ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 72,000 वर्गमीटर भूमि के आवंटन और सब-लीज में करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े के मामले में नोएडा के थाना सेक्टर-20 में बड़ी कार्रवाई हुई है। न्यायालय के कड़े रुख के बाद, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) के पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) रविन्द्र तोंगड़, उनकी पत्नी कुशल सिंह, और रियल एस्टेट कंपनी ‘सीआरसी (CRC) ग्रुप’ के तीन निदेशकों सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। आरोप है कि पूर्व जीएम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों की बेनामी कंपनियों को फायदा पहुंचाया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन उठाया। एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि इस मामले में जुलाई महीने में कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस जमीन के दस्तावेज, सब-लीज, कंपनी रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट के ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या 11 से जुड़ा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 72,000 वर्गमीटर है। यह भूखंड वर्ष 2011 में प्राधिकरण द्वारा ‘गायत्री हॉस्पिटल लिमिटेड एंड रियलकॉन लिमिटेड’ को आवंटित किया गया था।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013 और 2014 के दौरान तत्कालीन जीएम रविन्द्र तोंगड़ ने नियमों के विरुद्ध जाकर इस भूखंड के क्षेत्रफल में बदलाव किया। मूल आवंटन में से पहले 20 हजार वर्गमीटर और बाद में 14 हजार वर्गमीटर (कुल 34,000 वर्गमीटर) जमीन बिना किसी वित्तीय लेन-देन के एक बेनामी कंपनी ‘इन्टाइसमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम सब-लीज करा दी गई। इस बेनामी कंपनी का संबंध रविन्द्र तोंगड़ की पत्नी कुशल सिंह और उनके अन्य करीबियों से बताया जा रहा है।
इसके बाद, इस सब-लीज की गई भूमि पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ‘सीआरसी (CRC) ग्रुप’ के साथ एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) तैयार किया गया। आरोप है कि इस दौरान फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों से भारी-भरकम लोन भी लिया गया।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
मामले का खुलासा तब हुआ जब मूल आवंटी कंपनी ‘गायत्री हॉस्पिटल लिमिटेड एंड रियलकॉन लिमिटेड’ के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह ने सब-लीज की गई 34,000 वर्गमीटर भूमि और अन्य स्रोतों से अर्जित धन में अपनी हिस्सेदारी मांगी। आरोप है कि हिस्सेदारी मांगने पर आरोपियों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और उनका पीछा किया गया।
स्थानीय पुलिस द्वारा शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने के बाद, पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) द्वितीय, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उपनिरीक्षक जितेन्द्र सिंह को इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सौंपी गई है, जो सभी बैंक खातों और कंपनी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
प्राथमिकी में नामजद मुख्य आरोपी:
रविन्द्र तोंगड़ (पूर्व महाप्रबंधक, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण)
कुशल सिंह (पूर्व जीएम की पत्नी, जो 2027 के विधानसभा चुनाव में दादरी सीट से दावेदारी की तैयारी में हैं)
कुणाल भल्ला (निदेशक, सीआरसी ग्रुप)
सतीश गर्ग (निदेशक, सीआरसी ग्रुप)
हिंमाशु गोयल (निदेशक, सीआरसी ग्रुप) इसके अलावा छह अन्य सहयोगियों को भी आरोपी बनाया गया है।
पहले भी हो चुकी है आयकर विभाग की छापेमारी
वर्ष 2012: आय से अधिक संपत्ति के मामले में रविन्द्र तोंगड़ के ठिकानों पर आयकर विभाग का पहला छापा पड़ा था।
वर्ष 2018 (सितंबर): दिल्ली के एक कारोबारी से वित्तीय लेनदेन के विवाद के बाद आयकर विभाग ने तोंगड़ के आधा दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए थे।
अब एक बार फिर मामला कोर्ट तक पहुंचा है और शिकायत के बाद पुलिस इस मामले में सभी वित्तीय लेन-देन, सब-लीज के मूल दस्तावेजों और बैंक लोन की फाइलों को खंगाल रही है। मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक जुड़ाव को देखते हुए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
प्रापर्टी डीलर से महाप्रबंधक बनने का सफर और पुराना विवाद
रविन्द्र तोंगड़ का विवादों से पुराना नाता रहा है। कहा जाता है कि वर्ष 2002 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में आने से पहले वह एक साधारण प्रॉपर्टी डीलर के रूप में काम करते थे। इसके बाद वह प्राधिकरण में अस्थायी सहायक प्रबंधक के तौर पर भर्ती हुए और जल्द ही स्थायी हो गए।
दावा तो यहाँ तक है कि तोंगड़ का तत्कालीन राजनीतिक गलियारों (सपा और बसपा सरकारों) में गहरा रसूख था। वर्ष 2007 में बसपा सरकार के दौरान उन्होंने प्रबंधक पद से इस्तीफा देकर सीधे महाप्रबंधक (जीएम) के पद के लिए आवेदन किया और उनका चयन हो गया। इसके बाद उन्हें ‘जीएम प्रॉपर्टी’ का महत्वपूर्ण प्रभार मिला। उनके कार्यकाल के दौरान ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिल्डरों को करीब सवा सौ भूखंडों का आवंटन हुआ। नॉलेज पार्क में शैक्षणिक संस्थानों को जमीन देने से लेकर औद्योगिक भूमि का लैंडयूज बदलकर बिल्डरों को सौंपने तक के मामलों में उनका सीधा हस्तक्षेप माना जाता था। अगर तोगड़ की निजी संपत्ति की बात करें तो दादरी और ग्रेटर नोएडा के 2 जगहों पर स्कूल. नॉलेज पार्क में होस्टल, दादरी में आलीशान बारात घर, जेपी गोल्फ कोर्स में फ्लैट और विला, ग्रेटर नोएडा समेत कई और शहरों में आलीशान मकान है। तोगड़ के स्कूल कौशल्या वर्ल्ड के बच्चों ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री को राखी भी बाँधी थी





