नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के बीच, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई है। यह समर्थन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और पश्चिम एशिया की स्थिरता के प्रति उसकी चिंता को दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को बहरीन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनाए रखी। UNSC में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।

भारत इस प्रस्ताव के सह-प्रायोजकों में शामिल था और इसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 130 से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।
किन हमलों की हुई निंदा?
प्रस्ताव में ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर किए गए हमलों की ‘सबसे कड़े शब्दों में’ निंदा की गई है। सुरक्षा परिषद ने तेहरान से सभी हमलों को तुरंत रोकने और पड़ोसी देशों के खिलाफ धमकियों तथा उकसावे वाली गतिविधियों को बंद करने की मांग की है, जिसमें प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से की जाने वाली कार्रवाइयां भी शामिल हैं।
समुद्री व्यापार में दखल पर भी चेतावनी इसके अतिरिक्त, सुरक्षा परिषद ने समुद्री व्यापार और जहाजरानी में दखल देने की धमकियों की भी कड़ी निंदा की है। इसमें खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या वहां से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की किसी भी कोशिश का जिक्र किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारी जहाजों के नेविगेशन अधिकारों और उनकी स्वतंत्र आवाजाही का सम्मान किया जाना चाहिए।
सुरक्षा परिषद ने प्रभावित देशों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और रिहायशी इलाकों एवं नागरिक ढांचे पर हुए हमलों की भी निंदा की, जिनसे आम लोगों की मौत हुई और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। यह प्रस्ताव पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इच्छा को रेखांकित करता है।


