दिल्ली-एनसीआर के उभरते हुए व्यावसायिक केंद्र नोएडा में मंगलवार तड़के एक बार फिर आग का तांडव देखने को मिला। सेक्टर-49 थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेक्टर 76 मेट्रो स्टेशन के ठीक सामने स्थित Vishal Mega Mart’ की पूरी इमारत आग की भेंट चढ़ गई। हालांकि, गनीमत यह रही कि यह हादसा सुबह करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच हुआ जब इमारत खाली थी, जिससे किसी की जान नहीं गई। लेकिन जिस तेजी से आग ने पूरी इमारत को निगल लिया, वह शहरी नियोजन और अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।
मिनटों में स्वाहा हुई करोड़ों की संपत्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत सबसे पहले इमारत के निचले हिस्से में स्थित एक स्वीट्स शॉप (मिठाई की दुकान) से हुई। ज्वलनशील पदार्थों और संकरे रास्तों के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और ऊपर की मंजिलों की ओर बढ़ गई। इस भीषण आग की चपेट में न केवल विशाल मेगा मार्ट आया, बल्कि पास में स्थित एक जिम और एक भव्य बैंक्वेट हॉल भी पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
नोएडा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) प्रदीप कुमार ने मीडिया को बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की 15 से 20 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। घंटों की मशक्कत के बाद सुबह तक आग पर काबू पाया जा सका। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें फिलहाल ‘शॉर्ट सर्किट’ की संभावना को प्राथमिक कारण मानकर जांच कर रही हैं।
आर्थिक नुकसान और सुरक्षा पर सवाल
स्थानीय लोगो के अनुसार यह घटना केवल एक ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि उन चेतावनियों का हिस्सा है जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
- सुरक्षा ऑडिट की खानापूर्ति: नोएडा जैसे नियोजित शहर में, जहां मेट्रो स्टेशनों के पास घनी व्यावसायिक गतिविधियां हैं, वहां एक मिठाई की दुकान से शुरू हुई आग का पूरी इमारत को राख कर देना यह दर्शाता है कि ‘इन-बिल्ट’ फायर फाइटिंग सिस्टम या तो नदारद थे या काम नहीं कर रहे थे। क्या इन परिसरों का नियमित सुरक्षा ऑडिट केवल कागजों तक सीमित है?
- आर्थिक प्रभाव: इस अग्निकांड में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। विशाल मेगा मार्ट जैसे रिटेल चेन और वहां संचालित जिम व बैंक्वेट हॉल से सैकड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी होती है। एक शॉर्ट सर्किट की लापरवाही न केवल संपत्ति का नुकसान करती है, बल्कि कई परिवारों के रोजगार को भी अनिश्चितता में डाल देती है।
फिर उठेगा अवैध व्यवसायिक बिल्डिंग का मुद्दा
नोएडा सीएफओ प्रदीप कुमार ने पुष्टि की है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और कोई जनहानि नहीं हुई है। सेक्टर-76 जैसे प्राइम लोकेशन पर जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो यह सीधे तौर पर नोएडा प्राधिकरण और दमकल विभाग की निगरानी पर सवाल खड़ा करती है। क्या व्यावसायिक लाइसेंस देते समय इन इमारतों के निर्माण और निकास द्वारों की पर्याप्त जांच की गई थी? नोएडा के सेक्टर 49 बरोला से लेकर सलारपुर तक अवैध अतिक्रमण करके बने जा रही व्यवसायिक बिल्डिंग पर नोएडा प्राधिकरण की चुप्पी का उद्दा एक बार फिर से उठाना आवश्यक है I दरअसल मेट्रो के पास ऐसी तमाम बिल्डिंग है जिनको लेकर कहा जाता है कि ये अवैध हैं किन्तु राजनैतिक दबाब और पैसे के चलते प्राधिकरण इन पर कोई कार्यवाही नहीं करता है और अगर करता भी है तो खानापूर्ति कर ली जाती है जिसका परिणाम ऐसे अन्गिकनद के तोर पर सामने आता है
ऐसे में महज ‘दुर्घटना’ कहकर पल्ला झाड़ने के बजाय, यह समय नोएडा के ऐसे क्षेत्रो में बने सभी कमर्शियल हब्स में कड़े फायर सेफ्टी ऑडिट और जवाबदेही तय करने का है, ताकि अगली बार किसी की मेहनत की कमाई इस तरह धुएं में न उड़े।


