नोएडा (स्थानीय समाचार): अगर आप भी अपने कम उम्र के बच्चों को गाड़ियां चलाने की छूट देते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक 15 वर्षीय नाबालिग कार से हुए हादसे के बाद सड़क पर खड़ा नजर आ रहा है। यह घटना नोएडा की बताई जा रही है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
हादसे से ज्यादा चर्चा और जन-आक्रोश का विषय नाबालिग की मां का ‘चलता है’ वाला गैर-जिम्मेदाराना रवैया बना हुआ है, जिसने इंटरनेट पर सड़क सुरक्षा और अभिभावकों की जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
ड्राइवर छुट्टी पर था, तो नाबालिग को सौंप दी स्टेयरिंग
प्राप्त जानकारी और वायरल वीडियो के मुताबिक, 15 वर्षीय किशोर कार लेकर निकला था और रास्ते में उसकी कार की टक्कर एक अन्य वाहन से हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टक्कर के बाद किशोर ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने उसे मौके पर ही रोक लिया और सवाल-जवाब करने लगे।
इसी दौरान किशोर की मां भी मौके पर पहुंचीं। जब प्रत्यक्षदर्शियों ने ड्राइविंग लाइसेंस की मांग की, तो यह बात सामने आई कि न तो मां के पास लाइसेंस था और न ही 15 साल के बेटे के पास। मां ने कथित तौर पर सफाई देते हुए कहा कि उनका नियमित ड्राइवर छुट्टी पर था, इसलिए उन्होंने बेटे को कार लेकर बाहर जाने की इजाजत दे दी।

‘चलता है’ रवैये पर भड़का सोशल मीडिया
हादसे के बाद महिला के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और बचाव में ‘चलता है’ कहने पर इंटरनेट मीडिया पर लोगों ने भारी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि नाबालिग को वाहन चलाने देना सीधे तौर पर किसी की जान जोखिम में डालने जैसा है। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि हादसे के समय कार में एक छोटा बच्चा भी मौजूद था। वीडियो के अंत में लोग पुलिस को बुलाने की बात करते सुनाई देते हैं, हालांकि मामले में पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
सवाल हादसे से ज्यादा जिम्मेदारी का है
यह घटना महज एक ट्रैफिक नियम के उल्लंघन की नहीं है। सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही भी किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है। कार चलाने के लिए उम्र सीमा, ड्राइविंग कौशल और लाइसेंस की बाध्यता इसीलिए तय की गई है ताकि चालक सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा की गंभीरता को समझ सके। इस मामले में असली सवाल उस 15 वर्षीय किशोर पर नहीं, बल्कि उस वयस्क (अभिभावक) की जिम्मेदारी पर उठता है, जिसने जानते-बूझते एक नाबालिग को सड़क पर कार दौड़ाने की अनुमति दी।
नाबालिग को वाहन देने पर क्या कहता है कानून?
भारत में सामान्य मोटर वाहन चलाने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act, 1988) की धारा 199A नाबालिगों द्वारा किए गए वाहन संबंधी अपराधों में अभिभावक या वाहन के मालिक की सीधी जिम्मेदारी तय करती है।
- 3 साल की जेल और जुर्माना: यदि नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है या हादसा करता है, तो अभिभावक या वाहन मालिक को दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की कैद और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
- गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द: संबंधित वाहन का पंजीकरण (Registration) 12 महीने के लिए निरस्त किया जा सकता है।
- 25 साल की उम्र तक लाइसेंस पर रोक: नियम तोड़ने वाले नाबालिग को 25 साल की उम्र पूरी होने से पहले ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाता।
यह घटना सभी अभिभावकों के लिए एक सीख है कि बच्चों की ज़िद या अपनी सहूलियत के लिए उन्हें वाहन की चाबी सौंपना प्यार नहीं, बल्कि कानूनन अपराध और बड़े हादसे को न्योता देना है।





