ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 30 एकड़ भूमि पर कथित रामलीला मैदान और मंदिर निर्माण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटनाक्रम ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में हड़कंप मचा दिया है, प्राधिकरण ने ऐसी किसी भी भूमि आवंटन से साफ इनकार किया है। इसको लेकर एक संस्था पर आरोप लगाये जा हैं कि वह रामलीला मैदान के नाम पर आजीवन सदस्यता शुल्क के रूप में लोगों से 11,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की राशि इकट्ठा कर रही है।
जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानीय निवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से यह जानने की कोशिश की कि क्या उन्होंने वाकई किसी संस्था को एक मूर्ति के पास व्यवसायिक भूमि पर मंदिर और रामलीला मैदान के लिए 30 एकड़ जमीन दी है। इसके साथ ही, यह आरोप भी सामने आया कि कुछ लोग रामलीला आयोजित करने के लिए एक समिति के नाम पर सदस्य बना रहे हैं और उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं।

जैसे ही यह जानकारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक पहुंची, अधिकारियों में खलबली मच गई। प्राधिकरण के अधिकारियों ने ऐसी किसी भी घटना या जमीन देने की किसी भी कार्रवाई से पूरी तरह इनकार किया है। प्राधिकरण के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसी भी संस्था को मंदिर या रामलीला मैदान के नाम पर कोई भी जमीन आवंटित नहीं की है। प्राधिकरण पहले से ही अपनी अधिकृत जमीनों पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण से परेशान है, ऐसे में वह इस तरह के किसी भी दावे का खंडन करता है। प्राधिकरण ने यह भी साफ किया कि ऐसी किसी भी संस्था को दिए गए दान का ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के साथ किसी भी तरह के लेनदेन से कोई संबंध नहीं है।
इस पूरे प्रकरण पर दादरी विधायक तेजपाल नागर ने भी एनसीआर खबर से बातचीत में रामलीला मैदान की स्वीकृति को लेकर किसी भी जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि रामलीला कमेटी या मैदान का प्रकरण लोगों का व्यक्तिगत मामला है और उनसे ही उसकी चर्चा करनी चाहिए।
वहीं, जिस संस्था पर ये आरोप लगाए जा रहे हैं, उसने अपना पक्ष रखा है। संस्था का दावा है कि बीते कई वर्षों से इरॉस संपूर्णम के पास रावण दहन होता आ रहा है, ऐसे में आसपास के लोग रामलीला भी करने को कहते है । उनका कहना है कि वे केवल इस रामलीला को भव्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्राधिकरण से सिर्फ 12 दिनों के लिए भूमि किराए पर मांगी है, स्थायी आवंटन या निर्माण के लिए नहीं। संस्था ने स्पष्ट किया कि न तो कोई मंदिर बनाया जा रहा है और न ही रामलीला मैदान के स्थायी निर्माण की बात हो रही है। सदस्यों से लिया जा रहा शुल्क भी केवल रामलीला के आयोजन के लिए है।
फिलहाल सच जो भी हो इस प्रकरण से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में जहां प्राधिकरण और समिति के दावों में विरोधाभास सामने आ रहा है, वही स्थानीय निवासियों के बीच इसे लेकर असमंजस की स्थिति बन गयी है।


