शिक्षक स्नातक चुनाव: श्रीचंद शर्मा के आगे विपक्ष पस्त, फर्जी डिग्री और आरोपों के बीच मजबूत हुई स्थिति

आशु भटनागर
4 Min Read

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश के विधान परिषद (एमएलसी) शिक्षक और स्नातक निर्वाचन चुनावों के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। दशकों तक शिक्षक राजनीति का केंद्र रहे दिग्गज शिक्षक नेता पहली बार चुनावी समर से गायब हैं। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी और मौजूदा शिक्षक प्रतिनिधि श्रीचंद शर्मा अपने विरोधियों पर पूरी तरह भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

विपक्ष के हमले और फर्जी मतदाताओं के आरोप

चुनाव नजदीक आते ही विरोधी खेमों में खलबली मच गई है और श्रीचंद शर्मा के खिलाफ जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने हाल ही में श्रीचंद शर्मा पर लगभग 12,000 फर्जी वोट बनवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी (DM) से औपचारिक शिकायत भी की गई है।

सपा का दावा है कि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर वे अदालत का रुख करेंगे। मीडिया के सामने लगभग 300 ऐसे वोटों का भी जिक्र किया गया है जो कथित तौर पर शिक्षक नहीं हैं। हालांकि, इन तमाम आरोपों और फर्जी डिग्री के बे-सिरपैर के हमलों के बावजूद श्रीचंद शर्मा का चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और भाजपा इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है।

- Advertisement -
Ad image

बिखरा विपक्ष और निर्दलीयों की ‘हवा हवाई’ स्थिति

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के श्रीचंद शर्मा, सपा के नितिन तोमर और माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) समर्थित सुशील चौधरी के बीच माना जा रहा है। इसके अलावा कुलदीप मलिक, तनुज गंभीर, पंकज कुमार, बाकिर हुसैन, स्वराज पाल, सुशील, डॉ. सुशील कुमार पुंडीर और हरकेश सिंह जैसे कई निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन निर्दलीय प्रत्याशियों (विशेषकर कुलदीप मलिक) का प्रभाव केवल मीडिया की सुर्खियों और सोशल मीडिया के शोरगुल तक ही सीमित है। विश्लेषकों का मानना है कि ये निर्दलीय उम्मीदवार अपनी जमानत बचा पाने में भी नाकाम साबित होंगे।

इसके अलावा, शिक्षक संघ और ठकुराई गुट के प्रत्याशियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों का भारी बिखराव हुआ है, जिसका सीधा फायदा श्रीचंद शर्मा को मिलता दिख रहा है। पिछले चुनाव में इसी सीट पर श्रीचंद शर्मा ने बरसों से काबिज ओम प्रकाश शर्मा को शिकस्त देकर बड़ा उलटफेर किया था, और मौजूदा समीकरणों को देखते हुए उनकी स्थिति इस बार और अधिक सुदृढ़ नजर आ रही है।

क्या कहते हैं सियासी समीकरण?

फिलहाल ज़मीन पर श्रीचंद शर्मा का पलड़ा भारी है और विपक्ष के तमाम दावे और आरोप हवा हवाई साबित होते दिख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में क्या विरोधी दल और निर्दलीय प्रत्याशी केवल सोशल मीडिया की बयानबाजी तक सिमट कर रह जाते हैं, या फिर वे श्रीचंद शर्मा के विजय रथ को रोकने में कामयाब होते हैं।

Share This Article
आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे