संपादकीय : नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अधिकारियों, कर्मचारियों को लेकर योगी सरकार का संशय

NCRKhabar Mobile Desk
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उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा ग्रेटर नोएडा यमुना प्राधिकरण को लेकर क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसी संशय में है या योगी सरकार कर्मचारियों के ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर निश्चित नहीं है या फिर योगी सरकार ने ऐसी और ओएसडी स्तर पर ट्रेनिंग इस को भेजने का स्थल इन प्राधिकरण को मान लिया है ?

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यह प्रश्न अब इसलिए उठने लगे हैं क्योंकि बीते कुछ समय में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में एसीईओ की नियुक्तियां 3 वर्ष की जगह एक-एक वर्ष की होने लगी है । ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तो बीते 3 वर्षों में महिला एसीईओ आती हैं और फिर 6 महीने, कभी साल भर में उनका ट्रांसफर यहां से कहीं और कर दिया जाता है ऐसे में दो ही संभावनाएं प्रबल दिखाई दे रही हैं या तो यहां एसीईओ बनकर आने के बाद महिला आईएएस ऑफिसर खुद को इन प्राधिकरणों में एडजस्ट नहीं कर पाती और अपना ट्रांसफर ले लेती है या फिर वाकई सरकार इन महिला एसीईओ को यहां सिर्फ ट्रेनिंग के लिए भेज रही है ।

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लेकिन महिला एसीईओ और सरकार के बीच बनी अनिश्चितता के कारण नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में कार्य की गति बढ़ने की जगह रुकी हुई है।

यह बात सच है कि प्राधिकरणों को काफी समय बाद सीआईओ के तौर पर अच्छे अधिकारी मिले हैं किंतु अगर सीईओ को उनके नीचे सक्षम और स्थाई अधीनस्थ नहीं दिए जाएंगे तो क्या सीईओ बेहतर काम कर पाएंगे? क्या वह प्राधिकरण में हो रही समस्याओं के समाधान में देरी के कारण सरकार को होने वाले नुकसान को रोक पाएंगे ?

हैरत की बात यह भी है कि जहां एसीईओ 6 महीने या साल भर नहीं रोक पा रहे हैं वहीं इन्हीं प्राधिकरणों में 3 वर्ष से अधिक समय से रुके कर्मचारियों के जून में तय ट्रांसफर अगस्त तक भी नहीं हो पाए। प्राधिकरणों की एम्पलाई संगठन के सूत्रों के अनुसार पहले मंत्री जी के घर में विवाह होने के चलते इसमें देरी हुई फिर औधोगिक मंत्री जी और कई कर्मचारियों के बीच ट्रांसफर को लेकर संघर्ष की स्थिति के कारण ऐसा हो रहा है ।

जून से अब तक प्राधिकरण के कई काम सिर्फ कर्मचारी इसलिए नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें यह नहीं पता कि किस दिन उनके ट्रांसफर के आदेश आ जाएंगे। ऐसे में सरकार और औद्योगिक मंत्री जितनी जल्दी एसीईओ के ट्रांसफर पर दिख रहे हैं उतने ही त्वरित प्रक्रिया अगर कर्मचारियों के मामले में भी कर दें तो संभव है यहां के निवासियों को के कार्यों को पूर्ण करने में समस्या दूर हो जाएगी ।

ऐसे में महत्वपूर्ण है कि योगी सरकार को अगर औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के कार्य प्रणाली को दुरुस्त करने में कहीं समस्याएं आ रही हैं तो सबसे पहले उन्हें अपने औद्योगिक विकास मंत्रालय में बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि इस तरीके की अस्थिरता से बचा जा सके नहीं तो 2 साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार के वापस लौटने की आशा छोड़ देनी चाहिए ।

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