आशु भटनागर। गौतमबुद्धनगर में विकास परियोजनाओं को लेकर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कई बड़े दावे किए। जहां उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उसके जल्द संचालन का आश्वासन दिया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी फिल्म सिटी परियोजना का भविष्य एक बार फिर अटकलों और नई तारीखों के ढेर में दब गया है।
24 अप्रैल को यीडा सीईओ राकेश कुमार सिंह ने प्राधिकरण के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित साधारण प्रेस वार्ता में मीडिया को संबोधित करते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एयरपोर्ट जल्द ही परिचालन में आएगा और शाम तक इसके संचालन से जुड़े विदेशी सीईओ के मामले को भी सुलझाने का पत्र भी मीडिया को भेजा गया है। यह घोषणा एयरपोर्ट की प्रगति के प्रति एक सकारात्मक संकेत देती है, जो क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन माना जा रहा है।
इसी दिन किसी बड़े कार्यक्रम की अनुपस्थिति ने महीने भर से बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी के शिलान्यास की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पुरानी खबरों की तरह यह समाचार भी धूल फांकने के लिए छोड़ दिया गया। लेकिन, सीईओ सिंह ने एक नया दावा पेश करते हुए अगले एक से डेढ़ महीने में फिल्म सिटी का शिलान्यास होने की बात कही है।
तारीख नई, आशंकाएं पुरानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राकेश कुमार सिंह ने दावा किया कि 230 एकड़ में विकसित होने वाली इस फिल्म सिटी का शिलान्यास अगले 45 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, परियोजना के प्रथम चरण में 130 एकड़ में स्टूडियो और फिल्म इंस्टीट्यूट का निर्माण शुरू हो जाएगा।
यह बयान पत्रकारों और उद्योग विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि क्या सीईओ के इन दावों को “अबकी बार फिल्म सिटी पार” का वास्तविक नारा माना जाए, या यह “तारीख पर तारीख” की तरह एक और फिल्मी डायलॉग साबित होगा? पांच वर्षों से लंबित इस परियोजना के लिए बीते एक वर्ष में यह आठवीं बार है जब नई समय-सीमा की घोषणा की गई है, जिससे संदेह गहरा रहा है।
मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट, अधर में लटकी परियोजना
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि फिल्म सिटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इसके निर्माण और संचालन का जिम्मा बोनी कपूर और भूटानी समूह की संयुक्त कंपनी बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी प्रा. लि. को 90 वर्ष के लिए दिया गया है। पिछले साल जून में 230 एकड़ की इस परियोजना के पहले चरण के लिए मानचित्र स्वीकृति दे दी गई थी, लेकिन अभी तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। शुरुआती चरण में स्टूडियो और फिल्म इंस्टीट्यूट का निर्माण होना है।
हाल ही में, बोनी कपूर ने आवंटित जमीन पर अपनी आगामी फिल्म ‘माम 2’ की शूटिंग की थी और दावा किया था कि फिल्म सिटी का काम शुरू हो गया है। हालांकि, यमुना प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश शासन ने इसे फिल्म सिटी के आधिकारिक निर्माण कार्य का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था, जिससे परियोजना की स्थिति और भी अस्पष्ट हो गई। लगभग 1500 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस परियोजना को यीडा अब जल्द से जल्द मूर्त रूप देना चाहता है। प्राधिकरण ने अपने स्थापना दिवस को इसके शिलान्यास के लिए चुना भी था, लेकिन एक बार फिर कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई, सिवाय एक नई समय-सीमा के।
स्टेकहोल्डर्स की चुप्पी और अनिश्चित भविष्य
इस पूरे घटनाक्रम में बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी प्राइवेट लिमिटेड के स्टेकहोल्डर्स पूरी तरह से गायब नज़र आ रहे हैं। एनसीआर खबर ने बेव्यू भूटानी के प्रवक्ता राजीव अरोड़ा और भूटानी की ओर से मीडिया से बात करने वाले अलीराम चेटली से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन उपलब्ध नहीं हुए। स्टेकहोल्डर्स की यह चुप्पी परियोजना के भविष्य पर और भी सवाल खड़े करती है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या सीईओ राकेश कुमार सिंह अपने 25वें स्थापना दिवस पर किए गए एक से डेढ़ महीने में फिल्म सिटी के शिलान्यास के दावे पर खरे उतर पाएंगे, या फिर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का “लाइट, कैमरा, एक्शन” अभी भी दूर की कौड़ी है? लम्बे प्रयासों के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जहां प्रगति की राह पर है, वहीं फिल्म सिटी का भविष्य अभी भी अनिश्चितता के धुंधलके में लिपटा हुआ है।


