्र में पैदल मार्गों की पक्की पक्तीकरण व टाइल-लगे फुटपाथ जिससे सड़क किनारे धूल कम उड़े।
- सार्वजनिक परिवहन प्रणाली: पुराने फ्लीट की जगह इलेक्ट्रिक बसें, मेट्रो विस्तार व फीडर बस सर्विस को बेहतर बनाना ताकि निजी वाहन उपयोग सीमित हो।
- प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों का नियंत्रण: वायु प्रदूषण मानकों का सख्ती से पालन, चिमनी पर सेन्सर व ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था।
- सीवर और नाला सफाई: जलभराव और कीचड़ से उठने वाली बदबू व वाष्प से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु ड्रेनेज लाईन क्लीनिंग और नियमित मेंटनेंस।
प्राधिकरण ने कहा है कि इन पहलों के अलावा पेड़-पौधों की रोपण, स्ट्रीट लाइट को स्मार्ट सेंसर्स से जोड़ना तथा निर्माण स्थलों पर धूल निरोधक नींव डालना भी योजनाओं में शामिल किया गया है।
जानकारी के मुताबिक सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण की वर्तमान गतिविधियों एवं चुनौतियों पर चर्चा की थी। अब शुक्रवार को होने वाली बैठक में ग्रेटर नोएडा को लेकर पूर्ण कार्ययोजना और लागत-निहित डेटा पेश किया जाएगा।
बैठक के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और प्राधिकरण दोनों मिलकर योजनाओं का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करेंगे। 2026 तक सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन बेल्ट व मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट सहित समग्र रणनीतियों के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।


