नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नोएडा में एक कमर्शियल साइट पर बनी खाई में डूबने से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में संज्ञान लेते हुए गंभीर चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह घटना पर्यावरण नियमों के पालन से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाती है और कानून के उल्लंघन का संकेत देती है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और सिंचाई विभाग सहित पांच अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास एक दर्दनाक हादसे में हुई, जिसमें उनकी कार पानी में डूब गई। एनडीआरएफ की टीम ने घटना के लगभग तीन दिन बाद पानी में डूबी हुई कार को बाहर निकाला। कार के शीशे और सनरूफ टूटे हुए पाए गए, जो संभवतः पानी के अत्यधिक दबाव के कारण हुआ होगा।
बेसमेंट बनातालाब, भूमि उपयोग में बड़ी खामी
ट्रिब्यूनल के रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित भूमि मूल रूप से एक प्राइवेट कमर्शियल मॉल के लिए आवंटित की गई थी, जिसके लिए अनुमति भी दी गई थी। हालांकि, लगभग 10 साल तक भूमि पर कोई निर्माण नहीं हुआ और इस बीच पास के आवासीय सोसाइटियों से वर्षा जल और अनुपचारित सीवेज खुले तौर पर इस गड्ढे में बहता रहा। धीरे-धीरे ये पानी से स्थायी रूप से भर गया और “कृत्रिम तालाब” बन गया।
एनजीटी ने इस स्थिति को “जनहित में घातक” बताया और कहा कि ऐसी भूमि को खुला छोड़ना, जहां बिना किसी चेतावनी या सुरक्षा बाड़ के लोग प्रवेश कर सकते थे, बेहद लापरवाहीपूर्ण कार्य है।

NGT ने पूछा—कौन है जिम्मेदार?
ट्रिब्यूनल ने यूपी सरकार, नोएडा प्राधिकरण, नगर निगम और संबंधित प्राइवेट विकासकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, एनजीटी ने जल्द ही एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने के निर्देश दिए, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
एनजीटी ने संकेत दिया कि भारतीय पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के तहत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। एनजीटी ने अगली सुनवाई 10 अप्रैल को निर्धारित की है। इस बीच, उसने स्थानीय प्राधिकरणों को तत्काल निर्देश दिए हैं कि नोएडा सहित पूरे एनसीआर में खुले गड्ढों, बेकार पड़ी भूमि और सीवेज बेसिन्स के सर्वेक्षण करें और खतरनाक स्थलों पर तत्काल सुरक्षा बाड़ लगाए जाएं।
घटना के बाद से पीड़ित परिवार सहित स्थानीय नागरिकों के बीच आक्रोश है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पारदर्शी जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


