नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यमुना प्राधिकरण) क्षेत्र में जमीन के मुआवजा वितरण में एक बड़े घोटाले की संभावना जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में अनियमितता के कुछ मामले सामने आने के बाद प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आरके सिंह ने 25 मामलों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद से एडीएम भू-अध्याप्ति (LA) कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
गुनपुरा गांव के मामले से खुला राज प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब गुनपुरा गांव के एक जमीन मालिक ने मुआवजा न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। वह लंबे समय से प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर काट रहा था। जब मामले की आंतरिक जांच की गई, तो यह सामने आया कि असली किसान के बजाय मुआवजे की राशि किसी अन्य व्यक्ति को और वह भी निर्धारित राशि से अधिक भेज दी गई थी।
इसी प्रकार के अन्य प्रकरणों की शिकायतें मिलने के बाद सीईओ आरके सिंह ने संज्ञान लिया और कुल 25 मामलों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा भुगतान का प्रयास और अटकी फाइलें
जांच के दौरान एक अन्य मामले में सामने आया कि गांव के पूर्व भू-स्वामी विनोद और वासुदेव को त्रुटिवश 20 लाख रुपये का मुआवजा जारी हो गया था। दोनों ने ईमानदारी दिखाते हुए वह राशि चेक के माध्यम से वर्तमान भू-स्वामी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी थी और इसकी मौखिक सूचना एडीएम एलए कार्यालय को भी दी थी।
बावजूद इसके, आरोप है कि कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से उसी भूमि पर दोबारा मुआवजा प्राप्त करने का प्रयास किया गया। इस तकनीकी पेंच और प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्राधिकरण अपने आवंटी को भूखंड पर कब्जा देने में भी असमर्थ है।
हाल ही में एडीएम भू-अध्याप्ति कार्यालय द्वारा मुआवजा भुगतान के लिए लगभग 14 लाख रुपये के अतिरिक्त बजट की मांग की गई थी। दस्तावेजों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि इस राशि का भुगतान पूर्व में ही किया जा चुका है। जानकारों का कहना है कि पूर्व में दी गई धनराशि की रिकवरी करने के बजाय दोबारा भुगतान की प्रक्रिया शुरू करना गंभीर प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।
करोड़ों तक पहुंच सकता है घपला
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के दोहरे मुआवजे और वितरण संबंधी अन्य मामलों की व्यापक स्तर पर जांच की जाती है, तो यह घोटाला करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। इस प्रकरण में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
प्राधिकरण के सीईओ ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि कर्मचारियों की संलिप्तता और मिलीभगत साबित होती है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ गबन की गई धनराशि की वसूली भी सीधे दोषी कर्मचारियों से ही की जाएगी।



