आशु भटनागर। ये बात कड़वी लग सकती है किंतु ऐसा लगता है 2026 अधिकारियो की अक्षमता से नोएडा के युवा इंजीनियरों की बलि लेने का खुनी वर्ष है । वर्ष के आरंभ में युवराज की असामयिक मृत्यु या सिस्टम द्वारा की गई हत्या की एसआईटी रिपोर्ट भले अब तक सार्वजनिक ना हुई हो किंतु नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के काले कारनामों के हाथों फिर एक युवा इंजीनियर आर्यन की मृत्यु का मामला सामने आ गया है । शनिवार को बृहस्पतिवार को सेक्टर 58 में बारिश के दौरान इंजीनियर आर्यन की मृत्यु होने का सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया है । जिसमें कहा जा रहा है कि बिजली के खंभे के पास पहुंचती हल्का झटका लगकर आर्यन नीचे गिर जाते हैं उन्हें बचाने के लिए एक राहगीर आगे बढ़ता है किंतु करंट महसूस करते ही पीछे हट जाता है । इसके बाद आसपास मौजूद अन्य लोग भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
कोतवाली प्रभारी अमित कुमार द्वारा मीडिया को दिए गए बयान के अनुसार मामले की जांच की जा रही है सीसीटीवी और अन्य साक्षी को देखा जा रहा है वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया जिसकी जांच रिपोर्ट होने के बाद ही अंतिम कारण पता चल पाएगा। वहीं इस पूरे मामले पर प्राधिकरण और बिजली विभाग आमने-सामने हैं। प्राधिकरण के जीएम सिविल एसपी सिंह के बयान को माने तो नाले में करंट उतरने की बात सामने आ रही है वहीं विद्युत नियम निगम के अधीक्षण अभियंता विवेक कुमार का दावा है कि इंजीनियर की मृत्यु करंट लगने से नहीं हुई बारिश के दौरान विद्युत आपूर्ति बंद थी ।
ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि प्राधिकरण के जीएम एसपी सिंह इस मामले पर सच छुपा रहे हैं या फिर बिजली विभाग के दावे के अनुसार प्राधिकरण ही आर्यन की मृत्यु का असली गुनहगार है, क्योंकि अगर उसे क्षेत्र में उसे समय विद्युत आपूर्ति बंद थी तो करंट लगने की संभावना नहीं थी ऐसे में आर्यन का खुले नाले में गिरना और उसके कारण लगी चोट से उनकी मृत्यु हो सकती है।
इसके बाद बड़ा प्रश्न फिर से उठता है कि जो नोएडा को उत्तर प्रदेश का शो विंडो कहा जाता है जो नोएडा प्रत्येक वर्ष स्वच्छता के पैमाने पर गोल्डन अवार्ड जीतता है वहां पर आखिर हर 4 महीने में एक युवक की मृत्यु कैसे हो रही है आखिर प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश को जीएम सिविल एसपी सिंह समेत इस पूरे मामले पर किसकी जिम्मेदारी तय करना चाहिए? क्या ये जिम्मेदारी उस वर्क सर्कल के वरिष्ठ प्रबंधक राजकमल की है जिन्होंने बरसात से पहले नालों पर टूट रहे पटरे चेक नहीं करवाएं या फिर यह सब जिम्मेदारी जीएम एसपी सिंह की ही है जिन्होंने स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान में फिर से प्रथम स्थान पाने के लिए शहर की अन्य समस्याओ पर ध्यान ही नहीं दिया और यहाँ के लोगों की जान दाव पर लगा दी ।

ऐसे नाले और ऐसे ब्लैक स्पॉट और कितनी जगह होंगे इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है क्योंकि प्राधिकरण के पास सर्किल वाइज ऐसी कोई रिपोर्ट ही नहीं है जिससे यह पता चल सके की कौन-कौन से जगह लोगों को खतरा हो सकता है और उनको सही करना है या फिर प्राधिकरण ऐसी रिपोर्ट को किसी कूड़ेदान में फेंक देता है कि इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं है। प्राधिकरण भले ही आँखे बंद कर ले किन्तु सोशल मीडिया पर लोगों ने पूरी लिस्ट जारी करी हुयी है जिसके अनुसार सेक्टर 62 मॉडल टाउन से सेक्टर 71 की ओर जाने वाली सड़क पर पेट्रोल पंप से आगे नल खुला हुआ है इसी तरीके से सेक्टर 66 में मामूरा के सामने नाले की दीवार कई महीने पहले टूट गई थी तब से नल खुला पड़ा है सेक्टर 121 में सड़क के किनारे नाल टूट खुला पड़ा है ऐसे अनगिनत नाल शहर में खुले पड़े हैं किंतु प्राधिकरण के अधिकारी स्वच्छता सर्वेक्षण में अवार्ड लेने में व्यस्त हैं। एक अधिकारी ने आफ द रिकार्ड कहा भी कि अब प्राधिकरण में अधिकारियो को मीडिया या सोशल मीडिया की ऐसी रिपोर्ट से फर्क पड़ता भी नहीं हैं।
प्राधिकरण के कार्यशैली कितनी प्रोएक्टिव हैं इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि फरवरी में सेक्टर 121 पृथला के पास गोल चक्कर के इंप्रूवमेंट के लिए एक टेंडर जारी किया गया जिसमें L1 पर आने वाले ठेकेदार ने टेंडर अवार्ड होने के बाद काम करने से मना कर दिया। उसके बाद युवराज कांड के बाद एनटीसी भंग कर दिया गया और अब उस टेंडर की जगह क्या हुआ इसका उत्तर देने के लिए किसी के पास कोई जानकारी नहीं है ।

सोशल मीडिया पर एक यूजर मनीष ने लिखा कि प्राधिकरण मे जनता की परेशानियों का समाधान नहीं बल्कि ठेकेदारों की सहूलियत देखी जाती है। नोएडा के पर्थला गोलचक्कर के आस पास रोजाना ही भीषण ट्रेफिक जाम का सामना करना पड़ता है। इस ट्रेफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए सड़क चौडीकरण, U-turn का निर्माण आदि कार्यों की निविदा Feb-2026 मे निकली थी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।NA WC6 के श्री विनीत शर्मा के मुताबिक निविदा के माध्यम से जो ठेकेदार L1 आया उसने काम का बॉन्ड बनवाने और काम करने से मना कर दिया और फिर से टेंडर निकाला जाएगा।बॉन्ड ना बनवाने और काम करने से मना करने वाले ठेकदार को पर क्या (ब्लैकलिस्टिंग की) कार्यवाई हुई? – श्री विनीत शर्मा के पास कोई जवाब नहीं।
इसे संयोग ही कहेगे कि इस प्रकरण के समय भी जीएम एसपी सिंह ही एनटीसी देख रहे थे और अब जिस जगह आर्यन की मृत्यु हुई है वो भी उन्ही की देखरेख में आता है। तो अंत मे सवाल यह भी है कि क्या आर्यन की मृत्यु पर फिर से एक एसआईटी गठन करके उसकी रिपोर्ट कहीं फाइलों में दबा दी जाएगी या फिर आर्यन युवराज की तरह उतना भी भाग्यशाली नहीं है कि उसके लिए कोई जांच समिति बनाई दी जाए । शायद 3 दशक पूर्व “नीम का पेड़” धारावाहिक के इस गीत का मर्म अब समझ आ रहा है
सदियों सदियों वही तमाशा
रस्ता रस्ता लम्बी खोज
मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाज़ारों में
ख़ामोशी पहचाने कौन



