निर्मला सीतारमण के बजट पर विपक्ष का हमला, कहा- आम आदमी के लिए नहीं, किसानों और मध्यम वर्ग को निराशा

NCRKhabar Mobile Desk
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को संसद में पेश किए गए आम बजट को विपक्षी दलों ने खारिज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह बजट आम आदमी, किसान, मजदूर और युवाओं को निराश करने वाला है। इसे चुनावी रणनीति के तहत तैयार किया गया एक दस्तावेज बताया जा रहा है, जिसमें मध्यम वर्ग और गरीबों के हितों की अनदेखी की गई है।

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विपक्षी नेताओं ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें आम आदमी के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं है। उनका कहना है कि सरकार ने केवल उन राज्यों को ध्यान में रखा है जहां चुनाव होने वाले हैं, जबकि आम जनता की बुनियादी समस्याओं जैसे महंगाई और बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

मध्यम वर्ग को बड़ा झटका: दीपक विग

समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष एवं राजनीतिक विश्लेषक दीपक विग ने बजट को ‘मध्यम वर्ग को गरीब बनाने वाला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि देश की 40 करोड़ आबादी (मध्यम वर्ग) के लिए यह अब तक का सबसे बेकार बजट है।

विग ने बजट में मध्यम वर्ग की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा, “निम्न और उच्च मध्यम वर्ग को इस बजट से कोई लाभ नहीं मिला है। आयकर में कोई खास छूट नहीं दी गई और स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 3,00,000 रुपये करना चाहिए था।”

उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी सरकार को घेरा और मांग की कि शिक्षा ऋण पर ब्याज दर 3% की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों की फीस मध्यम वर्ग की पहुंच में होनी चाहिए। स्वास्थ्य बीमा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, उन्हें घटाकर मध्यम वर्ग की पहुंच में लाना चाहिए था।”

उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को रेल और हवाई यात्रा में मिली छूट को वापस लेने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि आटा, दाल, चावल और घी जैसी बुनियादी वस्तुओं पर GST खत्म होना चाहिए था और सोने-चांदी के आभूषणों पर GST 1% करना चाहिए था, ताकि मध्यम वर्ग परंपराओं का पालन कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई और जीवन यापन की लागत को कम करने के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है।

किसानों और गरीबों की अनदेखी: सुधीर भाटी

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी ने भी बजट पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी से राहत की आस लगाए जनता को इस बजट से निराशा मिली है।

भाटी ने कहा, “बजट में गरीब, किसान, मजदूरों और युवाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। भाजपा सरकार ने यह बजट अपने खास सहयोगियों को ध्यान में रखते हुए बनाया है।” उन्होंने कहा कि बजट में सभी वर्गों को निराश किया गया है।

किसानों की मांगें अनसुनी: डॉ. रुपेश वर्मा

किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने बजट को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट ने किसानों की मूल मांगों—कानूनी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कर्ज राहत और लागत नियंत्रण—को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।

डॉ. वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा, “यूरोपीय संघ (EU) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और बिजली व बीज कानून में बदलाव खेती को कॉर्पोरेट और विदेशी बाजार के हवाले करने की दिशा में कदम हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा होगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि किसानों को दी जाने वाली पीएम किसान सम्मान निधि की राशि में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने साफ कहा कि बजट में किसानों के लिए कुछ नहीं है।

निम्न-मध्यम वर्ग, किसान, गृहणियां और नौकरीपेशा फिर ठगे गए : दीपक भाटी चोटीवाला

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गौतमबुद्ध नगर दीपक भाटी चोटीवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बजट एक बार फिर निम्न और मध्यम वर्ग के लिए छलावा साबित हुआ है और आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया गया है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नौकरीपेशा वर्ग टैक्स स्लैब में राहत और सीमा बढ़ाने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन बजट ने उन्हें भी निराश किया है। टैक्स के मोर्चे पर आम नौकरीपेशा लोगों को कोई वास्तविक फायदा नहीं मिला, जिससे मध्यम वर्ग की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

दीपक भाटी चोटीवाला ने बजट को पूरी तरह चुनावी करार देते हुए कहा कि यह बजट चुनावी राज्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसमें सिर्फ वादों का ढकोसला है। उन्होंने कहा कि आम आदमी आगे भी अपनी आमदनी का लगभग 39 प्रतिशत विभिन्न करों के रूप में सरकार को देता रहेगा, जो बेहद शर्मनाक है।

सत्ता पक्ष का पक्ष

वहीं, दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता इस बजट की खूबियां गिना रहे हैं। उनका कहना है कि इस बजट में टैक्स फाइल करने में सहूलियत, रेलवे प्रोजेक्ट और आयुर्वेदिक एम्स जैसी नई घोषणाएं की गई हैं, जो देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, विपक्ष इन घोषणाओं को आम आदमी से जोड़ने में असफल दिख रहा है और इसे केवल चुनावी स्टंट करार दे रहा है।

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