दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की बिगड़ती स्थिति और शहर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को सीएक्यूएम की एक विशेष टीम नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल-जवाब करेगी।
इस दौरे का एक मुख्य एजेंडा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) के तहत प्राप्त हुई धनराशि का ऑडिट करना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण को शहर में प्रदूषण कम करने की व्यवस्थाओं के लिए अब तक कुल 55.7 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। हालांकि, प्राधिकरण अब तक इसमें से केवल 31.54 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया है। टीम इस बात की गहनता से जांच करेगी कि शेष धनराशि का उपयोग अब तक क्यों नहीं किया गया और जो राशि खर्च हुई है, उसका जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ा है।
पिछले निरीक्षण में खुली थी पोल सीएक्यूएम की टीम का यह दौरा पिछले अनुभवों को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले आयोग ने शहर की 100 सड़कों का निरीक्षण कराया था, जिसमें प्राधिकरण के मशीनीकृत सफाई (मैकेनाइज्ड स्वीपिंग) के दावे आधे-अधूरे पाए गए थे। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया था कि टीम के पहुंचने से ठीक पहले सड़कों पर पानी का भारी छिड़काव किया गया था ताकि धूल उड़ती न दिखे। टीम ने जलभराव की स्थिति देखकर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे और सुधार करने की चेतावनी दी थी।
होगा प्रेजेंटेशन और भौतिक निरीक्षण
शुक्रवार को होने वाली इस कार्रवाई की शुरुआत एक विस्तृत प्रेजेंटेशन से होगी। इसमें प्राधिकरण के अधिकारी प्रदूषण को रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और भविष्य की योजनाओं का ब्यौरा देंगे। इसके तुरंत बाद, सीएक्यूएम की टीम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के अधिकारियों के साथ मिलकर शहर का औचक निरीक्षण करेगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
सड़कों के किनारे उड़ने वाली धूल को रोकने के उपाय।
कचरा प्रबंधन और खुले में कूड़ा जलाने की घटनाएं।
निर्माण स्थलों पर एंटी-डस्ट नियमों का पालन।
सड़कों की मशीनीकृत सफाई की वास्तविक स्थिति।
प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के कारण प्राधिकरण पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि सीएक्यूएम के कड़े सवालों और इस निरीक्षण के बाद शहर की हवा को स्वच्छ बनाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।


