नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा छात्रों की मुख्य मांग स्वीकार किए जाने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस फैसले के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जश्न का माहौल देखा गया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने मंच संभालते हुए युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ‘हम जीत गए’ के नारे लगाए और इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया।
मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, “अक्सर यह कहा जाता था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने यह साबित कर दिया कि ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’।”
सीजेआई की टिप्पणी का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान अभिजीत दीपके ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का भी धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने हमें कॉकरोच कहा। अगर उन्होंने ऐसा नहीं कहा होता, तो शायद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता।”

खुद को और प्रदर्शनकारी छात्रों को ‘कॉकरोच’ के रूप में रेखांकित करते हुए दीपके ने कहा, “हम कॉकरोच हैं, एक बार कहीं घुस जाएं तो आसानी से बाहर नहीं निकलते। प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि यदि आप बिना डरे अपनी बात पर कायम रहें, तो जीत निश्चित होती है।”
दो नई मांगें रखीं सामने
इस्तीफे के बावजूद छात्रों ने आंदोलन पूरी तरह समाप्त करने से इनकार किया है। CJP प्रमुख ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी दो अन्य प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे पूरी तरह से वापस नहीं हटेंगे।
केस वापसी और पुलिस पर कार्रवाई: प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मामलों (FIR) को तुरंत वापस लिया जाए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने वाले पुलिसकर्मियों पर उचित कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: हालिया परिस्थितियों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। दीपके ने मांग की है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
फिलहाल जंतर-मंतर पर जीत का जश्न जारी है, वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी शेष मांगों को लेकर सरकार के अगले रुख का इंतजार कर रहे हैं।



