कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रवि काना ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस मामले में अब 11 फरवरी को सुनवाई होगी। इस बीच, बांदा जेल से उसकी ‘गुपचुप’ रिहाई के मामले में जेल अधीक्षक ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है, जिसमें बी-वारंट के बावजूद उसे छोड़े जाने के पीछे की विस्तृत जानकारी दी गई है।
बता दें कि 29 जनवरी को बांदा जेल से जमानत पर रिहा हुए रवि काना ने अब अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दायर की है। इससे पहले शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई एक अधिवक्ता के निधन के कारण टल गई थी। गौरतलब है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान बी-वारंट के बावजूद आरोपी को जेल से छोड़े जाने पर बांदा के जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा था।
गैंगस्टर पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है
रवि काना और उसके गिरोह पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। जनवरी 2026 में थाना सेक्टर-63, नोएडा में दर्ज मुकदमे (जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत जबरन वसूली का आरोप है) के सिलसिले में नोएडा पुलिस ने उसे पेश करने के लिए बी-वारंट जारी किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से 29 जनवरी को बी-वारंट होने के बावजूद उसे जिला कारागार से छोड़ दिया गया, वह गंभीर चूक है। इस मामले में अदालत द्वारा जेल अधीक्षक से मांगा गया जवाब यह साबित करता है कि अब इस मामले की हर स्तर पर जांच हो रही है। रवि काना की अग्रिम जमानत याचिका पर 11 फरवरी को होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और संपत्ति की जब्ती
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रवि काना की तलाश में पुलिस की पांच टीमें यूपी के 12 जिलों में दबिश दे रही हैं। उसके पूरांचल में कहीं छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस सूत्रों की माने तो रवि काना डी-190 गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जिसमें कुल 18 लोग शामिल हैं। उसके खिलाफ हत्या, लूट, धोखाधड़ी, गैंगस्टर एक्ट और रंगदारी जैसे कुल 29 मुकदमे दर्ज हैं।
आर्थिक तौर पर रवि काना पूरी तरह से कमजोर पड़ चुका है। अब तक उसकी और उसके परिजनों की करीब 92.65 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त और कुर्क की जा चुकी है। इसके अलावा, उसके नाम पर दर्ज मैसर्स प्राइम प्रेसिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, न्यू कृष्णा स्टील, एस्कोन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, हनुमत मैटल प्राइवेट लिमिटेड, अकीरा स्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और जेएसआर रोड लाइन्स जैसी कंपनियों पर भी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
रवि काना का अग्रिम जमानत के लिए अर्जी देना यह दर्शाता है कि वह पुलिस की गिरफ्त से दूर रहने के लिए कानूनी दांवपेंच अपना रहा है। हालांकि, उसके गैंग के 18 सदस्यों पर 131 मुकदमे दर्ज होने और भारी संपत्ति जब्त होने के बाद उसके लिए कानूनी राहत पाना आसान नहीं होगा। 11 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।


