किसी भी शहर के निवासियों के लिए को सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि शासन प्रशासन उनको सुविधा के बारे में जागरूक भी करें या फिर यूं कहें कि लोगों को वह सुविधा अपने लिए लगनी चाहिए किंतु ग्रेटर नोएडा वेस्ट में प्राधिकरण के निर्देश पर पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनियों द्वारा बनाए गए फुटओवर ब्रिज क्या वाकई लोगों के लिए सहायक हो पा रहे हैं या फिर यह ठेकेदारों के लिए कमाई का साधन मात्र बनकर रह गए हैं लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे है ।
दरअसल गौर सिटी चौक पर लोगों को सड़क पार करने में समस्या होती थी इसलिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एन जी रवि कुमारके निर्देश पर एक फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया गया। किंतु इस फुटओवर ब्रिज के बनाए जाने के बावजूद प्रतिदिन लोग सड़क को ही पार करने में लगे रहते हैं ।इनमें बहुत सारे लोग मजदूर होते हैं तो बहुत सारे लोग आसपास के शॉपिंग मॉल, ऑफिसेज में नौकरी करने वाले भी है जो यहां ऑटो से आकर उतरते हैं और फिर सड़क क्रॉस करके दूसरी तरफ जाते हैं ऐसे में इस पूरे फुटओवर ब्रिज की उपयोगिता सिर्फ विज्ञापन तक सीमित रह गई एनसीआर खबर ने सावर शाम को वहां रह कर यह समझा कि इस फोटो पर फुटओवर ब्रिज इस तरीके से लगा दिया गया है कि लोगों को यह पता ही नहीं चलता की यहां पर फुटओवर ब्रिज है भी । महंगे वर्ल्ड क्लास विज्ञापन को देखकर गरीब मजदूर तबका उन पर चढ़ने के लिए सोचता तक नहीं है । दोनों ही तरफ रास्ते पर ब्लॉकेज है ।
दूसरी बात चौराहे पर अंडरपास के चल रहे निर्माण के बावजूद कहीं पर भी लोगों को यह नहीं बताया जाता कि वह सड़क पार करने के लिए फुटओवर ब्रिज का इस्तेमाल करें ऐसे में अक्सर इन लोगों के चलते दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। हद तो तब हो गई जब पुलिस के सिपाही भी फुटओवर ब्रिज की जगह सड़क ही पार करते दिखाई दिए । ऐसा मैं बड़ा प्रश्न यही है कि क्या करोड़ों रुपए लगाकर बनाए गए फुटओवर ब्रिज को आम जनता प्रयोग नहीं करना चाह रही है या आम जनता को पता ही नहीं चल रहा है कि यह फुटओवर ब्रिज उन्हीं के लिए बनाया गया


