शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा पर प्रहार अनुचित: गलगोटिया और मंगलमय इंस्टीट्यूट के बाहर समाजवादी पार्टी के नेता के प्रदर्शन पर न्यायालय की रोक

NCR Khabar News Desk
3 Min Read

गौतमबुद्धनगर: शैक्षणिक परिसर, जो ज्ञान और अनुशासन के केंद्र होने चाहिए, आज वे राजनीतिक वर्चस्व के अखाड़े बनते जा रहे हैं। हाल ही में गलगोटिया विश्वविद्यालय और मंगलमय इंस्टीट्यूट के बाहर जिस प्रकार की उग्र प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षण संस्थानों की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गौतमबुद्धनगर के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेताओं पर शिक्षण संस्थानों के बाहर धरना-प्रदर्शन एवं अभद्रता करने पर रोक लगा दी है।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

चीनी रोबोट विवाद और हंगामा 

विवाद की जड़ फरवरी माह में तब पड़ी, जब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय पर यह आरोप लगा कि उसने दिल्ली में आयोजित एआई समिट में एक चीनी रोबोट को अपना बताकर पेश किया। इस मुद्दे को तूल देते हुए समाजवादी पार्टी की छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मोहित नागर ने विश्वविद्यालय के बाहर उग्र प्रदर्शन किया और परिसर में घुसकर भी हंगामा किया। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध की आड़ में किसी निजी संस्थान के भीतर घुसकर अशोभनीय व्यवहार करना कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत का सख्त रुख 

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त से शिकायत की और अंततः न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसी क्रम में, नॉलेज पार्क-2 स्थित मंगलमय इंस्टीट्यूट ने भी परीक्षाओं की शुचिता और शांति बनाए रखने के लिए अरुण नागर के विरुद्ध अदालत में याचिका दायर की।

मामले की गंभीरता को समझते हुए अदालत ने मोहित नागर और अरुण नागर को इन संस्थानों के बाहर धरना देने और गाली-गलौज करने से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। जिला न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अलबेल भाटी ने इस निर्णय की पुष्टि की है।

कानून का शासन सर्वोपरि 

युवा नेताओं को यह समझना होगा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए शैक्षणिक संस्थानों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाना एक खतरनाक प्रवत्ति है। प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाना न तो छात्रहित में है और न ही समाज के। न्यायालय का यह आदेश न केवल इन दोनों संस्थानों के लिए राहत की बात है, बल्कि उन सभी शिक्षण केंद्रों के लिए एक नजीर है जो राजनीतिक दबाव और अनियंत्रित प्रदर्शनों से त्रस्त हैं।

शिक्षा का मंदिर किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। यह समय की मांग है कि राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि किसी के निजी स्वार्थ के कारण ज्ञान की साधना में लगे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय न हो।

Share This Article
एनसीआर खबर दिल्ली एनसीआर का प्रतिष्ठित हिंदी समाचार वेब साइट है। एनसीआर खबर में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय,सुझाव और ख़बरें हमें mynews.ncrkhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं या 09654531723 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I अपना सूक्ष्म सहयोग आप हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : 9654531723@paytm के जरिये दे सकते है