आशु भटनागर। नोएडा के सेक्टर 150 में युवराज मेहता की मृत्यु ने जिले से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति को बदल दिया है । इसमें प्राधिकरण पुलिस प्रशासन और नेताओं के साथ एनजीओ के नेता भी कांपते दिखाई दे रहे हैं फिलहाल एस आई टी की जांच का इंतजार हो रहा है ।
तो इस समय जिले की राजनीती में पहला किस्सा प्रशासन पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों की स्थिति को लेकर है । दरअसल एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर जन दबाव चौतरफा कम होने का नाम नहीं ले रहा है । जहां एक और एसआईटी की जांच रिपोर्ट कहीं शासन प्रशासन और सरकार को बचाने वाली न निकल जाए इसको लेकर दबाव शुरू हो गए हैं, वही सरकार पर इसको लेकर पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण तीनों पर ही सख्त कार्यवाही के का दबाव भी बढ़ गया है। फिलहाल एसआईटी की रिपोर्ट में प्राधिकरण के कुछ प्रबंधक, वरिष्ठ प्रबधक के साथ साथ तीन जीएम समेत एक रिटायर ओएसडी पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। कहा जा रहा है यह ओएसडी उस समय हेल्थ, विज्ञापन से लेकर उद्यान तक तीनों विभागों के ओएसडी रहे और उनके कहने पर ही बिल्डर द्वारा इस स्थल की बैरीकटिंग करने पर 6 लाख की पेनल्टी लगाई गई थी। जिसके बाद यहां किसी ने भी कोई काम नहीं किया। वहीं पुलिस में सीएफओ से लेकर डीसीपी स्तर तक के पुलिसकर्मियों पर आंच आ सकती है, किंतु अगर युवराज के गुड़गांव स्थित बार की पार्टी के वीडियो वायरल होने का मामला भी एक पक्ष बना और उसका दबाव बढ़ा तो कारवाही किस स्तर पर पहुंच सकती है इसकी कल्पना की जा सकती है। इधर जिला प्रशासन में जिलाधिकारी पर गाज गिरना लगभग तय हो गया है । हालांकि रिपोर्ट पेश होने और उसके बाद कौन-कौन मैनेज कर लेगा इसको लेकर भी तमाम राजनीतिक उठा पटक शुरू हो गई है ।
युवराज हत्याकांड में ही इन सब के बाद दूसरा मामला राजनेताओं की स्थिति पर भी है असल में इस पूरे प्रकरण में सत्ता पक्ष के सांसद और विधायक पर भी प्रश्न उठा दिए हैं । गौतम बुध नगर जिले के सांसद डॉ महेश शर्मा की कमजोरी से लेकर नोएडा विधायक पंकज सिंह की राजशाही वाली शैली पर तमाम आरोप अब विपक्षी नेताओं ने लगाने शुरू कर दिए हैं। लोगों को बीते 10 वर्षों से जो मौका नहीं मिल रहा था वह मौका अब खुलकर मिलता नजर आ रहा है जिससे आने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में पंकज सिंह के मंत्री बनने की संभावनाओं पर कुठाराघात हो सकता है । लोगों का गुस्सा पंकज सिंह की नोएडा को ग्रांटेड लेने की कार्यशाली पर अधिक है और उसके परिणाम पंकज सिंह के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल भरे हो सकते हैं।
तीसरा मामले में जिले के एक समाजसेवी और उनके संगठन ने भी भी युवराज मेहता की हत्या में रोटी सकने के मामले में अपने हाथ जला लिए हैं। हुआ यूं की इस हत्याकांड में मुनेंद्र नाम के एक डिलीवरी बॉय को लेकर पुलिस के बयान बदलवाने की जो जानकारियां फिजा में घूमी तो उसमें नोएडा की एक समाज सेवी संस्था के नेता जी ने उसे मौका मांनते हुए उसके सम्मान की तैयारी शुरू कर दी। इस सम्मान कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र जैसे ही मीडिया को बांटे गए वैसे ही प्रशासन एक्टिव हो गया और तय तिथि से कुछ घंटे पूर्व नेता जी की तरफ से संदेश दिया गया कि अपरिहार्य कार्यों से डिलीवरी बॉय के सम्मान का कार्यक्रम स्थगित किया जाता है। अब यह कार्यक्रम स्थगित क्यों किया गया यह किसी से छुपा तो नहीं है। फिलहाल नेताजी के विरोधी बस यही कह रहे हैं कि जब कुछ करने की हौसला नहीं है तो ऐसे बडबोलेपन से क्या फायदा ? हमारी तरह पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण के साथ अवॉर्ड फंक्शन में सम्मान पाते रहो।

चौथा किस्सा जिले के मुख्य विपक्षी दल का है, इधर जिले से लेकर उत्तर प्रदेश तक युवराज हत्या के कारण लोग परेशान हैं तो शहर में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी में अलग ही खेल चल रहा है जानकारी के अनुसार पार्टी आने वाले कुछ दिनों में जिला अध्यक्ष और नोएडा महानगर अध्यक्ष के अध्यक्षों को बदलने का काम करने जा रही है। ऐसे में पार्टी की पूरी रणनीति जिस समय युवराज हत्याकांड को लेकर सख्त होनी चाहिए थी, उस समय पार्टी में “कौन बनेगा अध्यक्ष” को लेकर गुटबादी तेज हो गई है । जानकारी के अनुसार खुद के नाम में शेर उपनाम रखने वाले वाले एक नेता ने जिला अध्यक्ष के लिए अपना दांव चल दिया, उसके लिए सिफारिश तक हो गयी किंतु अब विरोधियों ने अखिलेश यादव से उसके भाजपा से जुड़े होने की शिकायतें और संबंध की जानकारी पहुंचानी शुरू कर दी है और इसी को लेकर आपस में सिर-फुटौवल की नौबत आ गयी है। आरोप है कि इन नेताजी के भाई भाजपा में किसान मोर्चे में पदाधिकारी हैं। ऐसे में लोगों के आरोप हैं कि जिले में सपा को कमजोर करने के लिए इन्हें भाजपा सांसद ऐसा अध्यक्ष बनवाना चाहते है । वही जिले के लोग यह कह रहे हैं कि इस जिले में भाजपा राज क्यों करती है क्योंकि जब-जब समाजवादी पार्टी को जनता के लिए खड़ा होना होता है वह अपने ही अंतर विरोध हो से जूझ रही होती है या फिर उसके नेता अपनी व्यक्तिगत छवि के लिए काम करने लग जाते हैं।


