सत्यम शिवम सुंदरम: किसान नेता से राजनेता बने सुधीर चौहान की कम नहीं होंगी मुश्किलें, समाजवादी पार्टी को होगा फायदा या फिर किसी बड़े बिखराव की और बढ़ेगी पार्टी

आशु भटनागर
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आशु भटनागर । बुधवार को नोएडा से लखनऊ के लिए समाजवादी पार्टी में शामिल होने के लिए निकले नोएडा के कथित किसान नेता सुधीर चौहान के ब्रहस्पतिवार को पार्टी की सदस्यता लेने के बाद दो प्रश्न बड़े ही प्रासंगिक हो रहे है । पहले सुधीर चौहान के आने से समाजवादी पार्टी में क्या परिवर्तन आएगा और दूसरा किसान नेतागिरी करने वाले सुधीर चौहान समाजवादी पार्टी में क्या वाकई कुछ कर पाएंगे या किसान नेतागिरी को दांव पर लगाकर राजनेता बनना सुधीर चौहान की एक बड़ी भूल साबित होगी ।

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सबसे पहले सुधीर चौहान के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से समाजवादी पार्टी को होने वाले फायदों पर बात करते हैं । दरअसल समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले सुधीर चौहान को लेकर पार्टी के अंदर सहजता की स्थिति नहीं है जानकारी के अनुसार सुधीर चौहान को समाजवादी पार्टी में शामिल करने की दौड़ में दिल्ली के बड़े मुस्लिम व्यापारी की भूमिका प्रमुख रूप से बताई जा रही है। इसका एक कारण आप ऐसे समझ सकते हैं कि जब जिले में इतने बड़े कथित तौर पर इतने बड़े किसान नेता की जॉइनिंग हो रही थी तो जिले से पार्टी के प्रवक्ता के पद को सुशोभित करने वाले राजकुमार भाटी उसमें कहीं नहीं दिखाई दे रहे थे। बल्कि उसके काउंटर में राजकुमार भाटी के एक समर्थक ने ही सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि जल्द ही राजकुमार भाटी बसपा के कई बड़े जमीनी नेता सपा में शामिल करवाएंगे । हालांकि दावा यह भी किया गया कि सुधीर चौहान के पार्टी में शामिल होने की जानकारी होते ही अपनी लाज बचाने हेतु बेमन से ही सही पर पूर्व प्रत्याशी सुनील चौधरी, नोएडा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता और जिला अध्यक्ष सुधीर भाटी बिना सुचना के ही लखनऊ कार्यालय पहुंच गए थे । पार्टी के स्थानीय नेताओं से चर्चा में एक बात और भी स्पष्ट हुई कि सुधीर चौहान के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए समाजवादी पार्टी के नेता फिलहाल तेल देखो तेल की धार देखो की राह पर चल रहे हैं, खास तौर पर नोएडा में स्थिति बेहद बदल गई है। नोएडा से चुनाव लड़ने का सपना देख रहे तमाम नेता इस परिवर्तन को फिलहाल समझ नहीं पा रहे हैं।

गौतम बुद्ध नगर में राजकुमार भाटी की स्थिति वर्तमान में रामपुर में समाजवादी नेता आज़म खान की तरह है, कहा जाता है कि जिले में उनको नाराज करके कोई टिकट नहीं ले सकता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से सपा में आये डा महेंद्र नागर के टिकट को काटकर अखिलेश यादव ने जिले एक अन्य गुर्जर युवा नेता को टिकट दे तो दिया था पर अगले ही दिन राजकुमार भाटी अपना बस्ता लेकर जब लखनऊ पहुंचे तो अखिलेश यादव को भी टिकट वापस बदलना पड़ा था। वो बात अलग है बाद में जिन डा महेंद्र नागर के लिए राजकुमार ने अध्यक्ष तक की नाराजगी मोल ली उन्ही ने राजकुमार भाटी पर पैसे के लेनदेन के आरोप तक लगा दिए थे।

नोएडा के इन समाजवादी पार्टी के नेताओं का दावा है कि सुधीर ने अपनी किसान नेतागिरी भले ही नोएडा में करी हो किंतु वह विधानसभा की तैयारी गढ़मुक्तेश्वर से करेंगे इसलिए सुधीर के समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने से फिलहाल नोएडा यूनिट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा । वहीं एक पक्ष का ये भी मानना है कि सुधीर के गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा के दावे से उनकी रही सही किसान नेतागिरी के भी लदने के दिन आ गए हैं। वहीं शहर के कुछ लोगों का कहना है कि सुधीर पहले ही सुखबीर खलीफा से अलग होकर नेपथ्य में जा चुके हैं । जिले में भूमाफियाओ के समर्थन में प्राधिकरण के साथ लड़ाई करने से पहले किसान नेताओं की गिरती छवि भी सुधीर के समाजवादी पार्टी में जाने से पार्टी को कोई फायदा नहीं पहचाने जा रही है। ऐसे में शोर कितना भी हो सुधीर चौहान के आने से पार्टी को मजबूती की जगह पार्टी में बिखराव की आशंका बढ़ रही है। नोएडा में तो पार्टी से बीते कुछ वर्षो में जुडा शहरी वोटर इस बदलाव से बिलकुल प्रसन्न नहीं है। असल में नोएडा में ग्रामीण और जातीय में बंटे कथित किसान वोटर की संख्या 1.5 लाख से अधिक नहीं है, ऐसे में शहरी प्रत्याशी से दुरी समाजवादी पार्टी को हर बार नुक्सान पहुंचाती है और अगर इस बार भी सुधीर चौहान जैसे ग्रामीण प्रष्टभूमि से आने वाले नेता को टिकट मिला तो परिणाम में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।

गढ़ विधानसभा सीट का सर्जन वर्ष 1956 में हुआ। वर्ष 1962 से लेकर वर्ष 2017 तक गढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस, जनता नेशनल पार्टी, सपा और भाजपा के विधायक रहे हैं। 1991 में राम जन्म भूमि की लहर के बाद कांग्रेस के डॉ. अख्तर को हराकर भाजपा के कृष्णवीर सिंह सिरोही विधायक बने, जोकि सरकार गिरने के बाद 1993 में दोबारा हुए चुनाव में भी भाजपा से जीते। 1996 में भाजपा के रामनरेश रावत ने जीत दर्ज की। सपा के मदन चौहान लगातार तीन बार 2002 से 2017 तक विधायक रह चुके हैं। 2017 में भाजपा के डॉ. कमल सिंह मलिक ने बसपा के प्रशांत चौधरी को हराया। 2022 में भाजपा के हरेंद्र सिंह तेवतिया (चौधरी) जीते । विधान सभा पर जातीय समीकरण देखे तो यहाँ मुस्लिम  एक लाख सात हजार, दलित 57 हजार, पिछड़ा वर्ग 43 हजार,जाट 30 हजार, ब्राह्मण 26 हजार, गुर्जर 23 हजार, ठाकुर 23 हजार, अन्य 23 हजार हैं।

नोएडा विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह सीट दादरी विधानसभा में थी। 2012 में परिसीमन के बाद पहली बार भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा विधायक बने थे। 2014 में डॉ. महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सीट खाली हो गई थी। उपचुनाव में भाजपा की ही विमला बाथम विधायक बनीं। 2017 के चुनाव में पंकज सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमाया और 2027 में भी वाहें चुनाव लड़ने की बात करते हैं । 2022 में पार्टियों से पूछताछ पर आधारित जातिगत आंकड़े देखे तो कुल 6,90,231 में मुस्लिम 70 हजार, दलित 90 हजार, ब्राह्मण 1 लाख, वैश्य 1 लाख, पंजाबी 70 हजार, कायस्थ 70 हजार, यादव 40 हजार, गुर्जर 35 हजार, ठाकुर 35 हजार और अन्य लगभग 1 लाख है

वहीं चर्चा के दूसरे हिस्से यानी समाजवादी पार्टी में जुड़ने से सुधीर चौहान को क्या लाभ होने जा रहा है इस पर भी लोगों की राय अलग है। सुधीर चौहान के समर्थको का दावा है कि भले ही सुधीर गढ़मुक्तेश्वर से टिकट की तैयारी कर रहे हैं किंतु अगर वहां से नहीं मिला तो नोएडा से प्लान बी रेडी रहेगा। किंतु समस्या ये है नोएडा में कथित किसान नेतागिरी करने वाले सुधीर चौहान जिस गढ़ विधानसभा से टिकट की दौड़ में है वही से समाजवादी पार्टी की नैना गुर्जर भी टिकट की रेस में है ।नोएडा हो या गढ़ दोनों ही जगह गुर्जर समुदाय किसी ठाकुर के लिए जगह खाली करने को राजी नहीं है। रोचक तथ्य ये भी है कि दोनों ही जगह गुर्जर और ठाकुर वोटर अपने बलबूते सीट जिताने की तो छोडो अपनी अपनी जाती के प्रत्याशी की जमानत बचाने की स्थिति में भी नहीं है। लोगो का कहना है कि वर्तमान विधायक पंकज सिंह भी अगर भाजपा से हटकर निर्दलीय लड़ लें तो उनकी भी ज़मानत ज़ब्त हो जायेगी।

नोएडा में भी बीते तीन बार से गुर्जर समुदाय से आने वाले सुनील चौधरी टिकट लेते रहे हैं भले ही उनको इस बार टिकट के लिए मना कर दिया गया है किंतु गुर्जर समुदाय नोएडा से टिकट छोड़ने को तैयार नहीं है। सुधीर चौहान के किसान नेता होने की छवि भी नोएडा से उनके लिए समस्या बन रही है। नोएडा के एक नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि लोगों ने एनसीआर खबर द्वारा जॉइनिंग कार्यक्रम को लाइव किए जाने के दौरान सुधीर का भाषण सुना होता तो उन्हें पता लग जाएगा कि सुधीर चौहान की सोच आज भी ग्राम और किसान से ऊपर नहीं है ऐसे में नोएडा जैसी शहरी सीट पर सुधीर जैसे विवादित किसान नेता को उतार कर समाजवादी पार्टी अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार लेगी । ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि अगले 1 साल चुनाव में टिकट मिलने की घोषणा होने तक सुधीर चौहान अपनी राजनीति कहां करेंगे क्या वह गढ़ में गली-गली चौराहों पर राजनेता का चोला ओढ़ के लोगों से मिलते नजर आएंगे या फिर नोएडा में बरसों से किसानों के नाम पर आंदोलन का पाखंड करने वाले खेल को जारी रखेंगे ।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे