सत्यम शिवम् सुन्दरम : UGC पर कलराज मिश्र का परशुराम अवतार : ब्राह्मण राजनीति का बड़ा चेहरा बनने की कोशिश या पुत्र के लिए टिकट की राजनीती

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश व राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर जहाँ पार्टी के अधिकांश सवर्ण ब्राह्मण नेता मौन थे, वहीं कलराज मिश्र ने खुलकर इन नियमों का विरोध किया और इन्हें वापस लेने की मांग की। उनके इस बयान ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है।

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नोएडा के सेक्टर-51 स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी लाइन को किनारे करते हुए कलराज मिश्र ने स्पस्ट कहा कि UGC के हालिया नियम संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं और इससे शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। मिश्र ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समानता और समरसता को बढ़ाना होता है, लेकिन नए नियम उस दिशा में नहीं जाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इसे जाति आधारित और एकतरफा कानून बताते हुए कहा कि ऐसे प्रावधान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जा सकते। इसमें अलग-अलग जाति के आधार की बजाए सभी लोगों को अधिकार देना चाहिए कि जिसके खिलाफ भी भेदभाव हो रहा है वो शिकायत कर सके। दूसरे इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी दंड का प्रावधान होना चाहिए जो अभी नहीं है उनका दावा है कि उबकी इस मांग को लेकर विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के सदस्यों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की है और UGC कानून को वापस लेने की मांग रखी। 

इसके बाद हाल ही में एक पत्रकार के साथ पॉडकास्ट में वह भाजपा के साथ-साथ प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्व मुलायम सिंह यादव के साथ भी अपने अच्छे संबंधों को बताते हैं दिख रहे हैं, साथ ही वह बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लिए स्वयं मुख्यमंत्री पद को छोड़ दिया था। इससे उनके राजनीति में गुणा भाग लाभ हानि को साधने के तौर पर भी देखा जा रहा है ।

प्रश्न यह है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर दो बार रहने के बाद भी आखिर कलराज मिश्र इतनी सक्रिय राजनीति क्यों कर रहे हैं? उनके सवर्ण और उसमे भी ब्राह्मण राजनीती को साधने का खेल क्या है ? क्या यह केवल एक विचारधारा का प्रचार है या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छिपी है?

ब्राह्मण राजनीति का बड़ा चेहरा बनने की कोशिश?

राजनैतिक पंडितो का मानना है कि कलराज मिश्र की यह सक्रियता भाजपा में अपनी एक अलग पहचान बनाने की कवायद है। हाल ही में उन्होंने ‘विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद’ का गठन किया है, जिसके जरिए वह देश-विदेश में ब्राह्मण समाज को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा की मौजूदगी ने इस संगठन के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

माना जाता है कि भाजपा में एक समय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी बड़ी पहचान थी। उत्तर प्रदेश में दो बार प्रदेश अध्यक्ष और कई अहम विभागों के मंत्री रहने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के बावजूद उन्हें राज्यपाल बनाया गया। 2022 में देवरिया से टिकट की दौड़ में शामिल उनके पुत्र अमित मिश्र की जगह शलभ मणि त्रिपाठी को टिकट दिया गया, 2023 में पूर्व मंत्री आशुतोष टंडन (गोपाल जी) के निधन के बाद खाली हुई लखनऊ पूर्व की विधानसभा सीट पर भी उनके पुत्र को टिकट नहीं मिला। तब यह माना गया कि उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति समाप्त हो गई है, लेकिन अब राज्यपाल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका यह नया अवतार देखने को मिल रहा है।

क्या है रणनीति?

ऐसे में माना जा रहा है कि ब्राह्मण समाज कि आड़ में कलराज मिश्र की रणनीति साफ नजर आ रही है। वो अपनी अगली पीड़ी को स्थापित करने के लिए ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाकर एक बार फिर से बड़े वोट बैंक का नेता बन्ने की कोशिश में हैं।ऐसे में सवर्णों का दर्द बनकर उभरे यूजीसी जैसे मुद्दों पर बोलकर सवर्णों और ब्राह्मणों कि अगुवाई का मौका भी नहीं छोड़ रहे हैं चाहे इसके लिए उनकी अपनी पार्टी भाजपा ही विवाद में क्यूँ नहीं आ जाए।UGC पर बढ़ते दबाब के जरिये जहाँ वो ब्राह्मण के साथ साथ सवर्ण समाज के नेता भी बनते दिख रहे है वहीं इससे उनके पुत्र अमित मिश्र की चुनावी राजनीति कि राह खुल सकती है ।

कुल मिलाकर, कलराज मिश्र की राजनीतिक सक्रियता अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित मुहिम लग रही है। चाहे वह यूजीसी के नियमों का विरोध हो या ‘विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद’ का गठन, हर कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में उनकी यह सक्रियता उन्हें भाजपा की राजनीति में किस मुकाम पर ले जाती है और उनके पुत्र को 2027 ,में टिकट दिला पाती है या नहीं ।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे