ग्रेटर नोएडा: बुधवार को ग्रेटर नोएडा में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का घेराव करने जा रहे किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़پ हो गई। प्रदर्शन को देखते हुए प्राधिकरण परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था, वहीं पुलिस ने प्राधिकरण से करीब एक किलोमीटर पहले ही किसानों को रोक लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और खींचतान देखने को मिली।
एफएनजी मॉल के पास रोके गए किसान बीते 8 अक्टूबर को सेक्टर-144 में किसान संघर्ष मोर्चा की हुई बैठक में बुधवार को यमुना प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया था। इसी रणनीति के तहत किसान नेता डॉ. रूपेश वर्मा, सोरन प्रधान और सुखबीर खलीफा के नेतृत्व में भारी संख्या में महिला और पुरुष किसान एफएनजी मॉल के पास एकत्र हुए थे।
जैसे ही किसानों ने प्राधिकरण की ओर मार्च करना शुरू किया, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें एफएनजी मॉल के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो, पुलिस ने लिया हिरासत में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और किसानों में तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस दौरान की कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों द्वारा किसानों और समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मोहित नागर को घसीटते हुए और जबरन पुलिस वैन में बैठाते हुए देखा जा सकता है। पुलिस की इस कार्रवाई की किसान संगठनों ने कड़ी निंदा की है।
प्रमुख मांगें किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। किसान नेताओं—सुखबीर खलीफा और डॉ. रूपेश वर्मा—के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
अधिग्रहित भूमि का 64% अतिरिक्त मुआवजा।
पुनर्वास के तहत 10% विकसित भूखंड (प्लॉट)।
किसानों की आबादी से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आगामी 21 अक्टूबर से यमुना प्राधिकरण पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया जाएगा। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण की स्थिति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है।



