आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में आगामी चुनावों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, विशेषकर नोएडा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट को लेकर दावेदारों के बीच आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मुकेश शर्मा और भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा की एक साथ मंच साझा करते हुए तस्वीर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इस पूरे प्रकरण पर समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
नोएडा में खुद को सपा का प्रदेश स्तर का नेता बताने वाले एक स्थानीय दावेदार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर आपत्ति जताई थी कि समाजसेवी मुकेश शर्मा सपा से टिकट की मांग कर रहे हैं, लेकिन वे दूसरी ओर भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ सार्वजनिक मंच साझा कर रहे हैं। पोस्ट में यह भी तर्क दिया गया था कि विपक्षी दल के खिलाफ संघर्ष करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच इस तरह की नजदीकियों से गलत संदेश जाता है और उनका मनोबल गिरता है।
समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीतिक विचारधाराएं पूरी तरह विपरीत हैं। ऐसे में सपा से टिकट मांगने वाले नेता का भाजपा के प्रमुख सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ सार्वजनिक मंच पर दिखना उनकी वैचारिक दृढ़ता पर सवाल खड़े करता है। चुनावी मैदान में स्थानीय कार्यकर्ता रात-दिन विपक्षी दल के खिलाफ संघर्ष करते हैं। अपने ही संभावित प्रत्याशी को प्रतिद्वंद्वी दल के बड़े नेता के साथ इस प्रकार आत्मीयता से खड़े देखकर ज़मीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर विपरीत असर पड़ रहा है और उनमें असमंजस है।
सोशल मीडिया पर मुकेश शर्मा को लेकर समाजवादी पार्टी नेता का पोस्ट का एक अंश
सपा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता का बड़ा बयान
इस मामले में जब ‘एनसीआर खबर’ ने समाजवादी पार्टी के नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता से संपर्क किया, तो उन्होंने इन विवादों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कुछ लोगों की “छोटी सोच” करार दिया। डॉ. आश्रय गुप्ता ने स्पष्ट किया, “मुकेश शर्मा अभी तक समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से नहीं जुड़े हैं। ऐसे में वे किस मंच पर, किसके साथ हैं, यह पार्टी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि रामलीला, दुर्गा पूजा या अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मंचों पर विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग शिष्टाचारवश पहुंचते हैं। वहां उनका मिलना-जुलना कोई असाधारण बात नहीं है। इससे न तो किसी कार्यकर्ता का मनोबल गिरता है और न ही इस पर कोई आपत्ति होनी चाहिए। यदि पार्टी से जुड़े किसी व्यक्ति ने ऐसा बयान दिया है, तो वह उसकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है, जिसका पार्टी की आधिकारिक नीति से कोई लेना-देना नहीं है।
टिकट वितरण के सवाल पर महानगर अध्यक्ष ने साफ किया कि पार्टी में दर्जनों लोग अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जो कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जिसे भी उचित समझेंगे, उसे टिकट देंगे और पूरा संगठन मिलकर चुनाव लड़ेगा।
मुकेश शर्मा पक्ष की सफाई
विवाद के केंद्र में आए समाजसेवी मुकेश शर्मा के प्रतिनिधियों का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि वे अपनी संस्था ‘गौरी शंकर फाउंडेशन’ के माध्यम से शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं, जिसमें विभिन्न दलों के लोग अतिथि के रूप में शामिल होते हैं।
उस मंच पर मुकेश शर्मा जी की उपस्थिति किसी राजनीतिक दल के जुड़ाव के कारण नहीं, बल्कि आयोजन समिति के ससम्मान आग्रह पर ‘कार्यक्रम अध्यक्ष’ के रूप में थी। यह उनके वर्षों के सामाजिक प्रभाव और जनसेवा के प्रति समाज का सम्मान है। यह कोई एकमात्र स्थल नहीं है जहाँ मुकेश जी उपस्थित हुए हों। ‘गौरी शिक्षा फाउंडेशन’ के माध्यम से पूरे नोएडा में रामलीला, दुर्गा पूजा और नवरात्रि के दर्जनों आयोजनों में बड़े स्तर पर भागीदारी और सेवा कार्य किए जा रहे हैं। श्री रामलखन रामलीला सहित शहर के विभिन्न सेक्टरों व सोसायटियों के धार्मिक आयोजनों में भी वे लगातार जन-आशीर्वाद ले रहे हैं।
मुकेश शर्मा के समर्थकों का आरोप है कि टिकट की दौड़ में हताशा और निराशा का शिकार हुए कुछ प्रतिद्वंद्वी जानबूझकर ऐसी तस्वीरें वायरल कर रहे हैं ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रामलीला और सांस्कृतिक मंचों को राजनीतिक अखाड़ा बनाना और सामाजिक शिष्टाचार को वैचारिक विचलन बताना एक संकीर्ण और दोषपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ ही टिकट के दावेदारों के बीच इस तरह की बयानबाजी और आंतरिक प्रतिस्पर्धा तेज होना आम बात है, लेकिन नोएडा महानगर के शीर्ष नेतृत्व के स्पष्टीकरण के बाद ऐसे विवादों पर विराम लगने की संभावना है।



