NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
इस्तीफा पत्र की मुख्य बातें
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को संबोधित करते हुए इस्तीफे के कारणों और भविष्य की योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया है। उनके पत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
परीक्षा में सुधार और जांच: पत्र में उल्लेख किया गया है कि NEET-UG परीक्षा में अनियमितता की खबरें सामने आते ही सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तुरंत सीबीआई (CBI) को सौंप दी थी। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराई गई।
CBT मोड का निर्णय: भविष्य में ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने घोषणा की कि अगले साल से NEET परीक्षा ‘कंप्यूटर आधारित टेस्ट’ (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।
छात्रों का हित सर्वोपरि: उन्होंने कहा कि 20 लाख से ज्यादा छात्रों की परीक्षा सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराना सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि किसी भी मेधावी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
परिणाम और राजनीति: 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणामों को उन्होंने संतोषजनक बताया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों को गुमराह करने और भ्रम फैलाने की कोशिश की।
भावुक अपील: धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वह व्यक्तिगत रूप से काफी दुखी हैं। उन्होंने भारत की युवा शक्ति को देश की असली ताकत बताया।
सुरक्षा और भविष्य की चिंता: उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जंतर-मंतर पर जारी स्थिति का फायदा कुछ ‘राष्ट्र विरोधी ताकतें’ उठा सकती हैं। वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगियों में उलझे, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
छात्रों को संदेश: उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से अपना अनशन समाप्त कर पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने की अपील की है।
राष्ट्र सेवा की प्रतिबद्धता
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्र सेवा ही जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपने पत्र के अंत में उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह भविष्य में भी भारत, विशेषकर ओडिशा के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित रहेंगे।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
शिक्षा मंत्री के इस कदम को जंतर-मंतर पर डटे छात्रों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस इस्तीफे से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है और परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने को तैयार है।
फिलहाल, जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र संगठनों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। जहां कुछ इसे न्याय की शुरुआत मान रहे हैं, वहीं कुछ अन्य परीक्षाओं के पूरे ढांचे में आमूलचूल बदलाव की मांग पर अड़े हैं।



