आशु भटनागर। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के लिए आगामी गर्मियों को लेकर एक राहत भरी खबर है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दावा किया है कि इस बार गर्मियों में उन्हें पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए प्राधिकरण ने फरवरी माह के अंत तक गंगाजल की आपूर्ति शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।
जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा के अनुसार, प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देशों के क्रम में गंगाजल की आपूर्ति के लिए बिछाई जा रही मुख्य पाइपलाइन के टेस्टिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। टेस्टिंग के दौरान तीन स्थानों पर लीकेज की समस्या सामने आई है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
जल संरक्षण और गुणवत्ता पर फोकस प्राधिकरण की इस पहल को जल संरक्षण और पेयजल की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि शुरुआत में भूजल के साथ 40–50 प्रतिशत गंगाजल मिलाकर सप्लाई की जाएगी। प्राधिकरण का उद्देश्य भूजल स्तर को बचाना और लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। भविष्य में गंगाजल की मात्रा बढ़ाकर शत-प्रतिशत गंगाजल आपूर्ति करने की योजना है, जिससे भूजल पर निर्भरता कम होगी और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
कहां-कहां पहुंचेगा गंगाजल?
ग्रेटर नोएडा ईस्ट के अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, सिग्मा और स्वर्णनगरी समेत अधिकांश सेक्टरों में गंगाजल की आपूर्ति पहले से की जा रही है। यहां भी फिलहाल भूजल के साथ मिलाकर पानी दिया जा रहा है। वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा के अनुसार, चार मूर्ति/गौड़ चौक तक गंगाजल पहुंच चुका है। मुख्य लाइन में आई लीकेज ठीक होते ही अगले सप्ताह से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टरों में आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। बचे हुए सेक्टरों में एक सप्ताह के भीतर गंगाजल पहुंचाने की योजना है।
वर्तमान और भविष्य की आपूर्ति वर्तमान में ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट मिलाकर करीब 210 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, जिसमें 60–70 एमएलडी गंगाजल शामिल है। प्राधिकरण का मानना है कि इस पहल से न केवल भूजल संरक्षण होगा, बल्कि क्षेत्रवासियों को बेहतर गुणवत्ता का पेयजल भी मिल सकेगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों के लिए यह खबर काफी उत्साहजनक है। प्राधिकरण का यह प्रयास न केवल गर्मियों में पानी की समस्या को दूर करेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल पेश करेगा। अब देखना यह है कि प्राधिकरण अपने इस दावे को कितनी जल्दी हकीकत में बदल पाता है।


