ग्रेटर नोएडा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मियों की मांगों को लेकर चल रही हड़ताल के दौरान हुए उपद्रव मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कासना कोतवाली पुलिस ने सपा नेता विकास प्रधान और उनके अज्ञात समर्थकों समेत कुल 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि सपा नेता ने ही पूरी घटना की साजिश रची थी, जिसमें एक बीमार महिला को इलाज के बहाने लाकर हंगामा किया गया और कर्मियों को उपद्रव के लिए उकसाया गया। अब पुलिस सपा नेता समेत अन्य की गिरफ्तारी की तैयारी में है।
बुधवार रात हुई इस घटना के संबंध में प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र शुक्ला ने मीडिया को बताया कि हड़ताल पर बैठे आउटसोर्स कर्मियों को अस्पताल के पंजीकरण काउंटर के सामने से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा था। इसी दौरान, एक बंद गेट पर सपा नेता विकास प्रधान अपने समर्थकों और लगभग 60 वर्षीय एक महिला के साथ निसान मैग्नेट कार से पहुंचे। सपा नेता ने महिला की बीमारी का हवाला देते हुए गेट खोलने के लिए हंगामा शुरू कर दिया। गेट खुलने के बाद अस्पताल परिसर में उपद्रव हुआ।
पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच से यह खुलासा हुआ है कि सपा नेता और उनके समर्थकों ने कर्मियों को हिंसा के लिए भड़काया था। जांच में यह भी सामने आया है कि जिस महिला को इलाज के बहाने लाया गया था, जिम्स के रिकॉर्ड में उनका कोई भी एमएलपीसी (Medico-Legal Case) या इलाज दर्ज नहीं है। पुलिस ने शुरुआती पहचान में जिन 32 लोगों को चिह्नित किया था, उनमें से 20 सपा नेता और उनके समर्थक पाए गए हैं।
प्रभारी निरीक्षक ने दावा किया कि सपा नेता विकास प्रधान ने ही कर्मियों को साथ लेकर पूरी साजिश रचकर उपद्रव करवाया। उन्होंने बताया कि सपा नेता समेत अन्य आरोपियों पर मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की तैयारी है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सपा नेता विकास प्रधान आगामी विधानसभा चुनाव में जेवर क्षेत्र से टिकट के प्रबल दावेदार हैं और पूर्व में पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
इस बीच, पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में गिरफ्तार किए गए सात आउटसोर्स कर्मियों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इन कर्मियों पर हड़ताल पर बैठे अन्य साथियों को भड़काने का आरोप है। बुधवार को पुलिस ने कुल 53 कर्मियों को हिरासत में लिया था, जिनमें से 46 को चेतावनी देकर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया था।



