नोएडा। सेक्टर-81 स्थित ग्राम सलारपुर के निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। गांव में लंबे समय से लंबित कम्युनिटी हॉल के निर्माण को नोएडा प्राधिकरण ने हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय और त्वरित कार्रवाई के लिए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया है।
त्वरित कार्रवाई पर जताया
संतोष गौरतलब है कि 21 जुलाई 2026 को इस परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद प्राधिकरण ने तत्काल प्रभाव से निविदाएं (Tenders) आमंत्रित कर दी हैं। किसान नेताओं ने प्राधिकरण की इस कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक और मांगलिक आयोजनों के लिए एक व्यवस्थित स्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब इस आधुनिक कम्युनिटी हॉल के निर्माण से सलारपुर और आसपास के ग्रामीणों को शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रमों के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
क्या हैं कम्युनिटी हॉल की मुख्य विशेषताएं?
प्राधिकरण द्वारा जारी विस्तृत कार्ययोजना के अनुसार, इस भवन का निर्माण अत्याधुनिक सुविधाओं और बेहतर डिजाइन के साथ किया जाएगा:
लागत व थीम: यह परियोजना 576.97 लाख रुपये की अनुमानित लागत से तैयार की जाएगी। भवन का आकर्षण इसका ‘ग्रीक थीम’ पर आधारित डिजाइन होगा।
क्षेत्रफल: कुल 4,613.26 वर्ग मीटर भूमि पर यह प्रोजेक्ट फैला होगा, जिसमें 486.08 वर्ग मीटर के क्षेत्र में दो मंजिला भव्य भवन का निर्माण किया जाएगा।
ग्राउंड फ्लोर: यहां एक बड़ा डबल-स्टोरी हॉल, भव्य रिसेप्शन एरिया, दूल्हा-दुल्हन के लिए अलग-अलग कमरे (अटैच्ड वॉशरूम के साथ) और महिला व पुरुषों के लिए पृथक शौचालय की सुविधा होगी।
फर्स्ट फ्लोर: प्रथम तल पर एक विशाल हॉल के साथ चार अतिरिक्त कमरे बनाए जाएंगे, जिनमें अटैच्ड वॉशरूम की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
अन्य सुविधाएं: प्रोजेक्ट में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था, आधुनिक विद्युत उपकरण, परिसर का सौंदर्यीकरण और प्रवेश के लिए चौड़े रास्ते का निर्माण शामिल है।

एक वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, निविदा प्रक्रिया पूरी होने और अनुबंध (Agreement) हस्ताक्षरित होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस पूरी परियोजना को आगामी एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कम्युनिटी हॉल के बन जाने से गांव के सामाजिक ढांचे में सुधार होगा और सामुदायिक गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित व किफायती स्थान उपलब्ध होगा।





