नोएडा। इंजीनियर युवराज सिंह की दर्दनाक मौत और उसके बाद हुई जांच में लापरवाही बरतने वाले जेई (JE) की बर्खास्तगी का मामला अब नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि बर्खास्तगी के आदेश के बावजूद आरोपी जेई नवीन कुमार न सिर्फ प्राधिकरण में अपनी सेवा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें सक्रिय जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं।
बर्खास्तगी के बावजूद सक्रिय है जेई!
सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन सीईओ लोकेश एम ने युवराज सिंह मामले में लापरवाही बरतने पर जेई नवीन कुमार को बर्खास्त करने का आदेश दिया था। आदेश का हवाला देकर उन्हें कार्यमुक्त भी किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आदेश के कुछ ही दिनों बाद वह फिर से प्राधिकरण कार्यालय में अपनी उपस्थित दर्ज कराने लगे।
सेक्टर 71 में बुलडोजर टीम के साथ दिखे जेई नवीन कुमार
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब कल सेक्टर 71 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बुलडोजर के साथ गई टीम में जेई नवीन कुमार स्पष्ट रूप से देखे गए। उन्होंने टीम का नेतृत्व किया और कार्रवाई को अंजाम दिया। यह देखकर स्थानीय निवासियों ने उनका वहां का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। प्राधिकरण कर्मचारियों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बर्खास्त किया गया कर्मचारी कानूनी तौर पर कैसे काम कर रहा है?
क्या सीईओ को गुमराह किया जा रहा है?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी सीईओ कृष्णा करूणेश को गुमराह कर रहे हैं? सूत्र बताते हैं कि सीईओ के हटने से ठीक पहले जेई को बर्खास्त किया गया था, लेकिन उनके जाने के बाद प्राधिकरण के ही कुछ ताकतवर अफसरों ने जेई को शह देकर उन्हें दोबारा काम पर रख लिया। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने सीईओ के आदेश को दरकिनार करते हुए अपने ताकत का इस्तेमाल किया।
स्थानीय निवासियों में रोष, प्रशासनिक ढांचे में गंभीर खामी
सेक्टर 71 में कल हुई कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में रोष है। लोगों का कहना है कि जो अधिकारी इंजीनियर की मौत के लिए जिम्मेदार था और जिसे बर्खास्त किया गया था, वह अगर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए नौकरी कर रहा है, तो आम आदमी के लिए न्याय की उम्मीद करना बेकार है।
इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना प्राधिकरण के कामकाज में व्याप्त गंभीर खामी को उजागर करती है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (जो नाम नहीं बताना चाहते) के अनुसार, “जब एक उच्च अधिकारी (सीईओ) द्वारा गंभीर आरोपों में किसी कर्मचारी को बर्खास्त किया जाता है, तो उसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। यदि बर्खास्त किया गया कर्मचारी उनके जाते ही काम पर वापस आ जाता है और टीम का नेतृत्व कर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि प्राधिकरण के भीतर ‘सुपर बॉस’ या दबाव का एक गुट सक्रिय है।”
शहर के लोग कहते हैं, “यह मामला केवल एक कर्मचारी की बर्खास्तगी का नहीं है, बल्कि यह प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है। अगर उच्च अधिकारी के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है, तो आम नागरिक कैसे न्याय की उम्मीद कर सकता है?”
अब देखना यह है कि इस मामले में वर्तमान सीईओ और शासन स्तर पर क्या कार्रवाई करता है। क्या जेई नवीन कुमार पर दोबारा कार्रवाई होगी और क्या प्राधिकरण के उन ताकतवर अफसरों का पर्दाफाश होगा जो सीईओ को गुमराह कर रहे हैं? फिलहाल, नोएडा के निवासी इस मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


