आशु भटनागर। ईरान-इज़राइल युद्ध में सीजफायर के समाचारों के बीच, उत्तर प्रदेश में चुनावी संघर्ष भी अपने चरम पर है। हाल ही में दादरी में हुई समाजवादी पार्टी (सपा) की रैली के बाद, लोगों की निगाहें अब नोएडा की विधानसभा सीटों के गणित पर टिकी हैं। विशेष रूप से, एक नाम राजनीतिक गलियारों में तेजी से गूंज रहा है – बृजभूषण सिंह की सुपुत्री शालिनी सिंह, जिन्होंने भाजपा के गढ़ माने जाने वाले नोएडा में न सिर्फ भाजपा खेमे में हलचल मचाई है, बल्कि अब समाजवादी पार्टी के समर्थकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
भाजपा का अभेद्य दुर्ग, पर पंकज सिंह की दूरी बनी चिंता
लगभग एक दशक से अधिक समय से नोएडा विधानसभा सीट भाजपा का अभेद्य दुर्ग रही है। डॉ. महेश शर्मा, विमला बाथम और वर्तमान में पंकज सिंह – तीनों ही भाजपा से विधायक रहे हैं। पंकज सिंह ने 2017 में 64% वोटों के साथ जीत दर्ज की थी, और 2022 में तो उन्होंने 70% वोट हासिल कर 1.81 लाख से अधिक मतों के विशाल अंतर से सीट जीती थी। ऐसे में, किसी भी अन्य पार्टी के उम्मीदवार के लिए नोएडा से जीत की आशा करना दिवास्वप्न के समान प्रतीत होता है।
हालांकि, पंकज सिंह की अभूतपूर्व जीत के बावजूद, नोएडा के मतदाताओं में उनसे व्यक्तिगत जुड़ाव की कमी महसूस की जाती है। भाजपा के वोटर उन्हें मत तो दे देते हैं, किंतु उनसे मिलने या अपनी समस्याओं को साझा करने में वे अक्सर खुद को नाकाम पाते हैं। यह दूरी ही शायद वह छोटी सी दरार है, जिस पर अब अन्य राजनीतिक समीकरण आकार लेने लगे हैं।
शालिनी सिंह की सक्रियता और भाजपा की अंदरूनी संभावनाएं
पिछले कुछ समय से बृजभूषण सिंह की सुपुत्री शालिनी सिंह की नोएडा में अचानक और निरंतर सक्रियता ने राजनीतिक पंडितों का ध्यान खींचा है। उनकी यह सक्रियता डॉ. महेश शर्मा कैंप के लोगों के साथ देखी जा रही है, जिससे यह अटकलें तेज़ हो गई हैं कि अगर पंकज सिंह को लखनऊ में कोई बड़ी भूमिका मिलती है, तो नोएडा से शालिनी सिंह भाजपा की दावेदार हो सकती हैं।
शालिनी सिंह की उम्मीदवारी कई मायनों में भाजपा के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित LSR कॉलेज से लॉ ग्रेजुएट होने के कारण वह शिक्षित और शहरी मतदाताओं को सहजता से प्रभावित कर सकती हैं। महिला मतदाताओं के साथ-साथ जातीय समीकरणों में फिट बैठते हुए, वह हाई-राइज सोसाइटियों में रहने वाले प्रोफेशनल्स और उच्च वर्ग के मतदाताओं के बीच भी अपनी पैठ बना सकती हैं।
सपा की नई उम्मीद: क्या शालिनी सिंह होंगी ‘गेम चेंजर’?
चौंकाने वाली बात यह है कि शालिनी सिंह का यही करिश्मा अब केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहा है। सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के कई समर्थक खुलकर शालिनी सिंह को सपा से टिकट देने की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि शालिनी सिंह समाजवादी पार्टी में शामिल होकर नोएडा से चुनाव लड़ती हैं, तो वह सपा के अब तक के रहे उम्मीदवार सुनील चौधरी और वर्तमान दावेदार डा आश्रय गुप्ता से कहीं बेहतर मुकाबला कर पाएंगी और भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगा सकती हैं। हाल ही में एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अखिलेश यादव के परिवार के साथ अपने पिता के पुराने और मधुर संबंधों का जिक्र किया मुलायम सिंह यादव और उनके पिता के बीच कुश्ती को लेकर गहरा जुड़ाव था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लगाव पूरी तरह से व्यक्तिगत है और राजनीति से परे है। उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह आज भी अखिलेश यादव को काफी स्नेह करते हैं और यह रिश्ता बहुत पुराना है।। जब उनसे नोएडा से चुनाव लड़ने पर सवाल हुआ, तो उन्होंने इसे सिरे से नकारा नहीं। शालिनी ने कहा कि फिलहाल उन्होंने ऐसा कोई पक्का मन नहीं बनाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर भविष्य में ऐसी परिस्थितियां बनीं, तो वह इससे पीछे नहीं हटेंगी। इससे भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि उनका झुकाव सपा की तरफ हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बड़े सियासी दांव के रूप में देख रहे हैं। जिस तरह पूर्वांचल में भाजपा के खिलाफ एक माहौल बनने की सुगबुगाहट चल रही है, अगर उसकी प्रतिक्रिया पश्चिम उत्तर प्रदेश तक भी दिखाई देने लगी, तो ऐसे में नोएडा में पंकज सिंह के मुकाबले शालिनी सिंह को उतारकर समाजवादी पार्टी एक बड़ा खेल कर सकती है। उनकी छवि, शिक्षा और नेतृत्व क्षमता सपा को एक मजबूत विकल्प प्रदान कर सकती है, जो भाजपा के एकतरफा दबदबे को चुनौती दे पाए।
संभावनाएं और अनसुलझे सवाल
हालांकि, इन संभावनाओं के इतर कई प्रश्न अनुत्तरित हैं – क्या समाजवादी पार्टी शालिनी सिंह को अपने पाले में लाने में कामयाब हो पाएगी? क्या वाकई ऐसा कोई समीकरण बन सकता है जब शालिनी सिंह और उनके परिवार भाजपा की जगह सपा में दिखाई दें? क्या सपा समर्थकों की यह आशाएं फलीभूत हो पाएंगी, या फिर ये केवल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘ख्याली पुलाव’ हैं?
इसका जवाब अगले कुछ हफ्तों या महीनों में ही मिलेगा, जब चुनावी बिसात पर शतरंज की गोटियां और स्पष्ट रूप से बिछाई जाएंगी। लेकिन एक बात तो तय है – शालिनी सिंह के इर्द-गिर्द घूमती यह अटकलें नोएडा की राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार कर चुकी हैं, और इसने दोनों प्रमुख दलों के लिए चिंतन का विषय पैदा कर दिया है।


