ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-16बी स्थित अजनारा होम्स (एपीवाई रियल्टी) पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के चलते कड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने बिल्डर पर कुल 54.32 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भी लिखा गया है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सीवर विभाग के निरीक्षण के बाद की गई है। जांच के दौरान सोसाइटी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी तरह से बंद पाया गया। निवासियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों से एसटीपी संचालित नहीं हो रहा है, जिसके कारण रोजाना निकलने वाला लगभग 1.15 एमएलडी सीवेज बिना शोधित ही नालियों में गिराया जा रहा था।
बेसमेंट में गिर रहा था गंदा पानी जांच टीम ने पाया कि नालियों के चोक होने के कारण शोधित नहीं किया गया सीवेज बेसमेंट में भी जमा हो रहा था, जिससे निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यह स्थिति एनजीटी के आदेशों और सीपीसीबी व यूपीपीसीबी के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
क्या-क्या लगा अर्थदंड?
प्राधिकरण ने बिल्डर पर तीन मुख्य आरोपों के तहत जुर्माना लगाया है:
- एसटीपी न चलाने और सीवेज शोधित किए बिना छोड़ने पर: 50 लाख रुपये।
- उद्यान कार्यों के लिए भूजल दोहन पर: नियमों के खिलाफ होने के कारण यह राशि जुर्माने में शामिल है।
- कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर: स्वास्थ्य विभाग ने 4.32 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
नोटिस का जवाब नहीं देने पर हुई कार्रवाई
बता दें कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर हाल ही में 202 बिल्डर सोसाइटियों को नोटिस जारी किया गया था। इसमें एसटीपी की क्षमता और संचालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। अजनारा होम्स प्रबंधन द्वारा कोई जवाब न देने और शिकायत मिलने पर सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव के नेतृत्व में टीम ने मौके पर जांच की।
प्राधिकरण ने दी चेतावनी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह ने सभी बिल्डर सोसाइटियों को चेतावनी दी है कि वे एसटीपी को अनिवार्य रूप से चलाएं और शोधित पानी का उपयोग सिंचाई व अन्य कार्यों में करें। अजनारा होम्स प्रबंधन को जुर्माने की रकम 7 कार्यदिवस में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि दोबारा ऐसी गलती हुई तो लीज की शर्तों के तहत भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एनसीआर खबर का प्रश्न- अजनारा होम्स ने अब तक कितना अर्थदंड प्राधिकरण को दिया ?
प्राधिकरण की कार्यवाही से जहां एक और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार पर बिल्डरों पर लगाम कसने की सदाशयता दिखाई दे रही है, वहीं प्राधिकरण के अधिकारियो की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण यह प्रश्न यह भी उठ रहा है कि इसी अजनारा होम बिल्डर्स पर बीते 3 साल में लगाये गए कितने अर्थ दंड की वसूली प्राधिकरण को हुई है ? दरअसल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिल्डरों पर लगाए जाने वाले अर्थ दंड की वसूली लगभग शून्य है इनमें पर्यावरण से लेकर साफ सफाई और सीवर जैसे मामलों को लेकर की गई कार्यवाहियां शामिल है ।
अक्सर प्राधिकरण के अधिकारी इन बिल्डरों पर जांच के नाम पर कार्यवाही का दावा तो करते हैं किंतु उनकी रिकवरी कभी भी किसी तरह सामने नहीं आ पाती है। ऐसे में जो बिल्डर पहले ही प्राधिकरण के पैसे नहीं चुका रहा होता है वह इन पेनल्टी को कैसे देगा, इसकी संभावना है बिल्कुल कम होती है और इसी के साथ बिल्डर का दुस्साहस बढ़ जाता है क्योंकि उसे पता है कि प्राधिकरण द्वारा की जा रही इन कार्यवाहियों का उस पर कोई असर नहीं होता है ।
क्या ऐसे में अब वक्त वक्त आ गया है जब प्राधिकरण को इस क्षेत्र के सभी बिल्डर पर अब तक लगाये गएअर्थ दंड की राशि की रिकवरी के लिए जिला प्रशासन के जरिए करना शुरू करना चाहिए और उनके लिए उनकी आरसी जारी करनी चाहिए । तभी बिल्डरों में कोई डर का माहौल बनेगा और वह यहां की सोसाइटी में कुछ काम करने के लिए तैयार होंगे नहीं तो ऐसे नोटिस दिए जाते रहेंगे फिर होती रहेगी बिल्डर मस्त रहेंगे प्राधिकरण सख्त रहेगा और जनता त्रस्त रहेगी।


