नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक बार फिर चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गए हैं। मंगलवार को दिल्ली के रानी झांसी मार्ग स्थित अंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा आयोजित एक ‘धम्म दीक्षा’ कार्यक्रम में उनके शामिल होने और इसके दौरान जरूरी प्रतिज्ञाएं लेने के बाद उनके धर्म परिवर्तन को लेकर अटकलें और विवाद शुरू हो गया। दावा है कि ये प्रतिज्ञाएं लेने के बाद राजकुमार भाटी सैद्धांतिक रूप से बौद्ध धर्म अनुयायी बन चुके हैं। हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए धर्म परिवर्तन की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने इस पर सफाई दी है कि वे राजनीति में हैं इसलिए सभी धर्मों के आयोजनों में शामिल होते हैं। वे मंदिर, गुरुद्वारा में जाते हैं तो बौद्ध मठ में भी जाते हैं। इसी तरह वे बौद्धों के आयोजन में गए थे। उन्होंने कहा है कि उन्होंने हिंदू धर्म का त्याग नहीं किया है।
क्या है बौद्ध परंपरा में धम्म दीक्षा?
बौद्ध परंपरा के अनुसार, ‘धम्म दीक्षा’ बौद्ध धर्म ग्रहण करने की एक औपचारिक प्रक्रिया है। यह भगवान गौतम बुद्ध के बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने की एक विधि है। आमतौर पर यह दीक्षा किसी बौद्ध विहार में, किसी बौद्ध भिक्षु, भिक्षुणी या उपासक के मार्गदर्शन में दी जाती है।
इस प्रक्रिया के तहत व्यक्ति को ‘त्रिशरण’ (बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि) और ‘पंचशील’ (हिंसा न करना, चोरी न करना, झूठ न बोलना, नशा न करना और व्यभिचार से दूर रहना) के पांच नैतिक नियमों का पालन करने का संकल्प लेना होता है। इन प्रतिज्ञाओं को लेने वाला व्यक्ति सैद्धांतिक रूप से बौद्ध धर्म का अनुयायी बन जाता है। इसी प्रक्रिया में शामिल होने के कारण भाटी के धर्म बदलने की चर्चा शुरू हुई थी।
बौद्ध धम्म की दीक्षा लेने वाला व्यक्ति यदि हिंदू हो तो उसे डॉ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बौद्धों को दिलाई गईं 22 प्रतिज्ञाएं भी लेना जरूरी है। डॉ आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाते समय 22 प्रतिज्ञाएं दिलाई थीं। उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर की दीक्षाभूमि पर बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। हर साल इस तिथि पर धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस मनाया जाता है।
धम्म दीक्षा लेने के लिए डॉ भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं
- मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा।
- मैं राम और कृष्ण में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा।
- मैं गौरी, गणपति या अन्य हिंदू देवी-देवताओं में कोई श्रद्धा नहीं रखूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा।
- मैं ईश्वर के अवतार में विश्वास नहीं रखूंगा।
- मैं यह नहीं मानूंगा कि बुद्ध विष्णु के अवतार थे।
- मैं श्राद्ध नहीं करूंगा और पिंडदान नहीं दूंगा।
- मैं बुद्ध के धम्म के सिद्धांतों के विरुद्ध कोई आचरण नहीं करूंगा।
- मैं ब्राह्मणों से कोई कर्मकांड नहीं करवाऊंगा।
- मैं मनुष्यों की समानता में विश्वास रखूंगा।
- मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूंगा।
- मैं बुद्ध के आर्य अष्टांगिक मार्ग का पालन करूंगा।
- मैं बुद्ध द्वारा सिखाई गई दस पारमिताओं का पालन करूंगा।
- मैं सभी जीवों के प्रति करुणा रखूंगा और उनकी रक्षा करूंगा।
- मैं चोरी नहीं करूंगा।
- मैं झूठ नहीं बोलूंगा।
- मैं यौन दुराचार नहीं करूंगा।
- मैं नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करूंगा।
- मैं प्रज्ञा, करुणा और समानता के अनुसार जीवन जिऊंगा।
- मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूं, जो मानवता के लिए हानिकारक है और समानता में बाधा डालता है।
- मेरा दृढ़ विश्वास है कि बौद्ध धर्म ही सच्चा धम्म है।
- मेरा विश्वास है कि मेरा नया जन्म हो रहा है।
- मैं गंभीरता से घोषणा करता हूं कि मैं अपना जीवन बुद्ध के धम्म के अनुसार चलाऊंगा।
राजकुमार भाटी की सफाई
“मैंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा” विवाद बढ़ने पर राजकुमार भाटी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो हिंदू धर्म का त्याग किया है और न ही उनका धर्म परिवर्तन करने का कोई इरादा है। उन्होंने कहा कि वे एक सच्चे समाजवादी के रूप में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों का सम्मान करते हैं।
भाटी ने अपने स्पष्टीकरण में लिखा, “कल 20 अक्टूबर को अंबेडकर भवन में आयोजित कार्यक्रम में मैं मुख्य अतिथि के तौर पर सम्मिलित हुआ था। मैं सिख भाइयों के बुलावे पर गुरुद्वारे, मुस्लिम भाइयों के बुलावे पर मजलिस और हिंदू धर्म के तीज-त्योहारों में भी शामिल होता हूँ। बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के प्रति मेरा विशेष आकर्षण है और बाबा साहब के विचारों का मुझ पर गहरा प्रभाव है।”
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल और सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कट्टरवादी लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है। भाटी ने जोर देकर कहा कि उन्हें धर्म परिवर्तन करने की ना तो कोई आवश्यकता है और ना ही ऐसा कोई इरादा। उनका मानना है कि किसी भी धर्म में रहकर मानवता की सेवा की जा सकती है तथा भेदभाव, छुआछूत, घृणा, अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है।
सपा की बढेंगी मुश्किल
राजकुमार भाटी बीते लम्बे समय से समाजवादी पार्टी के लिए समस्याए खड़ी करते रहे है I इससे पहले उन्होंने ब्राह्मणों, गुर्जरों को लेकर कई ऐसे वक्तव्य दिए जिससे समाजवादी पार्टी को राजनैतिक तोर पर नुक्सान हुए हैं I अब इस नए विवाद के बाद एक बार फिर से पार्टी में उनको लेकर चर्चाये शुरू हो गयी है I पार्टी में कई लोगो का कहना है जिस पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं को भगवान कृष्ण का वंशज बताते हो उन्ही की पार्टी का कोई नेता कैसे किसी भी तरह श्री राम, श्रीकृष्ण को भगवन न मानने की प्रतिज्ञा कर सकता है I
रिस्की यादव नामक एक समाजवादी पार्टी समर्थक ने लिखा कि समाज सुधार आंदोलन चलाने के लिए पार्टी को इनको बाहर निकाल देना चाहिए क्योंकि राजनीति इनके बस की नहीं है। 2022 में स्वामी प्रसाद मौर्या ने जो किया 2027 में राजकुमार भाटी वही काम कर रहे हैं इनको हटा देना चाहिए। इनका रोज रोज का हो गया रात में बयान देंगे सुबह बोलेंगे गलत अर्थ निकाला गया जबकि वोट इनसे एक नहीं जोड़ा जाता है।
वहीं शत्रुघ्न नामक एक समाजवादी पार्टी समर्थक ने लिखा कि राजकुमार भाटी जैसे लोग समाजवादी पार्टी में रहकर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। पहले कल जाकर बौद्धिस्टों के साथ 22 प्रतिज्ञाओं की शपथ ली कि मैं ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, राम, कृष्ण, गौरी और गणेश को नहीं मानूंगा, न उनकी पूजा करूंगा और न ही उन्हें देवता मानूंगा। और आज आकर मूर्खतापूर्ण बयानबाजी कर रहे हैं कि हमें तो आमंत्रित किया गया था, इसलिए मैं गया था। अरे भाई, तुम अपने ही धर्म के देवी-देवताओं को न मानने, उनकी पूजा न करने और उन्हें देवता न मानने की शपथ ले रहे हो, तो बेहतर है कि तुम धर्म परिवर्तन ही कर लो। ऐसे लोगों की जरूरत हिंदू धर्म में नहीं है, जो हिंदू धर्म में रहकर हिंदू धर्म का ही अपमान करें और अपने ही देवी-देवताओं का अपमान करें। तुम सच में समाजवादी पार्टी में रहकर भाजपा के लिए काम कर रहे हो। भाजपा तो तुम्हारे ऐसे बयानों का फायदा उठाएगी ही!



