संपादकीय: सिलेंडर को लेकर देश में युद्ध का दौर! सरकार की असफलता, लोगों की जमाखोरी, कालाबाजारियों की मौज!

NCRKhabar Mobile Desk
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गौतम बुध नगर ही नहीं पूरे देश में सिलेंडर को लेकर युद्ध जैसे हालात हैं। युद्ध के दौरान सिलेंडर और गैस की स्थिति को लेकर सोई सरकार अचानक जाग गई है। सरकार का दावा है की सिलेंडर की कमी नहीं है, गैस की कमी नहीं है किंतु हमेशा की तरह मोदी सरकार के जागरण में देरी हो गई।

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जब तक सरकार जागी, तब तक आम जन के बीच सिलेंडर के को लेकर पैनिक बटन दब चुका था। कालाबाजारियों ने मौके का फायदा उठा लिया था।

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तो फिर सबके लिए दोषी कौन है ?

निश्चित तौर पर सबके लिए दोषी सर्वप्रथम हमारी केंद्र और राज्य सरकारे हैं, और वह प्रशासनिक अधिकारी हैं जिनके रहते ऐसी स्थिति बनी है। किंतु उससे भी ज्यादा दोषी अगर कोई है तो वह हमारे देश के वह लोग हैं जिन्हें किसी भी आपदा के समय जमाखोरी की आदत है और वह लोग हैं जिन्हें किसी भी आपदा के समय कालाबाजारी की आदत है ।

जमाखोरी हमारे देश में कोई नई बात नहीं है मुझे नोटबंदी के समय कथित तौर पर गरीब लोगों की वह लंबी लाइन याद आती है जिसमें₹2000 एटीएम से निकलने के लिए लोग इसलिए खड़े होते थे क्योंकि उन ₹2000 में से ₹500 खड़े होने वाले को मिलते थे। मुझे कोविड के दौरान आलू और नमक जैसी चीजों की कमी के दर से लोगों द्वारा 50- 50 किलो खरीद लेने का वह दौर भी आता है, उसी दौर में मुझे नोएडा में एक भाजपा नेता के पिता द्वारा नकली नमक बेचये हुए पकड़े जाना भी याद आता है।

मुझे खाने से लेकर जीवन रक्षक दवाओं के भी दो-दो महीने तक के स्टॉक जमा करने के आम आदमी के इस आदत पर हमेशा एतराज रहा है। दरअसल हम लोग स्वभाव से जमाखोर है । हमारे बचपन से हमें कौवा और गिलहरी की कथा भी पढ़ाई जाती है,  जिसमें गिलहरी पूरे वर्ष इसलिए खाना एकत्र करती है ताकि बरसात में वह बैठकर खा सके और कोई भी व्यक्ति कौवे की भांति बरसात में भूखा नहीं रहना चाहता। सिस्टम में बैठा हर सक्षम व्यक्ति सबसे पहले जमाखोरी शुरू करता है फिर उसके नीचे के लोग भी वही करते हैं फिर ये बिल्कुल नीचे तक पहुंचता है।

इन सबके बीच कालाबाजारों का एक बड़ा ग्रुप हमेशा एक्टिव रहता है वह हमेशा ऐसे मौके पर रास्ता रहता है जिससे उसके काले धन में और बढ़ोतरी हो जाए। जिसके बाद वो कलफ लगा कुर्ता पहन बढ़िया फॉर्च्यूनर में बैठकर नेतागिरी के लिए निकल सके, सिलेंडर की कमी को लेकर कहीं सड़क जाम कर सके और सरकार को कोस सके।

सच तो ये है कि विश्व गुरु, कट्टर ईमानदार और सतचरित्र होने की संस्कृति का दावा करने वाले हम भारतीय बीते 1000 वर्ष की गुलामी में इतने करप्ट हो चुके हैं कि हम मौका मिलते ही देश, धर्म कर्तव्य सब भूल जाते है।

सबके बीच कुछ अन्य कारण भी है जिसको आप इस घटना से समझ सकते हैं कल ग्रेटर नोएडा में एक शादी के फंक्शन के लिए आयोजनकर्ता ने हलवाई बुक किया । हलवाई ने खाना बनाने के लिए 35 कमर्शियल सिलेंडर मांगे थे। किंतु सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर फिलहाल रोक दिए है। हलवाई से कहा गया कि लकड़ी के चूल्हों पर खाना बना लो हलवाई ने दूसरा हलवाई ढूंढ लेने की सलाह दे डाली। निमंत्रण जा चुके थे, टेंट लग चुका था, मरता क्या न करता । इसके बाद उस व्यक्ति ने 35 सिलेंडरों के लिए अलग-अलग लोगों से साधारण सिलेंडर लेकर शाम के सहभोज का इंतजाम किया । पूरे जिले में कल कितनी शादियां थी, आज कितनी होगी और आने वाले 30 दिनों में कितनी होगी। जिलाधिकारी अगर सिर्फ इसकी गिनती कर ले तो जिले में मचे सिलेंडर को लेकर घमासान पर सब कुछ शांत हो जाए।

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