दिल्ली मेट्रो का नाम बदला: मयूर विहार पॉकेट 1 अब ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’

NCR Khabar Internet Desk
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आज दो बड़े विकासात्मक बदलाव देखने को मिले हैं, जो न केवल शहर के नक्शे को बदल रहे हैं बल्कि स्थानीय निवासियों की दिनचर्या और भावनाओं को भी सीधे प्रभावित कर रहे हैं। एक ओर जहां पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार पॉकेट 1 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर शालीमार बाग में जलभराव की दशकों पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

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दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि मयूर विहार पॉकेट 1 स्टेशन का नाम अब ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ होगा। विशेषज्ञों की राय में, यह कदम केवल एक नाम बदलाव नहीं है, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में समाहित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए यह परिवर्तन किया गया है। विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों का नामकरण उस क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक भावनाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए। जब डीएमआरसी और दिल्ली सरकार समन्वय के साथ ऐसे निर्णय लेते हैं, तो इससे जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का स्तर बढ़ता है। इससे यात्रियों को भी अपनी पहचान का एहसास होता है और मेट्रो केवल परिवहन का साधन न रहकर स्थानीय विरासत का हिस्सा बन जाती है। अधिकारियों द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और साइन बोर्ड भी अपडेट कर दिए गए हैं।

शालीमार बाग: जलभराव से स्थायी मुक्ति की ओर

दूसरी ओर, उत्तरी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को विशेषज्ञ ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं। लंबे समय से एसी और एसडी ब्लॉक के निवासी टूटी सड़कों और जलभराव की समस्या से जूझ रहे थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि एसडी (सी) ब्लॉक से कोहाट मेट्रो स्टेशन तक बनने वाली आधुनिक आरसीसी (RCC) ड्रेन इस पूरे इलाके के लिए एक वरदान साबित होगी। रेडी मिक्स कंक्रीट और आरसीसी तकनीक का उपयोग न केवल सड़कों और नालियों को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि बरसात के मौसम में पानी की निकासी को तेज और प्रभावी बनाएगा। विश्लेषण के अनुसार, जब तक जल निकासी का ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक सड़कों का सौंदर्यीकरण स्थायी समाधान नहीं दे सकता। इसलिए, सरकार का यह दृष्टिकोण कि “सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि जीवन को आसान बनाना है,” अत्यंत प्रशंसनीय है।

इसके अलावा, नेहरू पार्क, अपना पार्क और सेंट्रल पार्क में वॉकिंग ट्रैक और सौंदर्यीकरण के कार्य भी शुरू हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और हरित क्षेत्रों (ग्रीन एरिया) का समन्वय ही एक आदर्श शहर की पहचान है।

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