सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में नोएडा पुलिस ने दो अन्य आरोपी बिल्डर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने लोट्स ग्रीन प्रोजेक्ट से जुड़े बिल्डर रवि बंसल पुत्र प्रकाश चंद निवासी फ्लैट नंबर D-76 मंगलम रेजिडेंसी अपार्टमेंट थाना sector 21(d) फरीदाबाद हरियाणा, सचिन करनवाल पुत्र गोपाल करनवाल निवासी फ्लैट नंबर ब -6 बिल्डिंग नंबर A-11 शालीमार गार्डन एक्सटेंशन 2 साहिबाबाद थाना शालीमार गार्डन जिला गाज़ियाबाद गिरफ्तार किया है। इससे पहले अभय सिंह को पहले ही ६ दिन की हिरासत में भेजा जा चुका है । वहीं दोनों बिल्डरों के खिलाफ बुधवार दोपहर को एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड व विश टाउन के भागीदारों के खिलाफ मुकदमा कराया है। मामले में बिल्डर अभय कुमार, मनोज कुमार, संजय कुमार, अचल वोहरा व निर्मल के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण, जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब उसके बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक खुले गड्ढे में गिरने से मौत के बाद अब एक खौफनाक सच सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी ने साल 2022 में ही नोएडा प्राधिकरण को चेतावनी दी थी कि सेक्टर 150 में सीवरेज और मुख्य नाली की लाइनें ढह चुकी हैं, जिसके कारण भारी जलभराव हो रहा है और “कोई भी दुर्घटना हो सकती है”। इस चेतावनी के बावजूद प्राधिकरण की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद तीन साल बाद एक नौजवान की जान चली गई।

डेवलपर ने 2022 में ही लिखा था पत्र – “तत्काल मरम्मत नहीं हुई तो हो सकती है दुर्घटना”
मार्च 2022 में, डेवलपर कंपनी एमजेड विजटाउन प्लानर्स ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को एक आधिकारिक पत्र लिखा था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि नोएडा के सेक्टर 150 के प्लॉट एससी/02, ए-3 पर सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम में गंभीर रिसाव है। ढह चुकी नाली लाइनों के कारण, जलभराव हो गया है और प्लॉट के पूरे बेसमेंट में सीवेज का पानी भर गया है।
पत्र में लिखा गया था – “यदि तत्काल मरम्मत कार्य नहीं किए गए, तो अनजाने में किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्घटना हो सकती है।” डेवलपर्स ने चेतावनी दी थी कि मिट्टी के कटाव और पानी के दबाव के कारण सड़क धंसने का खतरा है और लगाई गई बैरिकेडिंग भी लगभग ढह चुकी है।

कंपनी ने आग्रह किया कि क्षतिग्रस्त लाइनों को तुरंत बहाल किया जाए, जमा हुए पानी को निकाला जाए और सड़कों की स्थिति का आकलन किया जाए ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।
इस पत्र की प्रतियां नोएडा प्राधिकरण के योजना और कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय थाना प्रभारी (एसएचओ) और नोएडा डीसीपी (पुलिस आयुक्त) को भी भेजी गई थीं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और निर्माण विभाग ने इस मामले पर गंभीरता से कोई कार्रवाई नहीं की।
इनके अलावा नोएडा प्राधिकरण पर प्रश्न ये भी उठ रहे है कि सेक्टर 150 नोएडा स्थित उस भूखंड संख्या एस सी 02/ए3 पर लगी बेरीकेडिंग को लगभग चार वर्ष पहले प्राधिकरण ने क्यों हटवा दिया था और न केवल हटवा दिया था बल्कि बेरीकेडिंग लगाने के जुर्म में बिल्डर पर छः लाख रुपए की पेनाल्टी भी लगाई गई थी।
बेरीकेडिंग करने पर 2022 में प्राधिकरण ने लगाया था बिल्डर पर छः लाख रुपए अर्थ दंड
कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो 2022 में प्राधिकरण द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में सेक्टर 150 स्थित 13 बिल्डरों पर अपने प्रोजेक्ट परिसरों में अवैध रूप से यूनीपोल और होर्डिंग लगाकर विज्ञापन करने के आरोप में पेनाल्टी लगाने का ब्यौरा दिया गया था। इस विज्ञप्ति में सबसे ऊपर नाम इसी भूखंड के अर्थम बिल्डर का था।उस पर छः लाख रुपए अर्थ दंड लगाया गया है। जिस भूखंड में पानी भरे होने से युवराज की डूबकर मौत हुई वहां कहीं भी यूनीपोल और होर्डिंग लगाने की जगह नहीं है। दरअसल अर्थम बिल्डर ने अपने भूखंड पर सड़क की ओर लगभग 15 फीट ऊंची टिन की चादरों की बेरीकेडिंग लगाई हुई थी। उन्हीं चादरों पर अपने प्रोजेक्ट का नाम लिखा था। युवराज की तेज रफ्तार कार उस बेरीकेडिंग से टकराकर रुक जाती या नहीं ये विवाद का विषय हो सकता है पर इसी बेरीकेट्स के ना होने के कारण कार आराम से पानी में चली गयी इससे कोई इन्ज्कार नहीं कर सकता है।
ताज़ा जानकारी के अनुसार गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने अर्थम बिल्डर के गिरफ्तार अभय सिंह की जमानत पर फैसला करने से पहले मुकदमे के विवेचक से उस भूखंड से बेरीकेडिंग हटवाने वाले अधिकारी के बारे में जानकारी मांग ली है।अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।


