राजनीति के गलियारों से : अवैध बैंक्वेट में प्रदेश अध्यक्ष की प्रेस कांफ्रेंस करवा कर फंस गए भाजपा नोएडा महानगर अध्यक्ष, भाजपा पर आरोप पर सपा की चुप्पी से उठ रहे गंभीर सवाल! क्यूँ लग रहा प्राधिकरण के एक अधीनस्थ अधिकारी पर मीडिया में नकारात्मक प्रचार करवाने का आरोप

NCRKhabar Mobile Desk
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राजनीति के गलियारों में पहली चर्चा नोएडा की राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक नई चर्चा गर्म है, जो भाजपा के नोएडा महानगर अध्यक्ष और शहर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध बैंक्विट हॉल संचालकों के कथित गठजोड़ पर सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, बीते दिनों भाजपा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इस आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और नोएडा विधायक पंकज सिंह समेत पार्टी के कई छोटे-बड़े नेता मौजूद थे, हालांकि, यही आयोजन अब भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है।जिस बैंक्विट हॉल में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी, नोएडा प्राधिकरण उसे बीते कई वर्षों से अवैध ठहराते हुए ध्वस्त करने का नोटिस दे चुका है। प्राधिकरण के अनुसार, बसई क्षेत्र में बने इस बैंक्विट हॉल को गिराने के आदेश प्राप्त हो चुके हैं और केवल पुलिस बल मिलने का इंतजार है। इन सबके बावजूद, भाजपा महानगर अध्यक्ष ने इसी विवादित स्थान को प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए चुना। चर्चा है कि बैंक्विट हॉल के मालिक ने अपनी संपत्ति को ढहाए जाने से बचाने के लिए भाजपा नेताओं से गुहार लगाई थी। इसके बाद, आनंन-फानन में प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को जानबूझकर यहीं आयोजित करवाया गया। संदेश साफ था कि जब प्रदेश अध्यक्ष जैसे कद्दावर नेता खुद यहां आकर बैठेंगे, तो नोएडा प्राधिकरण में किसकी हिम्मत होगी कि वह इस बैंक्विट हॉल की तरफ आंख उठाकर भी देखे।किंतु अब यही दांव उलटा पड़ गया है। पार्टी के अंदर और बाहर, हर तरफ सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कितने पैसों के लालच में भाजपा के नेताओं ने पूरी पार्टी की साख का सौदा कर दिया? इस पूरे प्रकरण पर नेताजी के पास कोई सीधा जवाब नहीं है। कभी वे नोएडा अथॉरिटी को दोषी ठहराते हैं, तो कभी दलील देते हैं कि नोएडा में सभी बैंक्विट हॉल अवैध हैं, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कहां करें? वहीं नोएडा विधायक पंकज सिंह “गलत होने नहीं देंगे” के दावे 10 वर्षों से ही कर रहे हैं और ये अध्यक्ष भी पंकज सिंह की कृपा से बने हैं I ऐसे में अगर पंकज सिंह की नाक के नीचे यह सब हो रहा है तो पंकज सिंह के दावों पर और भाजपा नेताओं के इरादों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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नोएडा के राजनीतिक गलियारों में दूसरी चर्चा भी ‘बैंक्विट हॉल प्रकरण’ पर ही है। जहां एक ओर इस मामले ने भाजपा के कई नेताओं को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी (सपा) की इस मुद्दे पर असामान्य चुप्पी राजनीतिक पर्यवेक्षकों और आम जनता दोनों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। शहर में हो रही फुसफुसाहट के अनुसार, जिस ‘बैंक्विट हॉल’ को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, इस पूरे प्रकरण पर विपक्ष, विशेषकर सपा को हमलावर होना चाहिए था तब बैंक्विट हॉल मालिकों के ‘यादव कनेक्शन’ होने के कारण पार्टी के नेता शुतुरमुर्ग की भांति सर नीचे करके सोने में लग गए हैं। सूत्रों की मानें तो यह चुप्पी बेवजह नहीं है। चर्चा है कि इस क्षेत्र में अधिकांश अवैध बैंक्विट हॉलों का निर्माण सपा और बसपा शासनकाल के दौरान ही हुआ है, और उस समय के नेताओं पर इन प्रतिष्ठानों के मालिकों से ‘मोटा पैसा’ लेने के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह बताई जा रही है कि भाजपा के कार्यकाल में सामने आए इस विवाद पर भी सपा नेता खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। पार्टी के भीतर से भी दबी जुबान में कुछ नेता स्वीकार करते हैं कि यह स्थिति केवल बैंक्विट हॉल प्रकरण तक सीमित नहीं है। नोएडा में सपा से टिकट मांगने वालों की संभावित सूची पर नजर डालें तो उसमें ‘भूमाफिया, शराब माफिया और खनन माफिया’ जैसे तत्वों की भरमार की चर्चाएं गर्म हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं की ऐसी कथित ‘मिलीभगत’ के कारण ही समाजवादी पार्टी नोएडा में जनता और भ्रष्टाचार जैसे बड़े मुद्दों पर कभी सड़क पर नहीं उतर पाती। पार्टी का ध्यान अक्सर गांव में किसानों की जमीन या फिर मामूली नाली-खड़ंजे की समस्याओं तक ही सीमित रह जाता है, जिससे उसकी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव व्यापक नहीं हो पाता।

राजनीति के गलियारों में तीसरी चर्चा उत्तर प्रदेश के नोएडा अथॉरिटी में एक महत्वपूर्ण विभाग में निदेशक पद को लेकर है। आगामी महीनों में एक वरिष्ठ अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के साथ ही, इस पद पर अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए एक जूनियर अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अप्रत्याशित रणनीति अपनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ को किसी भी संभावित सेवा विस्तार से रोकने और स्वयं उस पद पर आसीन होने की महत्वाकांक्षा में कथित तौर पर सोशल मीडिया और पारंपरिक मीडिया में अपने ही विभाग और वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ नकारात्मक खबरें प्रसारित करने का ‘अनुबंध’ कुछ लोगों को दिया है। इस ‘टास्क’ के मिलते ही, आजकल नोएडा प्राधिकरण को लेकर कई नकारात्मक खबरें मीडिया में छाई हुई हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी का नाम और तस्वीर लगाकर उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है जूनियर अधिकारी का स्वयं का ट्रैक रिकॉर्ड सवालों के घेरे में रहा है। उन्हें पूर्व में कई कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इससे भी अधिक विडंबना यह है कि जिस मुद्दे पर वे अपने वरिष्ठ को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, उस पर वे स्वयं अपने क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम करने में विफल रहे हैं।अब देखना यह है कि नोएडा अथॉरिटी में इस अंदरूनी जंग का परिणाम क्या होता है। क्या अधीनस्थ अधिकारी अपनी राजनीतिक चाल में सफल होकर पद हासिल करेंगे, या उनका यह पूरा दांव उल्टा पड़ जाएगा और वरिष्ठ अधिकारी को एक बार फिर से मौका मिल सकेगा? 

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