आशु भटनागर । गौतम बुद्ध नगर में हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘अजेय’, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित है, ने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर जिले के भाजपा विधायक धीरेन्द्र सिंह ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे जिले से लेकर प्रदेश तक उनकी राजनीतिक स्थिति को एक नया मोड़ मिल सकता है।
भाजपा के स्थानीय नेताओं के लिए राष्ट्रवादी या भाजपा नेताओ पर बनी फिल्म की स्क्रीनिंग एक स्थापित परंपरा बन चुकी है, जिसमें ‘कश्मीर फाइल्स’ और ‘साबरमती रिपोर्ट’ जैसी फिल्मों को पहले बड़े पैमाने पर देखा गया था। हालांकि, अजेय के मामले में भाजपा के नेताओं द्वारा चुप्पी साधी गई है। यह चुप्पी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी में वर्तमान में कुछ आंतरिक बदलाव हो रहे हैं। कई नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर यह भी कहा कि वे शीर्ष नेतृत्व की नजरों में नहीं आना चाहते हैं।

वही धीरेंद्र सिंह की इस जल्दबाजी को लेकर भी चर्चा हो रही है। प्रश्न है कि क्या उन्हें यह जरूरी लग रहा है कि मोदी बनाम योगी की राजनीति में अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करें। कदाचित उनके बारे में यह माना जाता है कि वे कांग्रेस से भाजपा में आए हैं और दो बार चुनाव जीतने के बावजूद संघ में उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं रही है। ऐसे में, गुरुवार को अजेय की स्क्रीनिंग के जरिए उन्होंने योगी को समर्थन करते हुए अपने सुरक्षित राजनैतिक भविष्य के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath
धीरेन्द्र सिंह के सोशल मीडिया से
जी की संघर्ष यात्रा है Ajey: The Untold Story of a Yogi “अजेय”
यह फ़िल्म साधु से सीएम बनने की उस प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाती है, जिसमें समाज और राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा।
दूसरी ओर, जिले में नोएडा से भाजपा के ठाकुर विधायक पंकज सिंह, जो मोदी और योगी के बीच संतुलन बनाए हुए हैं, वे किसी विवाद में नहीं फंसना चाहते। तो क्या उन्होंने नोएडा में फिल्म की स्क्रीनिंग न कराने का फैसला किया। सूत्रों की माने तो पंकज सिंह का यह कदम उनके लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे वे पार्टी के भीतर एक स्थायित्व बनाए रख सकते हैं।
इस घटनाक्रम का एक और दिलचस्प पहलू है नोएडा महानगर अध्यक्ष महेश चौहान। संभवत: पंकज सिंह की कृपा से अध्यक्ष बने महेश भी फिलहाल किसी विवाद के दायरे से बाहर रहना चाहते हैं। हो सकता है पीछे उनका यह सोचना रहा हो कि वर्तमान में किसी भी राजनीतिक टकराव से बचना ही उनका सबसे बड़ा लाभ है इसलिए वो भी फिलहाल फिल्म को अपने कार्यकर्ताओं के साथ नहीं देखने गए हो।
तो ऐसे में संभावनाओं और आशंकाओं की भूल भुलैया के बीच आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या धीरेन्द्र सिंह इस फिल्म के माध्यम से अपने राजनीतिक कद को मजबूत कर पाएंगे या उनका ये कदम 2 बार से उनकी अजेय स्थिति को परिवर्तित कर सकता है । गौतम बुद्ध नगर के राजनीती के बीच भी यह महत्वपूर्ण है कि राजनेताओ के लिए फिल्में केवल मनोरंजन के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे राजनीति के बड़े उद्देश्यों को साधने का साध्य भी है। ऐसे में, यदि भाजपा के नेता अपने पत्ते खुलकर नहीं खेल रहे हैं, तो इसका मुख्य कारण पार्टी में आंतरिक स्थिति और भविष्य की संभावनाएं हैं और फिलहाल धीरेन्द्र सिंह के अपने पत्ते चल दिए है।


