नोएडा प्राधिकरण से सबवेंशन योजना घोटाले में सीबीआई ने मांगे दस्तावेज, बिल्डर्स और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कसेगा शिकंजा!

NCR Khabar News Desk
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से चलाए जा रहे सबवेंशन योजना घोटाले की जांच में तेजी आ गई है। इसमें बिल्डर्स, उनके संगठनों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े नए साक्ष्य सामने आए हैं, जो धोखाधड़ी में शामिल दोषियों की पहचान करने में सीबीआई की मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में जमा दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिनमें से झूठी साख वाले बिल्डर्स के खुलासे का संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2025 में शुरू जांच में अब तक 6 से अधिकई तिमाहियों गुजर चुकी हैं, लेकिन अभी तक घोटाले का सच्चा चेहरा खुलने के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं।

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सबवेंशन योजना का मूल उद्देश्य और धोखाधड़ी का तरीका

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सबवेंशन योजना (Subvention Scheme) के तहत घरों के निर्माण के लिए शुरू किए गए नियम ऐसे थे जो बगैर ब्याज के लोन बैंकों के माध्यम से खरीदारों तक पहुंचाए जाएंगे। हालांकि, बिल्डर और बैंकों के बीच करार के तहत बैंक बिना मूल्यांकन और निरीक्षण के लोन प्रोवाइड कर दिए। इसके साथ ही बिल्डर ने झूठे दस्तावेजों के जरिए परियोजनाओं के वास्तविक स्थिति पर खूबसूरत तस्वीर पेश की और खरीदारों से जमा करवाए गए पैसे को अपने प्राइवेट उद्देश्यों में खर्च कर दिया।

नियमों की उल्लंघन के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। धीरे-धीरे बिल्डरों ने स्वयं ईएमआइ के भुगतान को रोक दिया और खरीदारों को फ्लैट नहीं दिए। इससे हजारों खरीदार बकाया राशि के बोझ तले दबे और कई अपनी आवास के सपनों के साथ निराश हो गए।

सीबीआई की कार्रवाई और छापेमारी

22 फर्मों और परियोजनाओं के खिलाफ सीबीआई ने 47 स्थानों पर छापेमारी की थी। इनमें बिल्डर, बैंक और वित्तीय संस्थानों के दस्तावेज भी शामिल थे। जांच में पाया गया कि कई बिल्डरों ने योजना के तहत कोर संगठनों से जुड़ कर अपने नुकसान को कवर करने के लिए झूठा महंगाई वाला मॉडल बनाया। सीबीआई के मुताबिक, यह केवल बिल्डर्स की योजना नहीं रही, बल्कि कई राजनीतिक हस्तियों और वित्तीय गठबंधनों के संगठनों की भी शामिल रही।

इसके बाद सीबीआई ने अगस्त 2023 में 22 एफआईआर दर्ज कर ली, जिसमें बिल्डर्स के खिलाफ चोरी, ठगी और धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं। हाल ही में नोएडा से स्पोर्ट्स सिटी नाम की परियोजना की जांच करने के लिए भी सीबीआई की टीम अक्सर आई है, जिसमें कई वित्तीय गठबंधन शामिल हैं।

इन बिल्डरों पर एफआईआर

  • एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड / एवीजे हाइट्स
  • अर्थकान यूनिवर्सल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड / कासा रायल
  • रुद्र बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड / रुद्र पैलेस हाइट
  • जियोटेक प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड / जियोटेक ब्लेसिंग
  • शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड / शुभकामना सिटी
  • बुलंड बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड / बुलंड एलीवेट्स
  • डिसेंट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड प्रोजेक्ट / श्रीराधा एक्वा गार्डन्स प्रोजेक्ट
  • रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड / केबीनाव्स अपार्टमेंट्स
  • साहा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड / अमाडेस
  • ड्रीम प्रोकान प्राइवेट लिमिटेड / विक्ट्री ऐस
  • लाजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड/ ब्लासम जेस्ट
  • शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड / शुभकामना एडवर्ट टेक होम्स
  • जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड / आर्चर्ड्स
  • सीक्वल बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड / द बेल्वेडियर
  • अजनारा इंडिया लिमिटेड / अजनारा एम्ब्रोसिया
  • वाटिका लिमिटेड / वाटिका टर्निंग प्वाइंट
  • सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड / 106 गोल्फ एवेन्यू
  • नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड / नाइनेक्स सिटी
  • जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड / जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड
  • कोव प्रोजेक्ट / कासिया प्रोजेक्ट
  • आइडिया बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड / रेड एप्पल रेजीडेंसी
  • मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड/ रेड एप्पल होम्स

खरीदारों और बैंकों की स्थिति

सबवेंशन योजना के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और देशभर के 40 से अधिक परियोजनाओं में लाखों फ्लैट खरीदार फंसे हुए हैं। खरीदारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है की नोएडा में परेशान बायर धरने दे रहे हैं। प्रत्यक्ष खरीदारों को वापस धनराशि मिलाने और परियोजनाओं का निर्माण पूरा कराने के लिए अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।

बैंकों की ओर से भी इन परियोजनाओं में लोन ले लिए गए राशि के बकाया का भुगतान कराने के लिए खरीदारों को दबाव डाला जा रहा है। बैंकों ने कहा है कि सभी सौदा बिल्डर्स और खरीदारों के बीच नियमानुसार हुए, जहां उनके लिए कोई जिम्मेदारी नहीं है। हालांकि, नियमों में कुछ खामियां पाई गई हैं, जिसके कारण बैंकों को भी लाभान्वित राशि तक पहुंचे में आ रही दिक्कतों का जिम्मा बिल्डर्स से मांगा जा रहा है।

राजनीतिक लिंक का खुलासा

जांच के दौरान सामने आया है कि कई बिल्डर्स की निजी बैंकों और पब्लिक सेक्टर बैंकों से जुड़ रही। कुछ बिल्डर्स के राजनीतिक पक्ष अस्पष्ट रहे, जिसके चलते उनके दिवालिया होने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीबीआई ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि परियोजनाओं में राजनीतिक गतिविधियों के शरारती हस्तक्षेप के भी सबूत हैं।

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