बजट 2026-27: जानिए क्या सस्ता और क्या महंगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टैक्स रणनीति

Community Reporter
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पारुल भटनागर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में 2026-27 का बजट पेश किया, जो एक स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ उभरा है। यह बजट सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ को गति देने, घरेलू उत्पादन को संरक्षण देने और स्वास्थ्य तथा पर्यावरण जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर फोकस करता है। हालांकि, यह बजट करदाताओं के लिए पूरी तरह से राहत भरा नहीं है। इसमें कुछ वस्तुओं को सस्ता किया गया है, तो कुछ को महंगा भी।

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यह बजट मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष करों—कस्टम्स ड्यूटी और एक्साइज—पर केंद्रित है। इन बदलावों का असर बाजार में कुछ हफ्तों में दिखना शुरू हो जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बजट में आपकी जेब पर क्या भारी पड़ेगा और क्या राहत देगा।

क्या सस्ता हुआ? (स्वास्थ्य, तकनीक और ऊर्जा पर जोर)

वित्त मंत्री ने इस बजट में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है जो आम आदमी की बुनियादी जरूरतों और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े हैं।

  1. दवाइयां: जीवन रक्षक दवाएं अब और सुलभ स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए, सरकार ने डायबिटीज, कैंसर और कुछ दुर्लभ बीमारियों की दवाइयों पर कस्टम्स ड्यूटी में छूट या कमी की है। इसका सीधा मतलब है कि जीवन रक्षक और आवश्यक दवाएं अब पहले से सस्ती मिलेंगी। यह कदम चिकित्सा महंगाई को कम करने और आम जनता की पहुंच को बढ़ाने के लिए सराहनीय है।
  2. इलेक्ट्रिक वाहन (EV): ईंधन की लागत से मुक्ति की ओर सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लिथियम-आयन बैटरी और संबंधित कच्चे माल पर कस्टम्स ड्यूटी घटा दी है। इससे EV बैटरी, इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारें सस्ती होंगी। यह कदम न केवल वाहन खरीदारों के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। यह उन पेशेवरों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो शहरी आवागमन में इलेक्ट्रिक विकल्पों की तलाश में हैं।
  3. मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: ‘मेक इन इंडिया’ का फायदा भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य से, मोबाइल फोन के कंपोनेंट्स (जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और पीसीबीए) पर आयात शुल्क घटाया गया है। इससे भारत में असेंबल होने वाले स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य गैजेट्स की लागत कम होगी। तकनीकी पेशेवरों और युवाओं के लिए यह एक बड़ी राहत है।
  4. खेल का सामान: खेलो इंडिया को बल खेलो इंडिया मिशन के तहत घरेलू खेल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खेल उपकरणों पर आयात शुल्क में कमी की गई है। इससे एथलीटों और फिटनेस उत्साही लोगों के लिए उपकरण सस्ते होंगे।
  5. नवीकरणीय ऊर्जा: सोलर पैनल हुए सस्ते स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल और संबंधित सामग्री पर टैक्स घटाया गया है। इससे घरेलू और वाणिज्यिक सोलर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना लागत कम होगी।
  6. घरेलू उपकरण और स्वास्थ्य बीमा: माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स पर ड्यूटी छूट से ये उपकरण सस्ते हो सकते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कर कटौती की सीमा (Section 80D) बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे बीमा धारकों को अप्रत्यक्ष रूप से थोड़ी राहत मिलेगी।

क्या महंगा हुआ? (लक्जरी और हानिकारक वस्तुएं)

सरकार ने उन वस्तुओं पर टैक्स का बोझ बढ़ाया है जो या तो विलासिता की श्रेणी में आती हैं या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

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  1. शराब और तंबाकू: सेहत पर पड़ेगा भारी असर सरकार ने शराब, सिगरेट, पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस बढ़ा दिया है। ये बदलाव 1 फरवरी से ही प्रभावी हो गए हैं। इसका सीधा असर इन उत्पादों की खुदरा कीमतों पर दिखेगा। सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
  2. लक्जरी आयातित सामान: अमीरों की महंगाई हाई-एंड वॉच, डिजाइनर कपड़े, ब्रांडेड जूते, लक्जरी कारें, ज्वेलरी और अन्य आयातित लक्जरी आइटम्स पर कस्टम्स ड्यूटी बढ़ा दी गई है। इससे विदेशी ब्रांड्स के शौकीनों को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी। सरकार का यह कदम घरेलू लक्जरी ब्रांड्स को बढ़ावा देने और व्यापार घाटे को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
  3. प्रोसेस्ड फूड और अन्य: कुछ प्रोसेस्ड फूड आइटम्स और अन्य ‘सिन’ गुड्स पर बढ़े टैक्स से अप्रत्यक्ष महंगाई का असर दिख सकता है।

किसके लिए क्या है बजट?

पेशेवर वर्ग के लिए: इस बजट में सैलरीड क्लास के लिए आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिससे कुछ निराशा हो सकती है। हालांकि, यदि आप तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हैं या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करते हैं, तो आपको लागत बचत में फायदा मिलेगा। स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ने से भी मध्यम वर्ग को थोड़ी राहत मिलेगी।

उद्योग जगत के लिए: यह बजट घरेलू निर्माताओं के लिए अनुकूल है। आयात शुल्क में समायोजन ने घरेलू उत्पादन को संरक्षण दिया है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और खेल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। नए अपेरल पार्क और इन्फ्रास्ट्रक्चर कपडा उधोग को फायदा देगा।

उपभोक्ता के नजरिए से: बाजार में असर कुछ हफ्तों में दिखेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों और मोबाइल फोन की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है, जबकि शराब और लक्जरी सामान महंगे हो जाएंगे।

अंत में कहे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट एक ‘रणनीतिक बजट’ है। यह सीधे तौर पर आयकरदाताओं को राहत नहीं देता, लेकिन वस्तुओं की कीमतों को समायोजित करके जीवनयापन की लागत को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को सस्ता बनाकर सरकार ने दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाया है, जबकि लक्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर कर बढ़ाकर राजस्व जुटाने और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है। अब देखना यह है कि इन नीतिगत बदलावों का वास्तविक बाजार पर कितना और कैसा असर पड़ता है।

लेखक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म से जुडी हैं, जो ऑडिटिंग, टैक्स कंसल्टेंसी, वित्तीय योजना, अनुपालन (Compliance) और लेखांकन सेवाएं प्रदान करते हैं

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