ग्रेटर नोएडा: नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त मामले में एक्शन तेज, नवजीवन अस्पताल का लाइसेंस निरस्त; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

NCR Khabar News Desk
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ग्रेटर नोएडा के बिसरख कोतवाली क्षेत्र स्थित नवजीवन अस्पताल में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण की गहराई से जांच करने और अस्पताल में बरती जा रही अनियमितताओं का पर्दाफाश करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है।

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रिकॉर्ड रूम से खुलेगा राज अस्पताल की मालकिन यशिका गर्ग के जेल जाने के बाद से ही अस्पताल का रिकॉर्ड रूम बंद था और स्टाफ फरार हो गया था, जिससे नवजात की असली मां की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। अब सीएमओ द्वारा गठित कमेटी की मौजूदगी में अस्पताल का रिकॉर्ड रूम खोला जाएगा। कमेटी के सदस्य डिलीवरी के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं के पते और अन्य दस्तावेजों का मिलान करेंगे। इससे यह स्पष्ट हो पाएगा कि अस्पताल की मालकिन द्वारा दावा की गई ‘अंजली’ नामक महिला और बच्ची के सौदे को लेकर किए गए दावों की क्या हकीकत है।

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लाइसेंस निरस्त, अस्पताल सील करने की तैयारी प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नवजीवन अस्पताल का लाइसेंस पूर्णतः निरस्त कर दिया है। विभाग अब अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। वहीं, पुलिस ने इस मामले में अब तक अस्पताल की मालकिन यशिका गर्ग, टेक्नीशियन रंजीत सिंह और सफाई कर्मी गजेंद्र सिंह को जेल भेज दिया है। हालांकि, मुख्य आरोपी नर्स पुष्पा और उसका पति अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी तलाश में टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

हिरासत में लिए गए डॉक्टर से अहम सुराग जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है—पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद फरार चल रहे अस्पताल के एक डॉक्टर को हिरासत में लिया गया है। पुलिस हिरासत में लिए गए इस डॉक्टर से अस्पताल की कार्यप्रणाली और अवैध गतिविधियों को लेकर अहम जानकारियां प्राप्त हुई हैं।

अदालत में पेश होंगे अहम सबूत विशेषज्ञों का मानना है कि सीएमओ की टीम द्वारा रिकवरी किए गए रजिस्टर और डॉक्टर से मिली जानकारियों का मिलान इस केस में मील का पत्थर साबित होगा। मंगलवार को संयुक्त टीम द्वारा अस्पताल के रिकॉर्ड की गहन जांच की संभावना है। यह साक्ष्य अदालत में उन सभी लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत बनेंगे जो इस घिनौने कृत्य में शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि शनिवार को बिसरख पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) की संयुक्त कार्रवाई में नवजात की खरीद-फरोख्त का यह मामला प्रकाश में आया था। फिलहाल, पूरे इलाके में इस घटना को लेकर हड़कंप मचा हुआ है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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