गौतम बुद्ध नगर: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पी-3 में संचालित ‘केबी हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर’ को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को सील कर दिया है। यह कार्रवाई दनकौर क्षेत्र के एक छह वर्षीय मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद की गई है। परिजनों ने सेंटर के डॉक्टरों पर एमआरआई (MRI) के दौरान एनेस्थीसिया की ओवरडोज देने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दनकौर क्षेत्र के रीलखा गांव निवासी प्रशांत के छह वर्षीय भतीजे गर्व कसाना उर्फ चीकू को पिछले कुछ समय से दौरे पड़ने की शिकायत थी। सेक्टर-36 स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टर गर्व का उपचार कर रहे थे। बीमारी की बारीकी से जांच के लिए डॉक्टर ने उसे एमआरआई करवाने की सलाह दी थी।
बृहस्पतिवार को परिजन गर्व को लेकर सेक्टर पी-3 स्थित केबी हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर पहुँचे। परिजनों का आरोप है कि एमआरआई प्रक्रिया शुरू करने से पहले सेंटर के स्टाफ ने बच्चे को एनेस्थीसिया (बेहोशी का इंजेक्शन) दिया। जांच पूरी होने के करीब एक घंटे बाद भी जब मासूम को होश नहीं आया, तो परिजनों ने चिंता जताई। आरोप है कि सेंटर के कर्मियों ने इसे सामान्य बताते हुए कुछ देर इंतज़ार करने को कहा।
हालत बिगड़ते देख परिजन बच्चे को तत्काल पास के एक अन्य अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने प्राथमिक तौर पर एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा को मौत का संभावित कारण बताया था।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच घटना के बाद परिजनों ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए धरना दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक जांच समिति का गठन किया। शुक्रवार को समिति ने सेंटर का दौरा किया और जांच के बाद पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया।
बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया, हालांकि प्राथमिक रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस ने मौत की सटीक वजह जानने के लिए बच्चे का बिसरा (Viscera) सुरक्षित रख लिया है, जिसे जांच के लिए गाजियाबाद स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा गया है।
पुलिस का बयान
बीटा-2 कोतवाली पुलिस के अनुसार, बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल पाएगा। रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम सेंटर के दस्तावेजों और वहां मौजूद उपकरणों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सेंटर के पास एनेस्थीसिया देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और आवश्यक अनुमतियां थीं या नहीं।


