गौतम बुद्ध नगर कचहरी विवाद: अधिवक्ता वर्ग में फूट, एक गुट ने किया काम तो दूसरे ने किया बहिष्कार और धरना, पदाधिकारियों पर नाराजगी के बाद ‘अधिवक्ता सम्मान बचाओ संघर्ष समिति’ का गठन

आशु भटनागर
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आशु भटनागर । (इनपुट राजेश बैरागी) गौतम बुद्ध नगर कचहरी परिसर में मंगलवार को एक अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट की घटना ने जिले के अधिवक्ता वर्ग को गहरे तौर पर विभाजित कर दिया है। जहां एक ओर जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने न्यायिक कार्य जारी रखने का निर्णय लिया, वहीं अधिवक्ताओं के एक बड़े समूह ने घटना के विरोध में कामकाज का बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। यह विवाद अब दो स्पष्ट गुटों में बंट चुका है, जिससे कचहरी परिसर में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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बार एसोसिएशन का आधिकारिक रुख

न्यायिक कार्य जारी, कार्रवाई का आश्वासन जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी और महासचिव शोभाराम चंदीला ने मीडिया को जानकारी दी कि पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद की तहरीर जिला जज द्वारा ले ली गई है और मामले में उचित व सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के आधार पर, एसोसिएशन ने मंगलवार को सामान्य रूप से न्यायिक कार्य जारी रखने का निर्णय लिया। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन की ओर से किसी भी प्रकार की हड़ताल का आह्वान नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व बार की गरिमा को ठेस पहुंचाने और गुटबाजी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि वे दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन किसी भी षड्यंत्र को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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विरोधरत गुट का कड़ा रुख

इसके विपरीत, नीरज भाटी और श्याम सिंह भाटी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक बड़े समूह ने बार एसोसिएशन के इस रुख से असहमति जताई। उन्होंने पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद के समर्थन में एकजुटता दिखाते हुए घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूरी बनाकर न्यायालय परिसर में धरना दिया। उन्होंने इस दौरान पुलिस के प्रवेश पर भी रोक लगा दी और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। बड़ी संख्या में अधिवक्ता धरना स्थल पर डटे रहे, स्पष्ट करते हुए कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

वर्तमान पदाधिकारियों पर नाराजगी और ‘अधिवक्ता सम्मान बचाओ संघर्ष समिति’ का गठन

प्रदर्शन के दौरान, बार एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ भी अधिवक्ताओं के बीच गहरी नाराजगी साफ दिखाई दी। कई अधिवक्ताओं ने उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोनों पदाधिकारियों के बहिष्कार की घोषणा कर दी। भविष्य की रणनीति को मजबूत करने और अपने आंदोलन को धार देने के लिए, विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने ‘अधिवक्ता सम्मान बचाओ संघर्ष समिति, गौतमबुद्ध नगर‘ नामक एक नई समिति का गठन किया। इस समिति में अनिल भाटी एडवोकेट को अध्यक्ष और पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद एडवोकेट को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा कचहरी परिसर में अधिवक्ता वर्ग में पड़ी यह फूट, आने वाले दिनों में और गहरा सकती है, जिससे न्यायिक कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

@update @ 8.00 P.M. ताज़ा जानकारी के अनुसार लगातार बदल रहे घटनाक्रम के बीच बार कार्यकारिणी ने तत्काल एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में सर्वसम्मति से यह राय बनी कि मुट्ठी भर लोग अपनी राजनीतिक हार की हताशा में बार की एकता और अखंडता को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि इन “स्वयंभू” पदाधिकारियों के विरुद्ध बार एसोसिएशन जल्द ही कठोर विधिक कार्यवाही अमल में लाएगी। संस्था किसी भी सूरत में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

क्या थी घटना ?

यह विवाद कथित तौर पर कमिश्नरेट थाना बिसरख पुलिस द्वारा शनिवार रात्रि अधिवक्ता फरीद अहमद और उनकी पत्नी को उनके घर में घुसकर बेरहमी से पीटने और अधिवक्ता को अवैध रूप से हिरासत में लेने के बाद शुरू हुआ। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बिसरख थाना पुलिस के दरोगा श्रीपाल गिरी और अन्य पुलिसकर्मियों ने एक निजी रंजिश के चलते थाना फेस 2 अंतर्गत गांव ककराला स्थित फरीद अहमद के घर में घुसकर यह बर्बरता की। घटना शनिवार रात लगभग साढ़े 11 बजे की बताई गई है। इसके बाद, अधिवक्ता को थाना बिसरख लाकर अवैध रूप से हवालात में बंद कर दिया गया।

सूचना मिलने पर, रविवार सुबह जिला न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी और सचिव शोभाराम चंदीला, अन्य साथी अधिवक्ताओं के साथ थाना बिसरख पहुंचे और अवैध हिरासत में रखे गए अधिवक्ता को मुक्त कराया। अधिवक्ताओं ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर थाने पर काफी देर तक हंगामा किया। सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा शाम तक कार्रवाई के आश्वासन के बाद अधिवक्ता शांत हुए। इसके तुरंत बाद, गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर गहन जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप कल शाम को ही चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

हालांकि, पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के बावजूद, सोमवार को न्यायालय खुलने के साथ ही आक्रोशित अधिवक्ताओं के एक धड़े ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पूर्व बार अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता योगेन्द्र भाटी के नेतृत्व में इन अधिवक्ताओं ने न्यायालय में पैरवी के लिए आए पुलिसकर्मियों को दौड़ाकर बाहर खदेड़ दिया, जिससे परिसर में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल रहा। वरिष्ठ अधिवक्ता अमित राणा ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन ने इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन का समर्थन नहीं किया है, जिससे अधिवक्ताओं के बीच आंतरिक मतभेद भी उजागर हुआ।

इसी बीच, इस पूरे घटनाक्रम में एक अप्रत्याशित मोड़ भी आया जब और अधिवक्ता राकेश शर्मा ने बार एसोसिएशन को एक पत्र लिखकर पीड़ित अधिवक्ता फरीद अहमद की बार सदस्यता और ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ पर सवाल खड़े किए। शिकायत में फरीद अहमद की डिग्री को संदिग्ध बताया गया है, और उनके भाइयों की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता की जानकारी भी सामने आई है। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, बार एसोसिएशन ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की एक जांच कमेटी गठित की है, जिसे कल तक या दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे