युवराज की मौत का जिम्मेदार कौन? क्या सच में हम साधनों में इतने असहाय हैं या हम और हमारा प्रशासन इतना संवेदनशील नहीं है जो एक युवक को बचा पाता – बालेश्वर त्यागी

Community Reporter
4 Min Read

बालेश्वर त्यागी। नोएडा में चार दिन पहले कार सवार युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत पानी से भरे गड्ढे में कार समेत गिरने से हुई मौत की जांच एसआईटी ने प्रारंभ कर दी है. एसआईटी में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मेरठ परिक्षेत्र , मंडलायुक्त मेरठ और मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग हैं. कल एसआईटी ने नोएडा अथॉरिटी के कार्यालय पहुंचकर बयान लिए और घटना स्थल का निरीक्षण किया. कल ही पुलिस ने उस बिल्डर को गिरफ्तार किया जिनके प्लाट में गड्ढा खोदा गया था.

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

सरकार ने घटना को पूरी गंभीरता से लिया इसलिए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटा दिया और जेई को बर्खास्त कर दिया . साथ ही इतने उच्च अधिकारियों की एसआईटी गठित की है. बात केवल इतनी तक सीमित नहीं है कि गड्ढा क्यों खोदा , किसने खोदा , इतने दिन तक इतने गहरे गड्ढे को जिसमें लंबे समय से पानी भरा था क्यों इसका संज्ञान नहीं लिया गया ? क्यों उस जगह बैरिकेटिंग नहीं की गई ? बात उससे गंभीर ये है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मात्र 15 कि.मी. दूर दो घंटे तक एक इंजीनियर कार की छत पर अपने को बचाने के लिए गुहार लगाता रहा . वहां पुलिस भी पहुंची , फायर ब्रिगेड भी पहुंची लेकिन उस व्यक्ति को तालाब नुमा गड्ढे से नहीं बचाया जा सका

क्या सच में हम साधनों में इतने असहाय हैं कि हमारे पास एक वोट भी नहीं है जो ठंडे पानी में उस असहाय व्यक्ति तक पहुंच पाते. या हम और हमारा प्रशासन इतना संवेदनशील नहीं है जो एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरता.क्या सच में देश की राजधानी में भी ऐसे साधन उपलब्ध नहीं हैं ? या कोई ऐसा अधिकारी नहीं था जो सारी आपात स्थिति में कॉर्डिनेट करके ऐसे साधन मंगा सकता था ? हम देखते हैं कि कई बार दूरदराज के क्षेत्रों में भी बोर वेल में गिरे बच्चों को बचाने के लिए सेना के जवानों समेत सारे साधन जुटा लिए जाते हैं.घटना स्थल पर कलेक्टर और एसएसपी समेत समस्त अधिकारी पहुंचते हैं . संभवतः इतने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति के कारण ही सभी साधनों को जुटाना संभव होता है .यहां तो दिल्ली के एक मोहल्ले जैसा नोएडा में एक युवा इंजीनियर दो घंटे तक चिल्लाने और मदद मांगने के बाद भी जल में समा जाता है. वहां पुलिस भी है और फायर ब्रिगेड भी है लेकिन साधनों के अभाव में उस तक पहुंचना संभव नहीं हो सका

एसआईटी में वरिष्ठ अधिकारी हैं . वे सारे पहलुओं की जांच करेंगे. लेकिन इस पहलू से भी जांच होनी चाहिए कि क्या प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारियों को सूचित ही नहीं किया गया ? अगर सूचना मिली तो वरिष्ठ अधिकारियो ने कॉर्डिनेशन के लिए क्या किया ? क्या कालिंदी कुंज से वोट नहीं आ सकती थी ? क्या सेना की मदद नहीं ली जा सकती थी ? या दूरदर्शिता के अभाव में सब कुछ देखते देखते समाप्त हो गया ?
क्या जनपद मुख्यालय पर ऐसे संसाधन उपलब्ध नहीं होने चाहिए जो ऐसी आपात स्थिति से निपटा जा सके? क्या आइंदा के लिए ऐसी किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधन जनपद स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी ? क्या ऐसी स्थिति से निपटने के लिए शासन स्तर से कोई प्रोटोकॉल जारी करके आधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी ? ताकि वे स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर मार्गदर्शन कर सकें

- Advertisement -
Ad image

लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता है

Share This Article
कम्यूनिटी रिपोर्टर आपके इवैंट प्रमोशन ओर सोसाइटी न्यूज़ को प्रकाशित करता है I अपने कॉर्पोरेट सोशल इवैंट की लाइव कवरेज के लिए हमे 9711744045/9654531723 पर व्हाट्सएप करें I हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे