राजनीति के गलियारों में पहली कथा जिले के किसान आंदोलन में कांग्रेस के नेताओं की सरेआम बेज्जती का है । दरअसल बरसात आते ही किसानों नेताओं ने अपने चार परसेंट के बचे हुए प्लॉट के ऐसे मुद्दे को लेकर एक बड़े आंदोलन की घोषणा की जिसको पूरा करना प्राधिकरण और प्रशासन दोनों के लिए असंभव है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में चूँकि 8 महीने का समय बचा है ऐसे में गौतम बुद्ध नगर के कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इसको अपनी राजनीति के लिए शुभ अवसर मान लिया और कांग्रेस ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके किसानों के समर्थन को समर्थन देने की घोषणा की। मगर यहां मामला पलट गया किसानों के बीच बैठे हुए कांग्रेस और सपा नेताओं को तब फजीहत का सामना पड़ गया करना पड़ गया जब किसानों ने स्पष्ट रूप से यह कह दिया कि कल को विपक्ष में बैठे हुए नेताओं की अगर सरकार बन गई तो यह भी भाजपा के नेताओं की तरह यहां नज़र नहीं आयेंगे । इतना सुनते ही कांग्रेस के दीपक भाटी चोटीवाला और दुष्यंत नागर किसानो से सीधा कांग्रेसी बन गए बस शुक्र ये रहा कि मामला वाद विवाद पर ही सिमट गया, भीड़ में बैठे एक किसान ने चुटकी ली अरे इनसे मत भिड़ो अगर ये भी नाराज हुए तो तो कहा जाओगे। हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता सुधीर भाटी समय की नजाकत को समझते हुए चुपचाप रहे। राजनीतिक दलों की सरेआम बेज्जती के बाद राजनेताओं के साथ-साथ उनके समर्थक भी किसानों के इस कार्यक्रम से खिसक लिए। तो जहां सुबह 5000 की भीड़ दिखाई दे रही थी वहां शाम को 200 किसान रह गए, ऐसे में मरते क्या ना करते किसानों ने अगले हफ्ते तक का समय ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ से बातचीत के लिए कहकर अपनी जान छुड़ाई और कहा कि अगर तब बैठक नहीं हुई तो फिर 5 अगस्त को डेरा जमेगा। बाकी कांग्रेस और सपा के नेताओं ने बेज्जती के बाद दबे स्वर में जिले में किसान संगठनो के बढ़ते दबाब पर नाराजगी भी जताई और कहा कि अब इस जिले में कुकुरमुत्ता की तरह उग आये किसान संगठनों का अंत जरूरी है यह लोग ब्लैकमेलर हो चुके हैं ।
सत्ता के गलियारे की दूसरी कथा भी गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में उथल-पुथल की है जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले में आए बिना जिले के राजनीति को पूरा पलट दिया है जानकारी के अनुसार बुलंदशहर में मुख्यमंत्री ने भाषण के दौरान यह कह दिया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लोकसभा सांसद डॉक्टर महेश शर्मा लेकर आए। अब राजनीति में संदेशों में ही संकेत छुपे होते हैं जिसके बाद डॉ महेश शर्मा के समर्थक मुख्यमंत्री के भाषण को पूरे जिले में फैलाते फिर रहे है और बता रहेहै कि अब तय हो गया है जिले की राजनीती तो कैलाश पर्वत से ही चलेगी। पहले से से ही राजनैतिक गर्मी से त्रस्त भाजपा में इससे सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है, क्षेत्र में चर्चा है कि क्या मुख्यमंत्री ने अपने प्रिय कहे जाने वाले धीरेंद्र सिंह के ऊपर से हाथ हटा दिया है? पूछने वाले पूछ रहे हैं कि क्या इस संदेश का मतलब धीरेंद्र सिंह के टिकट कटने तक हो सकता है और कई लोगों का कहना है कि सेमी कंडक्टर प्लांट के शिलान्यास में धीरेन्द्र सिंह जिंदाबाद के नारों से मुख्यमंत्री पहले ही नाराज थे, बाकी नुक्सान धीरेंद्र सिंह ने जल्दबाजी में खुद ही किया है। चर्चा है धीरेंद्र सिंह नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर जिस तरीके से पूरे क्षेत्र के नेताओं को दरकिनार कर रहे थे उससे पार्टी प्रदेश स्तर पर नहीं राष्ट्रीय स्तर पर नाराज हो गई है ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का संदेश और संकेत अब साफ हो गया है पर प्रश्न यह है कि मुख्य्म्नात्री के सन्देश के बाद धीरेंद्र सिंह के राजनीति का अगला कदम भाजपा में ही रहेगा या फिर पीडीए और किसानों के अगले समर्थक धीरेंद्र सिंह ही होंगे ।
राजनीति के गलियारों में तीसरी कथा गाजियाबाद से है इन दिनों गाजियाबाद के सोशल सर्कल में भाजपा नेता और गाजियाबाद की मेयर सुनीता दयाल की बड़ी चर्चा हो रही है । पेज 3 की चर्चाओं में कहा जा रहा है कि शहर में सबसे एक्टिव कोई नेता है तो वह सुनीता दयाल है। वह अक्सर अतिक्रमण हटाओ अभियान, हाउस टैक्स विवाद, और स्वच्छता अभियानों जैसे जनहित के मुद्दों पर सीधे सड़कों पर उतर कर काम करने और सख्त अधिकारियों को फटकार लगाने के लिए चर्चा में रहती हैं। बीते दिनों मजारो से लेकर कई मामलो में उनका दबंग रवैया काफी चर्चित रहा है। अवैध कब्ज़ों को लेकर उनकी सख्ती और कांवड़ यात्रा के दौरान बेहतर व्यवस्थाओं के लिए उन्हें अक्सर स्थानीय स्तर पर सक्रिय देखा जाता है। उनकी कार्यशैली आम जनता से सीधी जुड़ी हुई है। ऐसे में एक महिला नेत्री के चर्चाओं से शहर के विपक्ष ही नहीं इस भाजपा के नेताओं के भी कान खड़े हो गए हैं। भाजपा में अब चर्चाएं हो रही हैं कि अगर सुनीता दयाल की चर्चाएं ऐसे ही आगे बढ़ी और इसका असर लखनऊ तक पहुंचा तो कहीं ऐसा ना हो कि सुनीता दयाल गाजियाबाद से विधायक की दावेदार हो जाए। इन चुनावों में भाजपा 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट के खेल में उनको मौका दे भी सकती हैं। अब समस्या यह है कि सुनीता दयाल जैसी एक्टिव और चर्चित नेत्री अगर विधायक की दावेदारी करेंगी तो किस की सीट जाएगी। बस इसी से इन दिनों गाजियाबाद में समुद्र मंथन से भी बड़ा मंथन शुरू हो गया आने वाले दिनों में अगर आप सुनीता दयाल के को लेकर कुछ नकारात्मक खबरों या चर्चाएं देखें तो समझ लीजिएगा कि इसमें विपक्ष से ज्यादा भाजपा ने नेताओं का ही होगा



