मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा समाचार सामने आया है। अमेरिका और ईरान ने आपसी सहमति से सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन के खत्म होने से महज डेढ़ घंटे पहले यह घोषणा हुई, जिससे क्षेत्र में छाई युद्ध की काली घटाएं फिलहाल छंट गई हैं।
15 दिनों तक नहीं होगी कोई बमबारी
समझौते के अनुसार, अगले 15 दिनों तक अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या बमबारी नहीं होगी। इस शांति समझौते का असर इजरायल पर भी पड़ा है, जिसने ट्रंप के इस फैसले से सहमति जताते हुए ईरान पर किसी भी तरह के हमले न करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, विवादों के केंद्र में रहे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खोलने पर भी सहमति बन गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता साफ हो गया है।
इस्लामाबाद में होगी शांति वार्ता
तनाव को स्थाई रूप से खत्म करने के लिए 10 अप्रैल, शुक्रवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। इस बैठक को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका को ईरान से 10 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिस पर आगे चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पहले के कई विवादित मुद्दों पर दोनों देश एक आम सहमति के करीब पहुँच चुके हैं।
पर्दे के पीछे चीन की भूमिका, पाकिस्तान बना मध्यस्थ
इस पूरी शांति प्रक्रिया में एक दिलचस्प मोड़ भी देखने को मिला है। हालांकि पाकिस्तान की अपील को ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है, लेकिन समाचारों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे चीन की कूटनीति बड़ी भूमिका निभा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पिछले कुछ दिनों में पर्दे के पीछे से दोनों देशों पर तनाव कम करने के लिए भारी दबाव बनाया था, जिसका परिणाम आज सीजफायर के रूप में सामने आया है।
क्या होंगे अगले 15 दिन?
अब सभी की आंखे इन 15 दिनों की शांति अवधि पर टिकी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी कड़वाहट को भुलाकर एक ठोस समझौते की रूपरेखा तैयार करने का अंतिम मौका हो सकता है।
ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा पाकिस्तानी प्रस्ताव को स्वीकार करना और ट्रंप का ईरानी विदेश मंत्री के बयान को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना यह दर्शाता है कि दुनिया फिलहाल युद्ध के मुहाने से वापस लौट आई है। अब देखना यह होगा कि क्या 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता कोई स्थाई समाधान निकाल पाती है या यह शांति महज एक अल्पकालिक विराम साबित होगी।


