नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर चल रही एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान मंगलवार को काफी तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की टिप्पणियों पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए उनके वकील को फटकार लगाई। अदालत ने यहां तक कहा कि आतंकवादी अजमल कसाब ने भी अदालत की अवमानना नहीं की, लेकिन मेनका गांधी ने यह किया है। हालांकि, कोर्ट ने अपनी ‘उदारता’ के चलते फिलहाल उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से परहेज किया है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेनका गांधी ने अदालत के आदेशों और सुझावों पर ‘हर तरह की टिप्पणी’ की है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है। पीठ ने कहा, “हम केवल अपनी मैग्नैनिमिटी (उदारता) के चलते अभी अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रहे हैं।” कोर्ट की यह टिप्पणी तब आई, जब मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अपने मुवक्किल के बयानों पर संयम बरतने की दलील दी।
जस्टिस विक्रम नाथ ने रामचंद्रन से तीखे लहजे में पूछा, “क्या आपने अपनी क्लाइंट (मेनका गांधी) की टिप्पणियां देखी हैं? उन्होंने बिना सोचे-समझे हर जगह बयान दिए हैं। क्या आपने उनका बॉडी लैंग्वेज देखा है?” इस पर रामचंद्रन ने जवाब दिया कि उन्होंने अजमल कसाब की भी पैरवी की है और बजट आवंटन एक नीति का विषय है। इसी दौरान जस्टिस नाथ ने उन्हें कड़ी फटकार देते हुए कहा, “अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी क्लाइंट ने की है।”
इससे पहले, जस्टिस संदीप मेहता ने भी मेनका गांधी के वकील से सवाल किया कि जब वे खुद केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं, तो आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने बजट आवंटन में क्या भूमिका निभाई। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) की जिम्मेदारी तय करने वाली अपनी पिछली टिप्पणी को उसने व्यंग्य के तौर पर नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता से कहा था। अदालत ने 13 जनवरी को यह संकेत दिया था कि कुत्तों के काटने के मामलों में राज्यों पर भारी मुआवजा लगाया जा सकता है और डॉग फीडर्स की भी जवाबदेही तय की जाएगी।

पीठ का गुस्सा इस बात पर था कि मेनका गांधी ने अदालत के इस सुझाव पर जमकर आपत्ति जताई थी और सार्वजनिक मंचों पर इसकी आलोचना की थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है और ऐसी टिप्पणियों से न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ता है। अदालत ने साफ कर दिया कि अगर भविष्य में ऐसा आचरण जारी रहा तो उसे अवमानना की कार्यवाही करने से नहीं चुका जाएगा। हालांकि, अभी कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन कोर्टरूम में बनी यह कड़वाहट अभी थमती नजर नहीं आ रही है।


