आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज नोएडा में ‘UP TEX-2026’ के कर्टेन रेजर एवं रोड शो का आयोजन किया गया। जिसमे उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और खादी एवं ग्रामोद्योग कैबिनेट मंत्री राकेश सचान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर (खादी ग्रामोद्योग,हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग तथा सार्वजनिक उद्यम विभाग) और नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के अध्यक्ष ललित ठुकराल भी शामिल हुए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव अनिल सागर ने उधोगपतियो से उधोगो के सञ्चालन में आ रही समस्याओ पर बातचीत की।
इस रोड शो का मुख्य उद्देश्य आगामी 8 और 9 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित जुपिटर हॉल में आयोजित होने वाले ‘UP TEX-2026’ के मुख्य महाधिवेशन की रूपरेखा तैयार करना था। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण आज उत्तर प्रदेश में निवेश की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 की इन्वेस्टर्स समिट के दौरान सरकार ने आठ विशेष समूहों का गठन किया था। इन समूहों में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने देश-विदेश की यात्राएं कर निवेशकों को यूपी की संभावनाओं से अवगत कराया। विशेषकर दुबई में लगातार चार दिनों तक चले प्रयासों के बाद 23,000 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
मंत्री सचान ने दो टूक कहा, “उत्तर प्रदेश में सिर्फ कागजी नीतियां नहीं बनतीं, बल्कि उन पर शत-प्रतिशत काम भी होता है।” सरकार ने अपने बजट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा महज छह महीने के भीतर खर्च कर यह साबित कर दिया है कि उसका मुख्य उद्देश्य योजनाओं को त्वरित गति से जमीन पर उतारना है।
राज्य में वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयां देने के लिए लखनऊ और हरदोई में तैयार हो रहे टेक्सटाइल पार्कों का उद्घाटन जल्द किया जाएगा। इसके अलावा संतकबीरनगर, वाराणसी और बरेली समेत करीब 10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना है, जिनमें से 5 के लिए जमीन चिन्हित हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य नवंबर तक इन पार्कों का शिलान्यास कराने का है। इन पार्कों में निवेशकों को बेहद किफायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सूबे में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

टेक्सटाइल उद्योग के समक्ष चुनौतियां, यार्न की कीमतों में 60% की वृद्धि सबसे बड़ी चिंता और वैश्विक परिदृश्य -ललित ठुकराल
रोड शो के दौरान नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के अध्यक्ष ललित ठुकराल ने देश और प्रदेश के टेक्सटाइल व गारमेंट उद्योग के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती मजदूरी और उत्पादन लागत ने भारतीय निर्यातकों पर काफी दबाव बढ़ाया है। पिछले कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार परिस्थितियां अनुकूल नहीं रही हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों और ईरान-इजराइल संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक अस्थिरताओं ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के कारण भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। यार्न और अन्य इनपुट लागतों में बढ़ोतरी के चलते भारतीय गारमेंट निर्माताओं की प्रति पीस (Per Piece) लागत में लगभग 1 डॉलर का अतिरिक्त दबाव आ गया है। इस मामूली अंतर के कारण विदेशी खरीदार भारत के बजाय बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे देशों को तरजीह दे रहे हैं।
उद्योगपतियों और निर्यातकों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए ठुकराल ने बताया कि वर्तमान में टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती यार्न (धागे) की आसमान छूती कीमतें हैं। पिछले कुछ महीनों में यार्न की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने विनिर्माण लागत को बहुत बढ़ा दिया है। भारत बड़े पैमाने पर कच्चे माल (यार्न) का निर्यात बांग्लादेश और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को करता है। ठुकराल ने तर्क दिया कि यदि इस कच्चे माल का निर्यात करने के बजाय इसका उपयोग देश के भीतर ही कपड़ा और तैयार गारमेंट्स बनाने के लिए किया जाए, तो इससे घरेलू स्तर पर भारी मूल्यवर्धन (Value Addition) और रोजगार सृजन होगा।
सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव
उत्तर प्रदेश के मंत्री राकेश सचान और प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर के समक्ष ललित ठुकराल की अध्यक्षता में उधोग जगत की ओर से सरकार के समक्ष दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव रखे गए
वैल्यू एडिशन और निर्यात क्षमता: यदि भारत से होने वाले लगभग ₹1 लाख करोड़ के यार्न निर्यात को घरेलू स्तर पर कपड़ा निर्माण, प्रोसेसिंग और परिधान (गारमेंटिंग) के लिए सुरक्षित रखा जाए, तो मूल्यवर्धन के बाद इससे लगभग ₹3 लाख करोड़ के तैयार उत्पादों का निर्यात किया जा सकेगा। इससे देश के निर्यात मूल्य में तीन गुना वृद्धि होगी।
अस्थायी निर्यात नियंत्रण: ठुकराल ने यार्न के निर्यात पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग न करते हुए सरकार को सुझाव दिया कि 3 से 6 महीने के लिए यार्न निर्यात को नियंत्रित या अस्थायी रूप से निलंबित किया जाए। इस अवधि में सरकार को यार्न की कीमतों, घरेलू उपलब्धता और निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन (Review) करना चाहिए।
UP TEX-2026 से उम्मीदें
कार्यक्रम में आये उधोगपतियो ने एनसीआर खबर से बातचीत में अपेक्षा जताई कि आगामी ‘UP TEX-2026’ सम्मेलन सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद का एक मजबूत माध्यम बनेगा, जिससे नीतिगत समस्याओं का त्वरित समाधान निकाला जा सकेगा।
लखनऊ में 8-9 सितंबर को होने वाले इस मुख्य सम्मेलन में देश-विदेश के नीति निर्माता, निवेशक, टेक्सटाइल विनिर्माता, निर्यातक और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो उत्तर प्रदेश को वैश्विक पटल पर एक प्रमुख गारमेंटिंग हब बनाने की ठोस रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे।




