गौतम बुद्ध नगर जिला अस्पताल पर होली का भारी दबाव: आकस्मिक विभाग में 210 केस, 40 डॉग बाइट; अगले दिन OPD में 3500 मरीज

NCRKhabar Mobile Desk
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गौतम बुद्ध नगर। गौतम बुद्ध नगर जिला अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, होली के उल्लास के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव देखा गया। त्योहार और उसके अगले दिन अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहा और आने वाले हर मरीज को समय पर इलाज सुनिश्चित किया।

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होली के दिन आकस्मिक विभाग में ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात

होली के दिन, 4 मार्च को, जिला अस्पताल के आकस्मिक विभाग (Casualty) में कुल 210 मामले दर्ज किए गए, जो त्योहार के दौरान स्वास्थ्य चुनौतियों को रेखांकित करते हैं। इन मामलों में विशेष रूप से चौंकाने वाला आंकड़ा कुत्ते के काटने (डॉग बाइट) का रहा, जिसमें 40 लोग उपचार के लिए पहुंचे। यह आंकड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता को दर्शाता है।

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अन्य प्रमुख मामलों में, आपसी झगड़ों और विवादों के कारण 54 लोग अस्पताल पहुंचे, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में घायल 17 मरीजों को भी उपचार दिया गया। इसके अतिरिक्त, 11 मरीज आर.एच.सी. (Rural Health Centre) से संदर्भित किए गए, एक जलने (बर्न) का मामला और एक जहर (पॉइजनिंग) का मामला भी दर्ज किया गया।

होली के अगले दिन (5 मार्च): OPD में रिकॉर्ड तोड़ भीड़

होली के ठीक अगले दिन, 5 मार्च को, जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) खुलते ही मरीजों का तांता लग गया। पूरे दिन में लगभग 3500 मरीजों का पंजीकरण और उपचार किया गया, जो सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक है। मरीजों की इस भारी संख्या से अस्पताल की व्यस्तता का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो त्योहार के बाद बढ़ी हुई बीमारियों और चोटों की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

मरीजों की भारी संख्या के बावजूद, अस्पताल ने सामान्य परामर्श के साथ-साथ गंभीर सर्जिकल प्रक्रियाओं को भी जारी रखा। इस दौरान 8 सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराए गए और 7 आंखों के ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जो विभाग की प्रभावी कार्यप्रणाली और स्टाफ की मुस्तैदी को दर्शाता है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, त्योहार के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों का अनुमान लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी मुस्तैदी काफी बढ़ा दी थी। स्टाफ की अतिरिक्त तैनाती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से यह सुनिश्चित किया गया कि आने वाले हर मरीज को समय पर और उचित इलाज मिल सके, और विभाग इस कार्य में काफी हद तक सफल भी रहा। यह अनुभव जिला अस्पताल की आपातकालीन स्थितियों से निपटने की क्षमता और तैयारियों को दर्शाता है।

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