आशु भटनागर। दिल्ली के मालवीय नगर में हाल ही में अवैध रूप से संचालित एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की दुखद मृत्यु ने पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अवैध होटल, रेस्टोरेंट और पेइंग गेस्ट हाउस (पीजी) के बेकाबू होते जाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना दिल्ली की तरह ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी प्राधिकरणों और शासन की गहरी लापरवाही का एक जीता-जागता नमूना बन गई है, जहां अधिकारी आंखें मूंदकर सो रहे हैं।
एनसीआर खबर की पड़ताल में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे अवैध होटल, बैंक्विट हॉल और पीजी की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, नोएडा के नवादा, मामूरा, हाजीपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में 5000 से भी ज़्यादा पेइंग गेस्ट हाउस और होटल बन चुके हैं। वहीं, ग्रेटर नोएडा का अल्फा सेक्टर तो पूरी तरह से पेइंग गेस्ट हाउसों के भरोसे ही चल रहा है। ग्रेटर नोएडा में भी अवैध बैंक्वेट्स से लेकर होटलों की भरमार है, लेकिन न तो नोएडा अथॉरिटी और न ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी इन्हें लेकर किसी प्रकार के नियम-कायदे बनाने में रुचि दिखा रही है।
अधिकारी एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
नोएडा से लेकर ग्रेटर नोएडा तक अवैध होटल, बैंक्वेट्स और पेइंग गेस्ट हाउस के इस धंधे पर जब प्राधिकरण के अधिकारियों से बात की गई, तो वे सारी जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग पर डालते दिखे। प्राधिकरण के अधिकारियों का दावा है कि अग्निशमन विभाग हर तीन साल में ऐसी सभी बिल्डिंगों को फायर सेफ्टी की अनुमति देता है और इन होटलों, बैंक्वेट्स और अवैध पीजी पर कार्रवाई करना उसी का काम है। हालांकि, कोई भी प्राधिकरण अधिकारी अपने क्षेत्र में चल रहे पेइंग गेस्ट हाउस, अवैध बैंक्वेट्स और रेस्टोरेंट की लाइसेंसिंग पर बोलने को तैयार नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि जहां सिंगल फ्लोर के मकान पर दूसरी मंजिल बनाने पर प्राधिकरण धारा 10 का नोटिस भेज देता है, वहीं इन बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध पेइंग गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट्स पर उनके हाथ रुक जाते हैं।प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इन्हें चला रहे माफिया और राजनेताओं के सामने बेबस नजर आते हैं।
पर्यटन विभाग की ‘होमस्टे’ आड़
वहीं, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग पहले ही गेस्ट हाउस का पंजीकरण बंद कर चुका है, लेकिन ‘होमस्टे’ की आड़ में इन अवैध प्रतिष्ठानों को आराम से चलाया जा रहा है, जिससे सरकारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

प्राधिकरण की कार्यशैली और सोच में खामी
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अवैध होटल, बैंक्वेट्स से लेकर पेइंग गेस्ट हाउस तक पर कोई कार्रवाई न होने के पीछे प्राधिकरण की कार्यशैली के साथ-साथ उनकी सोच भी एक बड़ी समस्या है। दरअसल, प्राधिकरण नगर निगम की भांति किसी भी अवैध निर्माण पर लगातार कोई रिव्यू नहीं करते। ऐसे में शहर में एक बार प्लॉट ले लेने के बाद अगर प्लॉट मालिक उसे बेच नहीं रहा है, तो उस पर हो रहे अवैध निर्माणों पर प्राधिकरण के अधिकारी सोते रहते हैं।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण नोएडा के सेक्टर-11 में बना मेट्रो हॉस्पिटल है, जिसको लेकर स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायतें की गई हैं। बेसमेंट में चल रही ओपीडी से लेकर अस्पताल के नक्शे तक पर लोगों ने प्रश्न उठाए हैं। लोगों ने पूछा कि नर्सिंग होम के नाम पर बने अस्पताल ने अपने आसपास की रेजिडेंशियल बिल्डिंग को कैसे व्यावसायिक प्रयोग में ले लिया है? किस तरीके से अस्पताल के सामने बने रेजिडेंशियल प्लॉट्स पर बिना किसी निर्माण के अवैध पार्किंग संचालित की जा रही हैं? इन सब पर प्राधिकरण के अधिकारी दबाव बढ़ने पर मात्र एक नोटिस भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। जब सेक्टर में ऐसा हाल होता है, तो नोएडा के गांवों में अवैध तरीके से तैयार हो गईं बहुमंजिला इमारतों में चल रहे होटल, रेस्टोरेंट और पीजी पर प्राधिकरण क्या ही कार्रवाई करेगा, यह समझा जा सकता है।
ऐसे में, पूरे जिले में अवैध रूप से चल रही इस समानांतर व्यवस्था पर अधिकारियों से लेकर नेताओं तक की लापरवाही कब मालवीय नगर की तरह किसी बड़े कांड के रूप में सामने आ जाएगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। और तब तक, किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार नोएडा और ग्रेटर नोएडा निवासियों की नियति हो सकता है।


