उत्तर प्रदेश शासन ने शुक्रवार देर रात बड़ा फेरबदल करते हुए सात आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया है वहीं कुछ प्रतीक्षारत आईएएस अधिकारियों को भी नयी तैनाती दी गई है। शासन ने लोक निर्माण विभाग के सचिव प्रकाश बिंदु को गृह विभाग में सचिव नियुक्त किया है। जबकि उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी की निदेशक नीना शर्मा को प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम विकास विभाग तथा महानिदेशक सार्वजनिक उद्यम विभाग नियुक्त किया गया है l
इसी तरह महानिदेशक सार्वजनिक उद्यम विभाग संजय कुमार को निदेशक उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश धर्मार्थ कार्य विभाग में विशेष सचिव रहे रघुवीर को विशेष सचिव दिव्यांगजन सशक्तिकरण का विभाग के पद पर तैनात किया गया हैl जबकि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम में प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात आशीष कुमार को उक्त पद के साथ-साथ धर्मार्थ कार्य विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है l किंतु इस समय सबसे चौंकाने वाले नाम नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ डॉक्टर लोकेश एम और ओएसडी रहे महेंद्र प्रसाद का सामने आ रहा है। जानकारी के अनुसार डॉक्टर लोकेश एम को उत्तर प्रदेश शासन ने लोक निर्माण विभाग में सचिन की जिम्मेदारी दे दी है वही नोएडा प्राधिकरण में ओएसडी रहे इस अधिकारी महेंद्र प्रसाद को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

दरअसल नोएडा के सेक्टर 150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में डूब कर युवराज की मृत्यु पर तीन माह बाद भी भले ही शासन कोई सख्त कार्यवाही नहीं कर पाया किंतु उसे दौरान हटाए गए सीईओ और ओएसडी को सचिव और विशेष सचिव की नियुक्ति देना शासन की मंशा पर प्रश्न खड़े कर रहा है।
युवराज की मृत्यु में दोषी कोई नहीं, सिस्टम का संदेश साफ!
मात्र 3 महीने में अधिकारियों को पुनर्नियुक्ति देकर एक तरीके से उत्तर प्रदेश शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि युवराज की मृत्यु पर बनाई गई एसआईटी की जांच में उसे कुछ नहीं मिला है । संभवत यही वजह रही होगी कि 3 महीने का समय बीतने के बावजूद ना तो एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर शासन ने मीडिया को कुछ बताया न ही उस पर किसी प्रकार के कार्यवाही कहीं दिखाई दी है और अब अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति से एक बात साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों को किसी आम आदमी की मृत्यु पर कोई संवेदना नहीं थी, कोई दुख नहीं था, बस उस समय जनता के आक्रोश को भटकने के लिए सरकार ने अधिकारियों को प्रतीक्षारत कर दिया था।
प्रश्न यह है कि उत्तर प्रदेश शासन ने एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ पाया नहीं है या फिर यह मान लिया है कि वहां युवराज स्वयं डूब गया था और अपनी मृत्यु के लिए वो स्वयं ज़िम्मेदार था । ऐसी कार्यवाही से लग रहा है कि वहां उसको बचाने के सारे इंतजाम पूरे थे, वहां मौजूद, पुलिस एसडीआरएफ एनडीआरएफ अपना कार्य तत्परता से कर रहे थे और इस बेसमेंट को बनाने वाले बिल्डर और स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में कोई दोषी नहीं था।
चर्चा ये भी है कि क्या 2027 का विधानसभा चुनाव पास होने के चलते आईएएस लॉबी ने स्वयं मुख्यमंत्री को भी यही समझा दिया हैं। वरना इतने बड़े कांड के मात्र 3 महीने बाद ही तब दोषी माने गए अधिकारियों को पुनः कार्य सौंप देना गले से नहीं उतर रहा है ।


