आशु भटनागर। नोएडा (NCR)। औद्योगिक विकास की धुरी कहे जाने वाले नोएडा को एक बार फिर उसी भयावह मंजर का सामना करना पड़ा, जिसने 13 साल पहले 2013 के दौरान शहर को दहला दिया था। सड़कों पर उग्र भीड़, धू-धू कर जलती गाड़ियाँ और फैक्ट्रियों पर बरसाए गए पत्थरों ने यह साबित कर दिया है कि औद्योगिक शांति का दावा करने वाले प्रशासन की नींव कितनी कमजोर है। कई लोगो ने इसे नोएडा के इतिहास का काला दिन तक कहा ।
क्या था 2013 का खौफनाक मंजर?
आज से करीब 13 साल पहले नोएडा के औद्योगिक गलियारों में मजदूरों का जो हिंसक चेहरा सामने आया था। 2013 में भी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा (विशेषकर कासना और साईं उपवन क्षेत्र) में मजदूरों द्वारा की गई तोड़फोड़ और हिंसा का मंजर बहुत ही भयावह था। वेतन वृद्धि, महंगाई, और कार्य परिस्थितियों (working conditions) को लेकर असंतोष के कारण, हजारों की संख्या में मजदूरों ने फैक्ट्रियों पर पथराव किया, वाहनों को आग लगा दी, और उत्पादन ठप कर दिया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिससे पुलिस और कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प हुई।
वही दृश्य आज नोएडा की सड़कों पर फिर दोहराया गया। डेढ़ सौ से अधिक फैक्ट्रियों पर पत्थरबाजी और कारों में लगाई गई आग ने उद्योगपतियों के ज़हन में पुराने जख्म ताज़ा कर दिए हैं। औद्योगिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि सुरक्षा पर सीधा प्रहार है।
सोमवार को हुआ घटनाक्रम
सुबह
8:00 बजे : फेज-2 में प्रदर्शन की आशंका देखकर एहतियातन पुलिस तैनात थी।
8:30 बजे : फेज-2 के सेक्टर-84 स्थित होजरी कॉम्पलेक्स और मदरसन कंपनी के पास कामगार इकट्ठा होना शुरू हुए।
9:00 बजे : लाठीचार्ज की खबर फैलते ही प्रदर्शनकारियों ने पुलिस जीप को आग के हवाले किया, कंपनियों में आग लगाई
10:00 बजे : फेज-2 में जगह जगह श्रमिकों ने पथराव करना शुरू कर दिया, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े
11:00 बजे : फेज-2 दो से बढ़ते हुए सेक्टर=63, 58, 65 समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्र में पत्थरबाजी और हिंसक झड़पें हुईं
दोपहर
12:00 बजेः पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए जगह-जगह किया लाठीचार्ज
1:00 बजेः सेक्टर 58 में फिर भड़की हिंसा
2:00 बजेः सेक्टर-63 में पुलिस की ओर से लाठी चार्ज हुआ
2:30 बजे: लगभग हर जगह पुलिस ने मोर्चा संभाला
3:00 बजे: सेक्टर-63 में थाने पर पथराव और कार सर्विस सेंटर में आगजनी
शाम
4:30 बजे स्थिति लगभग सामान्य हो गई।
लखनऊ तक गूंजी गूँज: हाई-लेवल कमेटी का दौरा
हिंसा की खबरें लखनऊ पहुँचते ही शासन में हड़कंप मच गया। औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम तुरंत नोएडा पहुँची। कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, डीएम मेधा रूपम और प्राधिकरण के सीईओ के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की गई। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल तो यह है कि क्या यह आश्वासन निवेश की सुरक्षा की गारंटी दे सकता है?
‘मंदिर का घंटा’ बने उद्योगपति
इस पूरे प्रकरण पर उद्योगपतियों में गहरा आक्रोश है। एक प्रतिनिधि ने तीखे शब्दों में कहा, “मजदूर, प्रशासन और पुलिस के लिए उद्योगपति महज ‘मंदिर के घंटे’ की तरह हो गए हैं, जिसे जब चाहे जो बजा देता है।” उद्योगपतियों का तर्क है कि वैश्विक अस्थिरता और महंगाई का असर आम आदमी पर पड़ा है, लेकिन अपनी मांगों को मनवाने के लिए अराजकता का रास्ता कतई स्वीकार्य नहीं है।
योगी सरकार की ‘यूएसपी’ पर लगा सवालिया निशान
सबसे गंभीर बात यह है कि इस घटना ने उत्तर प्रदेश की ‘कानून-व्यवस्था’ वाली छवि को बड़ा झटका दिया है। योगी सरकार की जिस यूएसपी (USP) के दम पर राज्य में भारी निवेश लाने का दावा किया गया था, वह आज सवालों के घेरे में है।
उद्योगपतियों का स्पष्ट मानना है कि अगर करोड़ों का निवेश करने के बाद भी फैक्ट्रियां सुरक्षित नहीं हैं, तो बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश की ओर रुख करने से पहले सौ बार सोचेंगी। उन्होंने इसे शासन का बड़ा ‘फेलियर’ करार दिया है।
कल बंद रहेंगी फैक्ट्रियां
हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कपड़ा उद्योग (Garment Industry) सहित कई संस्थाओं ने सुरक्षा के मद्देनजर मंगलवार को अपनी फैक्ट्रियां बंद रखने का निर्णय लिया है।
ऐसे में बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ‘औद्योगिक शांति’ केवल कागजों तक सीमित है? यदि शासन उद्योगपतियों का भरोसा खोता है, तो नोएडा का विकास रथ रुकना तय है। प्रशासन को केवल मुआवजा और कार्रवाई तक सीमित न रहकर, उस भरोसे को बहाल करना होगा जिसे आज की हिंसा ने चकनाचूर कर दिया है।


